न्यूज़ डेस्क
आखिर आज दिल्ली मेयर का चुनाव हुआ और आप की शैली ओबेरॉय मेयर चुन ली गई। बीजेपी की मेयर उम्मीदवार रेखा राय थी जिसे हार का सामना करना पड़ा। शैली को के 265 में में से 150 वोट मिले हैं। 34 वोट से रेखा राय की हार हुई है। बीजेपी को बड़ा धक्का लगा है।बता दें कि शैली ओबेरॉय ईस्ट पटेल नगर से वार्ड पार्षद हैं जबकि रेखा गुप्ता शालीमार बाग से पार्षद हैं।
गौरतलब है कि एमसीडी सदन में आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों ने मतदान किया। कांग्रेस पार्षदों ने इस चुनाव का बहिष्कार कर किया। एमसीडी सदन में हंगामे और किसी भी तरह की स्थिति पर नियंत्रण के लिए दिल्ली पुलिस के साथ ही अर्धसैनिक बल की भी तैनाती की गयी थी। सदन के भीतर सिविल डिफेंस वालंटियर्स तैनात थे। आज होने वाले मतदान के लिए दो मतदान बूथ बनाए गए थे ।दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने आप की जीत पर ट्वीट किया, “गुंडे हार गये, जनता जीत गयी। दिल्ली नगर निगम में आम आदमी पार्टी का मेयर बनने पर सभी कार्यकर्ताओं को बहुत बधाई और दिल्ली की जनता का तहे दिल से एक बार फिर से आभार। आप की पहली मेयर शैली ओबेरॉय को भी बहुत बहुत बधाई।”
सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद चुनाव
दिल्ली के उपराज्यपाल वी के सक्सेना की ओर से निगम की बैठक बुलाने की मंजूरी दिए जाने के बाद मेयर, डिप्टी मेयर और स्थायी समिति के छह सदस्यों के लिए चुनाव हुए। सुप्रीम कोर्ट ने 17 फरवरी को महापौर, उप महापौर और नगर निकाय की स्थायी समिति के सदस्यों के चुनाव की तारीख तय करने के लिए दिल्ली एमसीडी की पहली बैठक बुलाने के लिए 24 घंटे के भीतर नोटिस जारी करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी की मेयर पद की उम्मीदवार शैली ओबेरॉय की याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया। कोर्ट ने यह भी कहा कि एल्डरमेन (मनोनीत व्यक्ति) को वोट देने का अधिकार नहीं होगा। हालांकि, चुनाव से एक दिन पहले बीजेपी की ओर से दावा किया गया कि कुछ भी हो सकता है।
तीन बार टल चुका है दिल्ली मेयर चुनाव
गौरतलब है कि एमसीडी की पहली बैठक 6 जनवरी 2023 को बुलाई गई थी। इस बैठक के दौरान भाजपा और आम आदमी पार्टी में तीखी बहस हुई थी। इसके बाद 24 जनवरी को औऱ फिर 6 फरवरी को दूसरी और तीसरी बैठक बुलाई गई थी। तीनों बैठकों में हुए हंगामे की वजह से मेयर और उपमेयर का चुनाव नहीं हो सका था।
मेयर चुनाव के लिए कुल 274 वैध वोट हैं। हालांकि, कांग्रेस के 9 पार्षद मतदान प्रक्रिया में भाग नहीं लिया क्योंकि पार्टी ने महापौर चुनाव का बहिष्कार किया था ।

