मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमवीर सिंह जिसने कानून का रक्षक होने का शपथ लेकर भी कानून का जमकर भक्षण किया। पुलिस प्रमुख होने के बावजूद पुलिस के ही द्वारा अवैध पैसा बनाने के लिए पुलिस का एक गुंडा गैंग के रूप में चलाने का नया ट्रेंड विकसित करने वाले परमवीर सिंह इस समय दिशा सालियां मामले में आदित्य ठाकरे रिया चक्रवर्ती आदि के साथ नामित आरोपी हैं। दिशा सालियों के पिता सतीश सालियान और उनके वकील निलेश ओझा ने जब मुंबई पुलिस से दिशा सालियां का मामला सीबीआई के पास पहुंचा तो इन लोगों को नामित आरोपी बनाया है। लेकिन नामित आरोपी होने के बावजूद अभी तक सीबीआई ने ना तो परमवीर सिंह को अपनी कस्टडी में लेकर कोई पूछताछ की है और ना ही अन्य आरोपियों। कहां जाता है कि यह परमवीर सिंह का ही तिकड़म है जिस कारण सीबीआई अभी तक दिशा सालियान मामले में किसी भी नामित आरोपी को अपनी कस्टडी में लेकर पूछताछ नहीं कर रही है।
यह कोई पहला मामला नहीं है जब परमवीर सिंह किसी मामले में नामित आरोपी बना हो। पुलिस के माध्यम से जबरन उगाही , एंटीलिया बम कांड और मनसुख हिरेन हत्याकांड मामले में भी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच के दौरान उन पर सवाल उठे। इनके लिए काम करने वाले सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन वाजे जेल गए ,अपनी सेवा से बर्खास्त हुए, लेकिन उनके आका परमवीर सिंह का बाल भी बांका नहीं हुआ।उन्होंने अपनी सेवा पूरी की और तब कहीं जाकर वे सेवानिवृत हुए। उनके विरुद्ध चाहे किसी भी प्रकार का मामला रहा हो , चाहे किसी भी राजनीतिक दल की सरकार रही हो, लेकिन सब के सब मानो उनके अनुचर हों और पुलिस विभाग से तो ये खुद ही थे , जिसका जांच एजेंसी में जाना आना लगा रहता है, लिहाजा कभी भी किसी आरोप में ये फसे नहीं,उल्टे उन लोगों ने अंदर ही अंदर इनकी मदद ही की। जिस समय एंटीलिया बम कांड की प्रमुख घटना घटी थी या फिर दिशा सालियान की मौत हुई थी उस समय महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्रीत्व वाली महा विकास अघाड़ी की सरकार थी। वर्तमान समय में जब अदालत के निर्देश पर मुंबई पुलिस से दिशा सालियान का मामला छीनकर सीबीआई को सोपा गया जिसमें परमवीर सिंह नामित आरोपी हैं उस समय महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस की मुख्यमंत्रीत्व वाली एनडीए गठबंधन की सरकार है। लेकिन परमवीर सिंह की सेहत पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है कि महाराष्ट्र में सरकार किसकी है और कौन जांच एजेंसी काम कर रही है। नामित आरोपी होने के बावजूद वह खुल्लम-खुल्ला घूम रहे हैं और और न सिर्फ खुद को बल्कि इस मामले में अपने अन्य सह आरोपियों को भी इस मामले में पाक साफ करार करवा लेने के लिए तिकड़म लगा रहे हैं। आईए जानते हैं इस परम तिकड़मी परमवीर सिंह पर लगे आरोपी और उसके फलाफल के बारे में।
मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के खिलाफ महाराष्ट्र में कुल 5 आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से अधिकांश मामले जबरन वसूली , भ्रष्टाचार, और आपराधिक साजिश से जुड़े थे।
इसके अलावा, एंटीलिया बम कांड और मनसुख हिरेन हत्याकांड मामले में भी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच के दौरान उन पर सवाल उठे थे।
परमबीर सिंह पर दर्ज मुख्य मुकदमे और उनके नतीजों (परिणामों) का पूरा विवरण नीचे दिया गया है:
