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अंतरिक्ष में भारत ने फिर रचा इतिहास, सफलतापूर्वक लॉन्च की गगनयान की टेस्ट फ्लाइट

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बीरेंद्र कुमार झा

अंतहीन अंतरिक्ष की असीम रहस्यों को उजागर करने की दिशा में अब भारत ने भी कदम बढ़ा दिया है। इस कड़ी में आज शनिवार को इसरो ने इतिहास रचते हुए स्वदेशी गगनयान की पहली टेस्ट फ्लाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। अंतरिक्ष में मानव भेजने का नए भारत का यह पहला सफल परीक्षण है।मिशन की सफलता से यह भी साफ हो गया है कि आने वाले समय में स्वदेशी तकनीक के सहारे भारतीय अंतरिक्ष में दुनिया के अन्य देशों को टक्कर देंगे।

दो बार में कुल मिलाकर 45मिनट के लिए टाला गया प्रक्षेपण

रॉकेट का प्रक्षेपण पहले शनिवार सुबह 8:00 बजे के लिए निर्धारित था।लेकिन बाद में इसे दो बार कुल 45 मिनट के लिए टाला गया। इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने बाद में बताया कि किसी विसंगति के कारण प्रक्षेपण तय कार्यक्रम नहीं हो सका था।उन्होंने कहा टीवी- डी 1 रॉकेट का इंजन प्रक्रिया के अनुसार चालू नहीं हो सका था।

प्रक्षेपण की सफलता पर वैज्ञानिकों के मुरझाए चेहरे हुए प्रफुल्लित

2 घंटे की देरी और टीवी- डी 1 इंजन की शुरुआत में प्रक्रिया के तहत चालू नहीं हो पाने के बाद पैदा हुई घबराहट के बीच इसरो के वैज्ञानिकों ने रॉकेट का सटीक प्रक्षेपण किया। यान के क्रू मॉड्यूल एवं क्रू एस्केप पृथक्करण का लक्ष्य हासिल करते ही श्री हरीकोटा स्थित मिशन नियंत्रण केंद्र में सांसें थामे बैठे वैज्ञानिकों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। इसरो ने घोषणा की कि टीवी d1 मिशन पूरी तरह सफल रहा। तय योजना के अनुसार पेलोड बाद में समुद्र में सुरक्षित तरीके से गिर गया।

3 दिनों के लिए मानव को 400 km की निचली अंतरिक्ष में भेजने और वापस लाने की है योजना

इसरो ने एकल तरल प्रणोदक वाले रॉकेट के इस प्रक्षेपण के जरिए मानव को अंतरिक्ष में भेजने के अपने महत्वकांछी कार्यक्रम गगनयान की दिशा में आगे कदम बढ़ा दिया है।इसरो का लक्ष्य तीन दिवसीय गगनयान मिशन के लिए मानव को 400 किलोमीटर की पृथ्वी की निचली कक्षा में अंतरिक्ष में भेजना और पृथ्वी पर सुरक्षित वापस लाना है।इसरो ने शुक्रवार को कहा था कि इस परीक्षण उड़ान की सफलता शेष परीक्षणों और मानव रहित मिशन के लिए आधार तैयार करेगी ,जिससे पहले गगनयान कार्यक्रम शुरू होगा।

गौरतलब है कि इसरो एकल चरण तरल प्रणोदक वाले रॉकेट के इस प्रक्षेपण के जरिए मानव को अंतरिक्ष में भेजने के अपने महत्वाकांक्षी कार्यक्रम की दिशा में आगे बढ़ रहा है।इस दौरान प्रथम क्रू मॉडल के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का परीक्षण किया जाएगा। इसरो का लक्ष्य तीन दिवसीय गगनयान मिशन के लिए मानव को 400 किलोमीटर की पृथ्वी के निचली कक्षा में अंतरिक्ष में भेजना और उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाना है।

पूरी तरह से है आधुनिक

क्रू मॉड्यूल रॉकेट में पेलोड है और यह आंतरिक यात्रियों के लिए अंतरिक्ष में पृथ्वी जैसे वातावरण के साथ रहने योग्य है।इसमें एक दबाव युक्त धात्विक आंतरिक संरचना और थर्मल सुरक्षा प्रणालियों के साथ एक बिना दबाव य,मोमन बाहरी संरचना शामिल है।

गगनयान का क्रू मॉड्यूल की डिजाइन पूरी तरह से आधुनिक है इसमें कई तरह की खास सुविधाएं लगाई गई है जैसे नेविगेशन सिस्टम,फूड हीटर फूड स्टोरेज हेल्थ सिस्टम। यह आंतरिक यात्रियों की सुविधा के लिए बनाए गए हैं

 

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