न्यूज़ डेस्क
कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे के बेटे और कर्नाटक सरकार में आईटी मंत्री प्रियांक खड़गे इनदिनों काफी चर्चा में हैं। पहले तो उन्होंने सनातन बहस पर स्टालिन का साथ देकर इस मुद्दे को और गर्माया और अब मोदी सरकार पर नाम बदलने का आरोप लगाते हुए उन्हें नेम चेंजर की उपाधि दी है। प्रियांक खड़गे ने कहा है कि मोदी सरकार ने सत्ता संभालने के बाद “गेम चेंजर” होने का दावा किया था, लेकिन वह महज ‘नेम चेंजर’ बनकर रह गई है।
वह इंडिया का नाम बदलकर ‘भारत’ करने की केंद्र की कथित योजना पर प्रतिक्रिया दे रहे थे।सोशल मीडिया पर मंत्री खड़गे ने कहा कि 2014 से पहले भारत अमेरिका, रूस और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा था। बीजेपी ने गुजरात और उत्तर प्रदेश मॉडल के नाम पर जातियों और जातीय समूहों के बीच नफरत के बीज बोए हैं। अब, उन्होंने एक ‘मणिपुर मॉडल’ बनाया है।
खड़गे ने कहा, “बीजेपी से और क्या उम्मीद की जा सकती है जिसने देश को पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों से तुलना करने पर मजबूर कर दिया है?” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भारत में कुशल शासकों ने बिना नाम बदले जमीनी स्तर पर बदलाव लाए।इस बीच, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा है कि देश का नाम भारत करने की कोई जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि संविधान में देश का नाम भारत बताया गया है और यह एक ऐसा नाम है जिस पर सभी सहमत हैं। उन्होंने कहा, “इसका नाम बदलने की कोई जरूरत नहीं है।” उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि “केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, हमारे गठबंधन ‘इंडिया’ के डर से रिपब्लिक ऑफ इंडिया का नाम बदल कर रिपब्लिक ऑफ भारत करने पर उतारू हैं।”
शिवकुमार ने कहा, “कोई देख सकता है कि भाजपा और केंद्र सरकार आगामी लोकसभा चुनावों में अपनी हार देख रही है। भारतीय मुद्रा पर इंडिया नाम है और इसे बदलने का प्रयास किया जा रहा है।”
जानकार कह रहे हैं कि बीजेपी की सबसे बड़ी परेशानी इंडिया गठबंधन से है। इंडिया नाम होने की वजह से बीजेपी इस पर कोई हमला नहीं कर पा रही है। ऐसे में बीजेपी आय यह चाहती है कि इंडिया शब्द को ही हटा दिया जाए और भारत देश को भारत के नाम से ही जाना जाए। वैसे सरकार कुछ भी कर सकती है लेकिन यह सब एक जटिल प्रक्रिया है। और सबसे बड़ी बात यह है कि जब देश अभी जी 20 का मेजबानी कर रहा है तब मोदी सरकार नाम बदलने के ऊपर राजनीति को फोकस किये हुए हैं। देश के सामने कई समस्या है और सरकार सिर्फ चुनाव लाभ तलाश रही है।