गोरेगांव जबरन वसूली मामला : होटल व्यवसायी बिमल अग्रवाल की शिकायत पर यह मामला दर्ज हुआ था। आरोप था कि परमबीर सिंह और बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे ने उनके बार और रेस्तरां पर छापेमारी न करने के बदले ₹9 लाख और कीमती स्मार्टफोन की उगाही की थी।
ठाणे कोपरी जबरन वसूली मामला: बिल्डर श्यामसुंदर अग्रवाल और उनके भतीजे शरद अग्रवाल की शिकायत पर दर्ज हुआ था। इसमें आरोप था कि परमबीर सिंह ने मकोका (MCOCA) के झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर ₹15 करोड़ की मांग की थी।
ठाणे नगर जबरन वसूली मामला: व्यापारी केतन तन्ना और सोनू जालान की शिकायत पर दर्ज हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि साल 2018 में जब परमबीर सिंह ठाणे के पुलिस कमिश्नर थे, तब उनसे ₹4 करोड़ से अधिक की वसूली की गई थी।
मरीन ड्राइव मामला: श्यामसुंदर अग्रवाल की एक और शिकायत पर मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था।
एसीपी भीमराव घाडगे की शिकायत: परमबीर सिंह के मातहत काम कर चुके पूर्व एसीपी (तत्कालीन इंस्पेक्टर) भीमराव घाडगे ने आरोप लगाया था कि सिंह ने उन्हें कुछ आरोपियों के खिलाफ चार्ज हटाने और पैसे वसूलने के लिए मजबूर किया था, और मना करने पर उन्हें झूठे मामलों में फंसाया।
इन मुकदमों के फलाफल की बात करें तो शुरुआत में परमबीर सिंह की मुश्किलें काफी बढ़ गई थीं, कोर्ट ने उन्हें ‘भगोड़ा’ तक घोषित कर दिया था। लेकिन बाद में कानूनी और प्रशासनिक मोर्चे पर उन्हें बड़ी राहतें मिलीं।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांच ट्रांसफर: मार्च 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए महाराष्ट्र पुलिस के पास दर्ज सभी 5 एफआईआर (FIR) और विभागीय जांच को सीबीआई (CBI) को सौंप दिया। कोर्ट का मानना था कि राज्य सरकार और परमबीर सिंह के बीच चल रहे विवाद के कारण निष्पक्ष जांच जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी से भी संरक्षण दे दिया था।
CBI से मिली क्लीन चिट: जनवरी 2024 में सीबीआई ने ठाणे कोर्ट में शरद अग्रवाल वाले रंगदारी मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। सीबीआई को परमबीर सिंह के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिले। इसके अलावा, भीमराव घाडगे मामले में भी सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट फाइल की है।
सभी विभागीय आरोप खारिज और निलंबन रद्द: मई 2023 में महाराष्ट्र सरकार ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) के आदेश के बाद परमबीर सिंह के खिलाफ चल रही सभी विभागीय जांच और सारे आरोप वापस ले लिए । उनके निलंबन को रद्द कर दिया गया और उनके निलंबन काल को ‘ऑन ड्यूटी’ माना गया। वे ससम्मान रिटायर घोषित हुए।
एंटीलिया केस में मौजूदा स्थिति: एनआईए (NIA) ने एंटीलिया केस में चार्जशीट में कुछ गंभीर संकेत तो दिए थे (जैसे साइबर एक्सपर्ट को पैसे देने का आरोप), लेकिन उन्हें आरोपी नहीं बनाया था। हाल ही में पूर्व एसीपी भीमराव घाडगे ने एनआईए कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की है कि परमबीर सिंह को भी इस केस में आरोपी बनाया जाए, जिस पर कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
संक्षेप में कहें तो, परमबीर सिंह के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच राज्य पुलिस से छीनकर सीबीआई को दे दी गई थी, जहां कई मामलों में उन्हें क्लीन चिट मिल चुकी है और राज्य सरकार ने भी उनके खिलाफ सभी प्रशासनिक आरोप वापस ले लिए हैं। फिलहाल दिशा सालियान जैसे मामले जिसमें उन्हें अभी क्लीन चिट नहीं मिली है, उसमें क्लीन चिट पाने के लिए वे तिकड़म लगाने में जुटे हुए हैं।

