इसराइल के प्रधानमंत्री ने ईरान पर आक्रमण करने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को क्या समझाया और ट्रंप ने क्या समझा यह या तो इजरायल की प्रधानमंत्री नितिन याहू ही बता सकते हैं या फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले को लेकर जो बहाने बनाए, उसमें एक यह था कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई ईरानियों खासकर महिलाओं के स्वतंत्रता पूर्वक जीवन निर्वाह पर सिकंजा कस रहे हैं,जिस कारण वहां युवाओं का विद्रोह हो रहा है। और दूसरा कारण यह था की ईरान परमाणु बम या तो बना चुका है या बनाने की बिल्कुल स्थिति में पहुंच गया है।
इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने-अपने सैनिकों से ईरान पर मिसाइल और बमों से हमला करवा दिया। जवाब में ईरान ने भी सीधे और प्रॉक्सी वार का सहारा लेते हुए इसराइल पर और अमेरिकी सैनिक ठिकाने वाले यूएई, कुवैत आदि खाड़ी देशों पर मिसाइलों, ड्रोनों और बमों से जबरदस्त पलटवार करना शुरू कर दिया।
डोनाल्ड ट्रंप जिस ईरान को दो-चार दिनों में घुटनों पर लाकर वहां के तेल बाजार पर कब्जा कर वैश्विक तेल बाजार को अपने नियंत्रण में लेना्् चाह रहे थे।
लेकिन उनका वह सपना धरा का धरा रह गया। 40 दिनों तक चले युद्ध के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसराइल के साथ मिलकर भी ईरान को अपने सामने झुका नहीं सके । यहां तक कि जब पाकिस्तान को प्यादा बनाकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौता वाली राजनीति प्रारंभ की तो वहां भी ईरान झुका नहीं।कहा जाता है कि अमेरिकी प्रतिनिधि के तौर पर वार्ता में शामिल उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को वार्ता के दौरान ही एक फोन आया और उसके बाद जेडी वेंस ने वार्ता को असफल करार देते हुए आगे वार्ता जारी रखने से किनारा कर लिया।
इस तरह से देखा जाए तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जो भी आरोप ईरान पर लगाए ।वह सारे झूठे निकले। अमेरिका को ईरान से एक भी परमाणु बम नहीं मिला। इस युद्ध में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई समेत कई प्रमुख व्यक्तियों के मारे जाने के बावजूद अमेरिका ईरान में सत्ता परिवर्तन करवाने में सफल नहीं रहा।
यहां तक तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जो कुछ किया वह उनका उद्देश्य नहीं था और ऐसा भी नहीं था कि आज जो बात झूठ साबित हो रही है, उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी। उन्हें तो उनके खुफिया विभाग ने स्पष्ट रूप से इस बात की जानकारी दी थी। दरअसल यह सब उनके भविष्य की कार्य योजना को छुपाए रखने की एक छोटी सी कड़ी थी। उनका यह कार्य योजना होर्मुज जलडमरू मध्य पर कब्जा जमा कर वहां से गुजरने वाली जहाज से रंगदारी वसूलते हुए दुनिया को अपनी चौधराहट दिखाना है। ईरान पर आक्रमण करने के बाद भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने इस इरादे को छुपाए पाए हुए थे। यहां तक कि पहले जब होर्मुज जल डमरू मध्य खुलवाने के लिए नाटो से सहयोग मांगा था और नाटो ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया था, तब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह कहकर कि अब इसे लेकर वे देश कार्रवाई करें,,जिनको इससे लाभ होता है, इनके देश के तेल के जहाज हार्मुज जलडमरू मध्य से नहीं गुजरते, इसलिए वह इस मामले में आगे कुछ नहीं करेंगे, अपनी भविष्य की दुनिया पर चौधराहट दिखाने वाली इस योजना को अपने मन के अंदर छुपाए रखा। लेकिन इस राज को जाहिर नहीं होने दिया था।
इस बीच हार्मुज जलडमरू मध्य में यही काम ईरान ने करना प्रारंभ कर दिया,तब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस मामले में खुलकर सामने आ गए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रैल 2026 में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) पर आक्रामक भाषा का उपयोग करते हुए ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) खोलने की धमकी दी थी। उन्होंने दावा किया कि होर्मुज में टोल वसूलने का अधिकार अमेरिका के पास है और अगर ईरान ने शांतिपूर्ण जहाजों पर हमला किया, तो अमेरिकी नेवी ईरान को ऐसा करने से रोकेगी और वहां नाकेबंदी कर देगी। और उसने ऐसा करना प्रारंभ कर दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिस प्रकार से होर्मुज जल डमरू मध्य को लेकर धीरे-धीरे सैन्य कार्रवाई तेज करने की तरफ बढ़ते चले जा रहे हैं, उसे देखते हुए तृतीय विश्व युद्ध का एक बड़ा खतरा मंडराने लगा है। खासकर चीन और रूस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दुनिया मैं चौधराहट दिखाने के लिए होर्मुज जलडमरू मध्य पर कब्जा करने की ओर अग्रसर होने की स्थिति में उन पर अंकुश लगाने की बात करने लगे हैं। इस तरह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपनी इस नई नीति पर बढ़ने से विश्व की अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ने लगा है।
अप्रैल 2026 की स्थिति के अनुसार, अमेरिकी उद्योगपति ईरान के साथ जारी संघर्ष और तनाव के कारण वैश्विक तेल की कीमतों में भारी उछाल से चिंतित हैं। वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की “ईरान को झुकाने की जिद” और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के चलते उपजे सप्लाई चेन संकट को लेकर शिकायत कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी कारोबार पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दुनिया भर में रोज नए-नए समीकरण बन रहे हैं बिगड़ रहे हैं। धीरे-धीरे चीन और रूस के भी इस मामले में दिए जाने वाले बयान और तल्ख टिप्पणियां इस समीकरण को कई तरह से प्रभावित करने लगे हैं। लेकिन तमाम परिस्थितियों के बावजूद भारत बिना किसी का पक्ष लिए निरपेक्ष भाव से अपने हितों को लेकर एक रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए हैं, ताकि ताकि ईरान पर अमेरिका और इजरायल के युद्ध को लेकर बनने वाला कोई भी समीकरण भारत के हितों के मार्ग में कोई परेशानी उत्पन्न ना कर सके।

