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तो ख़त्म हो जाएगी आजम खान की राजनीति –

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अखिलेश अखिल
जिस तरह से सपा नेता आजम खान और उनके परिवार की घेराबंदी चल रही है उससे साफ़ लगता है कि अब उनकी राजनीति ख़त्म हो जाएगी। आजम खान अपनी लोकसभा सीट गंवा चुके हैं। अपनी पारम्परिक विधान सभा सीट भी गंवा चुके हैं अब उनके बेटे की सीट पर संकट मंडरा रहा है। अगर यह सीट भी चली जाती है तो आजम परिवार की राजनीति ख़त्म हो जाएगी। आजम खान इन दिनों अपने परिवार की अंतिम सीट को बचाने की चुनौती से जूझ रहे हैं। उनके बेटे वाली सीट परिवार का अंतिम किला है अगर यह नहीं बच पाया तो न सिर्फ सपा का यह दुर्ग भी बिखड़ जाएगा बल्कि इसके साथ ही आजम परिवार का यह अंतिम किला भी ढह जाएगा।

आजम खान सपा के संस्थापक लोगो में शामिल रहे हैं। वे मुलायम सिंह के बड़े सहयोगी तो रहे ही सपा के यादव -मुस्लिम समीकरण के खिलाडी भी रहे। आजम खान मुलायम सिंह की छाया रहे तो मुलायम सिंह भी आजम के बिना अधूरे ही रहे। बिना आजम खान की सहमति के उंहोने कोई बड़ा निर्णय नहीं लिया। सपा की राजनिति को आगे बढ़ाने, कई बार यूपी में सरकार बनाने में आजम की राजनीति को कमतर नहीं माना गया। हालांकि इस राजनीति का लाभ आजम खान भी उठाते रहे लेकिन अब वही आजम खान दर्जनों मामलो के लपेटे में हैं और उनकी अधिकतर संपत्ति तहस नहस हो चुकी है। आजम खान की सांसदी पहले ही चली गई थी। विधान सभा चुनाव जीते लेकिन वह सीट भी चली गई और अब बेटे वाली सीट जाने की संभावना अधिक बढ़ गई है।

आजम खान 2019 में तमाम विपरीत परिस्थिति में राम लोकसभा सीट जीत पाए थे। बाद में वे रामपुर सदर सीट से विधान सभा चुनाव जीते। जीतने के बाद उन्होंने अखिलेश के लिए लोकसभा की सीट छोड़ दी। आजम और अखिलेश की सीट पर उपचुनाव हुए और सपा की हार हुई ,बीजेपी के पास दोनों सीटें चली गई। इसके कुछ दिनों के बाद एक मामले में आजम खान को सजा हुई और विधान सभा की सदस्यता भी चली गई। रामपुर विधान सभा सीट पर उपचुनाव हुए लेकिन उस सीट पर भी कब्जा बीजेपी का हो गया। अब बेटे की एक सीट स्वार बची हुई है जो जाने की स्थिति में है।

पिछले चुनाव में स्वार सीट से आजम के बेटे अब्दुल्ला ने जीत दर्ज की थी। यह सीट भी आजम परिवार की पारम्परिक सीट रही है। लेकिन अब इस सीट पर भी ग्रहण लगता दिखता रहा है। एक पुराने मामले में अब्दुल्ला दोषी करार किये गए हैं। इस सीट पर भी अब चुनाव होने की संभावना है। अगर इस सीट से आजम परिवार का कोई सदस्य चुनावी मैदान में नहीं उतरता है तो यह सीट भी आजम परिवार से चला जाएगा और उनका अंतिम किला भी ढह जाएगा।

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