पटना: बिहार में मछली पालन और जल कृषि के क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में राज्य सरकार तेजी से काम कर रही है। सरकार का मानना है कि मत्स्य क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और इसके विस्तार से न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों से होने वाले पलायन को रोकने में भी मदद मिलेगी।
यह बातें डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंद किशोर राम ने मंगलवार को पटना के मीठापुर स्थित नवनिर्मित मत्स्य विकास भवन में आयोजित एक विशेष कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कहीं। कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य में मछली उत्पादन को बढ़ावा देना और मत्स्य पालकों को नई तकनीकों एवं योजनाओं की जानकारी देना था।
मछली उत्पादन में बिहार ने बनाया नया रिकॉर्ड
मंत्री ने बताया कि राज्य में मछली उत्पादन लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में जहां कुल उत्पादन 9.69 लाख मीट्रिक टन था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 10.28 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया।
उन्होंने कहा कि यह वृद्धि सरकार की योजनाओं, आधुनिक तकनीकों और मत्स्य पालकों की मेहनत का परिणाम है। आने वाले वर्षों में उत्पादन और बढ़ाने के लिए विभाग कई नई पहल कर रहा है।
जल क्षेत्र विस्तार से बढ़ी उत्पादन क्षमता
सरकार द्वारा मत्स्य क्षेत्र के विकास के लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का निर्माण किया गया है। राज्य में हजारों हेक्टेयर नए जल क्षेत्र विकसित किए गए हैं और चौर भूमि में आधुनिक तालाबों का निर्माण कराया गया है।
इसके साथ ही हजारों ट्यूबवेल लगाए गए हैं ताकि मत्स्य पालन को निरंतर पानी की उपलब्धता मिल सके। विभाग का दावा है कि इन प्रयासों से उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
मत्स्य बीज और फीड उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर बिहार
राज्य में मत्स्य बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बड़ी संख्या में हैचरियों की स्थापना की गई है। वर्तमान में कार्यरत हैचरियां राज्य की अधिकांश मत्स्य बीज जरूरतों को पूरा कर रही हैं।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य में 2,753.45 मिलियन मत्स्य बीज का उत्पादन दर्ज किया गया। वहीं, प्रदेश में संचालित फिश फीड मिलों के माध्यम से हजारों टन मछली आहार का उत्पादन भी स्थानीय स्तर पर हो रहा है, जिससे मत्स्य पालकों को बड़ी राहत मिली है।
आधुनिक बाजार और विपणन व्यवस्था पर जोर
मछली उत्पादन के साथ-साथ विपणन व्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी सरकार का विशेष फोकस है। मत्स्य बाजारों में स्वच्छता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए हजारों विपणन किट और विशेष वाहनों का वितरण किया जा चुका है।
इसके अलावा मुख्यमंत्री मत्स्य विपणन योजना के तहत आधुनिक मत्स्य बाजारों का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे उत्पादकों को अपनी उपज बेचने के बेहतर अवसर मिल सकें।
रियायती बिजली और नई योजनाओं पर काम
मंत्री ने संकेत दिया कि कृषि क्षेत्र की तरह मछली पालकों को भी रियायती दरों पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इससे उत्पादन लागत कम होगी और मत्स्य पालन को अधिक लाभकारी बनाया जा सकेगा।
निर्यात बढ़ाने पर सरकार का फोकस
कार्यक्रम में विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि मछली पालन को केवल परंपरागत व्यवसाय नहीं, बल्कि एक बड़े उद्योग के रूप में विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बिहार में मछली और मत्स्य उत्पादों के निर्यात की बड़ी संभावनाएं हैं।
उन्होंने बताया कि प्रोसेसिंग प्लांट, फिश फीड मिल, आरएएस और बायोफ्लॉक जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
एनएफडीबी कार्यालय से मिलेगा बड़ा लाभ
हाल ही में पटना के मत्स्य विकास भवन में राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) के क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन किया गया है। विभाग का मानना है कि इससे राज्य में मत्स्य उत्पादन, उत्पादकता और तकनीकी सहयोग को नई गति मिलेगी।

