पटना: सरकारी सेवकों के खिलाफ होने वाली अनुशासनिक कार्रवाई में निर्धारित नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य है। किसी भी जांच या विभागीय कार्रवाई में व्यक्तिगत सोच, परंपरागत समझ या तथाकथित ‘कॉमन सेंस’ के आधार पर निर्णय नहीं लिए जा सकते। यह बात सामान्य प्रशासन विभाग के महानिदेशक-सह-मुख्य जांच आयुक्त दीपक कुमार सिंह ने मंगलवार को पटना में आयोजित एक उन्मुखीकरण कार्यक्रम के दौरान कही।
रेवेन्यू सर्वे ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (आरएसटीआई) में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य के प्रखंड कृषि पदाधिकारियों को बिहार सरकारी सेवक वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील (CCA) नियमावली, 2005 के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई।
नियमों के दायरे में ही होनी चाहिए हर कार्रवाई
मुख्य जांच आयुक्त ने कहा कि किसी भी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई कानून, अधिसूचनाओं, सरकारी दिशा-निर्देशों और निर्धारित नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच पदाधिकारी और प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी को व्यक्तिगत विवेक के बजाय केवल नियम पुस्तिका और विधिक प्रावधानों के आधार पर कार्य करना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होती है, तो उसे भी यह समझ होना चाहिए कि पूरी प्रक्रिया नियमानुसार चल रही है या नहीं। इसके लिए नियमों की जानकारी होना बेहद आवश्यक है।
ज्ञान ही दिलाता है वास्तविक सम्मान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दीपक कुमार सिंह ने कहा कि किसी व्यक्ति का सम्मान केवल उसके पद या वेतनमान से नहीं होता, बल्कि उसके ज्ञान और कार्यकुशलता से होता है। उन्होंने प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों को सलाह दी कि वे विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई नियमावली और संदर्भ पुस्तकों का गंभीरता से अध्ययन करें।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण सामग्री में संविधान के प्रासंगिक प्रावधानों, सीसीए नियमावली 2005, विभागीय परिपत्रों, अनुशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया और आवश्यक चेकलिस्ट जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हैं।
शिकायत से लेकर आरोप पत्र तक की प्रक्रिया समझाई गई
प्रशिक्षण सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने विभागीय जांच से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। अधिकारियों को बताया गया कि किसी शिकायत या परिवाद के प्राप्त होने के बाद जांच, आरोप पत्र तैयार करने, गवाहों और अभिलेखों के सत्यापन तथा प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी की भूमिका किस प्रकार निर्धारित होती है।
इसके अलावा विभागीय मामलों में सरकारी पक्ष को प्रभावी ढंग से रखने और प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के तरीकों पर भी चर्चा की गई।
वित्तीय लेन-देन और उपहार स्वीकार करने को लेकर भी दी गई सलाह
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को सरकारी सेवकों के वित्तीय व्यवहार से जुड़े नियमों की जानकारी भी दी गई। उन्हें विभिन्न अवसरों पर प्राप्त होने वाले उपहारों, आर्थिक लेन-देन और सेवा आचरण नियमों के पालन को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई।
अधिकारियों के लिए उपयोगी साबित होगा प्रशिक्षण
कार्यक्रम की शुरुआत में संयुक्त सचिव प्रभात कुमार ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि इस प्रकार का प्रशिक्षण न केवल अधिकारियों के पेशेवर विकास में सहायक होगा, बल्कि सेवा के दौरान उनके अधिकारों और दायित्वों की समझ भी बढ़ाएगा। इससे वे भविष्य में किसी भी प्रशासनिक या अनुशासनिक प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।
कार्यक्रम में विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया तथा अधिकारियों को नियम आधारित प्रशासन की अहमियत से अवगत कराया।

