बीरेंद्र कुमार झा
एक लंबे समय के बाद अनुच्छेद 370 का मुद्दा एक बार फिर गरमाने वाला है।मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में इसे खत्म करने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई होगी।इस दौरान मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच इस बात की जांच कर सकती है कि क्या संसद बगैर लोगों की सहमति के आर्टिकल 370 खत्म कर सकती है।
मुख्य न्यायाधीश के अलावा इस बेंच में जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवाई और जस्टिस सूर्यकांत होंगे गौरतलब है कि 5 जजों की संवैधानिक बेंच मंगलवार को कार्यवाही की शुरुआत करेगी।संभावना है कि इस दौरान याचिका पर सुनवाई की शुरुआत के लिए तारीख भी दी जा सकती है।
केंद्र ने दाखिल किया हलफनामा
केंद्र सरकार की ओर से सोमवार को सिर्फ न्यायालय में हलफनामा दाखिल किया गया,जिसमें कहा गया कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू और कश्मीर में शांति आई है।सरकार ने आतंकवादी घटनाओं में भी कमी आने की बात कही है। केंद्र ने बताया कि 2018 में पथराव की घटनाएं हुई थी जो 2923 में घटकर शून्य हो हो गई है।
केंद्र ने दलील दी है कि अनुच्छेद 370 हटाने का ऐतिहासिक संवैधानिक कदम इस क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति सुरक्षा और स्थिरता लेकर आया है, जो अनुच्छेद 370 के लागू रहने के दौरान नहीं था।
हलफनामे में कहा गया है G- 20 पर्यटन कार्य समूह की मई 2023 में श्रीनगर में हुई बैठक घाटी में पर्यटन का एक ऐतिहासिक अवसर था और देश ने गर्व से दुनिया को अपनाया यह दृढ संकल्प दिखाया है कि अलगाववादी क्षेत्र को एक ऐसे इलाके में बदला जा सकता है जहां अंतरराष्ट्रीय मेहमानों को बुलाया जा सकता है और वैश्विक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।
हलफनामे में यह भी कहा गया है कि बेहतर सुरक्षा परिदृश्य में केंद्र शासित प्रदेशों में 1 जनवरी 2022 से 31 दिसंबर 2022 तक 188 करोड़ पर्यटक आए जो अब तक की सर्वाधिक संख्या हैं।
5 अगस्त 2019 को संसद से पास हुआ था अनुच्छेद 370 को हटाने का विधेयक
पीठ की तरफ से जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई की जानी है।गौरतलब है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 को निरस्त करते हुए पूर्वर्ती राज्य जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा निरस्त कर दिया था और इसे 2 केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख के रूप में विभाजित कर दिया था।
