बीरेंद्र कुमार झा
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को 15 महीने से अधिक का वक्त हो गया है,लेकिन अभी तक दोनों देशों में से किसी भी देश ने अपनी हार नहीं मानी है। इन सबके बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। वैगनर ग्रुप के चीफ येवगेनी प्रिगोझिन ने राष्ट्रपति पुतिन को सत्ता से उखाड़ फेंकने की धमकी दी है।।इस वैगनर ग्रुप के लड़ाके राजधानी मास्को की तरफ बढ़ भी रहे हैं।हालांकि उन्हें रोकने के लिए रूसी सेना तैनात कर दी गई है। येवगेनी प्रिगोझीन की धमकी के बाद रूसी रक्षा मंत्रालय ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है।
क्या है वैगनर ग्रुप
रूस यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से वैगनर ग्रुप के बारे में बार-बार सुनने को मिलता रहा है। वैगनर ग्रुप किराए पर फाइटर्स देने वाला एक ऐसा रूसी नेटवर्क है जिसका कागजों और दस्तावेजों में कहीं कोई जिक्र नहीं है। इसके कथित समर्थक ग्रुप के साथ अपने किसी तरह के कनेक्शन से इनकार करते हैं। दरअसल आधिकारिक रूप से रूस में प्राइवेट मिलिट्री कंपनियां अवैध हैं। रूस में भाड़े के सैनिक आधिकारिक नहीं होते, इसलिए उनके पास सैनिकों के समान अधिकार या गारंटी नहीं होती है। उन्हें सिर्फ मिशन पूरा करने के बाद ही भुगतान किया जाता है, यानी वैगनर ग्रुप के लड़ाके अपने मिशन को पूरा करने के साथ ही अपना पैसा लेते हैं और छुट्टी पर चले जाते हैं।
पुतिन की निजी सेना
एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2014 में इंटेलिजेंस ऑफिसर दिमित्री उत्किन ने यूक्रेन अलगाववादियों को समर्थन देने के लिए वैगनर ग्रुप की स्थापना की थी। तब से यह ग्रुप अफ्रीका से लेकर मिडिल ईस्ट में,रूस और उसके सहयोगियों के हितों का प्रतिनिधित्व कर चुका है। इस समूह ने सीरिया के गृहयुद्ध में राष्ट्रपति बशर अल असद की ओर से हिस्सा लिया था। वैगनर ग्रुप के लोग हाल के वर्षों में यूक्रेन सीरिया,लीबिया, मध्य अफ्रीकी गणराज्य और माली में सक्रिय रहे हैं। आलोचक इसे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा नियंत्रित एक शैडो फोर्स के रूप में देखते हैं। इसका इस्तेमाल फ्रंटलाइन सेनानियों प्रशिक्षकों और सलाहकारों को प्रदान करके विदेशों में रूसी प्रभाव को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है।
वैगनर चीफ येवगिनी प्रिगोझीन कौन है
येवगेनी प्रिगोझीन का जन्म वर्ष 1961 में लेनिनग्राद (अब सेंट पीट्सबर्ग) में हुआ था।येवगेनी प्रिगोझीन को साल 1981 में मारपीट, डकैती और धोखाधड़ी का दोषी पाए जाने पर 13 साल की सजा सुनाई गई थी। हालांकि सोवियत यूनियन के पतन के बाद यह बेनी को 9 साल की सजा के बाद ही रिहा कर दिया गया था। जेल से बाहर आने के बाद येवगेनी प्रिगोझीन ने हॉट डॉग का स्टॉल लगाया।इसके बाद येवगेनी प्रिगोझीन ने एक रेस्तरां खोला। जल्द ही इस रेस्तरां की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि खुद रूसी राष्ट्रपति पुतिन विदेशी मेहमानों को इस रेस्तरां में खाना खिलाने ले जाने लगे। इस तरह येवगेनी प्रिगोझीन रूसी राष्ट्रपति पुतिन के करीब आया। पुतिन से करीबी का फायदा उठाकर येवगेनी प्रिगोझीन ने कैटरिंग का बिजनेस शुरू कर दिया और वह रूसी सेना और स्कूली बच्चों को खाना खिलाने के सरकारी ठेके लेने लगा। इसके चलते उसकी पहचान पुतिन के रसोइए के रूप में हो गई।कैटरिंग के बिजनेस से उसने खूब पैसा कमाया।
पुतिन के अगले अगले उत्तराधिकारी हैं येवगेनी प्रिगोझीन
येवगेनी प्रिगोझीन ने रूसी सेना के समर्थन से एक प्राइवेट आर्मी बनाई जिसे वैगनर ग्रुप का नाम दिया गया।इस प्राइवेट आर्मी में रिटायर्ड सैन्य अधिकारी और जवानों को शामिल किया गया। आरोप लगे कि इस ग्रुप में अपराधियों को भी शामिल किया जाता था।वैगनर ग्रुप को क्रेमलिन का भी समर्थन मिला।जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो वैगनर ग्रुप के लड़ाकों को ही अग्रिम मोर्चे पर तैनात किया गया था। वैगनर ग्रुप के बढ़ते दबदबे के चलते ही यह येवगेनी प्रिगोझीन का रूस के शीर्ष नेतृत्व में दबदबा बढ़ा और एक समय इसे और पुतिन के अगले उत्तराधिकारी के रूप में भी देखा जाने लगा था।

