मोदी सरकार पर उद्धव शिवसेना का बड़ा हमला ,कहा चोर बाजार के असली मालिक कौन ?

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न्यूज़ डेस्क 
महाराष्ट्र में चल रहे राजनीतिक उलटफेर पर उद्धव शिवसेना ने बड़ा हमला करते हुए प्रधान मंत्री मोदी पर निशाना साधा है। पार्टी के मुखपत्र सामना के सम्पादकीय में मोदी सरकार पर हमला करते हुए कहा गया है कि बीजेपी चोर बाजार हो गई है और चोरी और लूट  का माल खरीदने खरीदने में वह  रही है। सामना के सम्पादकीय का शीर्षक रखा गया है ”चोर बाजार के असली मालिक —-” इसमें पीएम मोदी की तस्वीर लगाईं गई है।      
  उद्धव शिवसेना ने सामना में लिखा, कांग्रेस मतलब ‘लूट की दुकान’, झूठ का बाजार ऐसा जोरदार हमला प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान में एक कार्यक्रम में बोलते हुए किया। उनका ऐसा बोलना आम बात है। प्रधानमंत्री को सही मायने में अपनी पार्टी के बारे में बोलना था, लेकिन भूल से उनके मुंह से कांग्रेस का नाम आ गया।  कांग्रेस अथवा अन्य राजनीतिक ‘दल’ लूट की दुकान होंगे तो भाजपा लूट का माल खरीदकर अपना घर क्यों भर रही है? इसका खुलासा प्रधानमंत्री मोदी को करना चाहिए। मूलत: भाजपा ही अब राष्ट्रीय चोर बाजार हो गई है।  चोरी का, लूट का माल खरीदने वाली पार्टी के तौर पर बदनाम हो गई है। 
                 देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए शिवसेना के मुखपत्र में लिखा है- महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री फडणवीस मोदी के आदेश का पालन करते हुए कहते हैं, ‘मैं फिर आऊंगा, ऐसा बोला था। आते समय ‘दो’ को लेकर आया।’ ये दो मतलब शिंदे-अजीत पवार। दोनों पर बेशुमार भ्रष्टाचार के आरोप हैं। मतलब ‘आते समय भ्रष्टाचार व लूट का माल लेकर आए।  ऐसा ही श्रीमान फडणवीस कहना चाह रहे होंगे। प्रधानमंत्री मोदी आठ दिनों पहले बोले थे, ‘राष्ट्रवादी कांग्रेस यह सबसे भ्रष्ट पार्टी है।’ उसी राष्ट्रवादी पार्टी को उन्होंने तुरंत गोद में बैठा लिया।                
  सामना में आगे केसीआर का जिक्र किया गया. शिवसेना ने संपादकीय में लिखा, अब मोदी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव पर हमला बोला है। केसीआर सरकार मतलब सबसे भ्रष्ट सरकार, ऐसा आरोप मोदी ने लगाया है। अब हमें उस केसीआर पार्टी की चिंता है. क्योंकि मोदी जिस पार्टी को भ्रष्ट कहते हैं अगले कुछ दिनों में वह पार्टी भाजपा का मित्र बनकर सत्ता में शामिल हो जाती है। अथवा भ्रष्ट पार्टी में फूट डालकर उसमें सबसे भ्रष्ट गुट को भाजपावासी बनाया जाता है। यही भाजपा का राजनीतिक शिष्टाचार बन गया है। 
                 मणिपुर हिंसा और खालिस्तान आंदोलन का जिक्र करते हुए सामना में लिखा गया, मणिपुर में भाजपा की सरकार रहते हुए वहां दो महीने से जारी हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। लगभग दो सौ के आसपास लोगों की यहां मौत हुई है और प्रधानमंत्री ने अब तक मणिपुर हिंसाचार पर मुंह नहीं खोला है। इसे क्या कहेंगे? प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में खालिस्तानी आंदोलन फिर से सिर उठा रहा है। कनाडा से लेकर लंदन तक खालिस्तानी समर्थक हमारे दूतावास के सामने जाकर देश विरोधी नारे लगाते हैं तो कहीं दूतावास पर तोड़फोड़ करते हैं और सरकार इस संदर्भ में पूरी तरह से मौन धारण किए हुए हैं। 

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