Bihar News: बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी ‘सहयोग शिविर’ पहल जनता की समस्याओं के समाधान में तेजी से प्रभावी साबित होती दिख रही है। राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आयोजित किए जा रहे इन शिविरों में अब तक 3.09 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 2.69 लाख से ज्यादा मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार शिकायतों के समाधान की दर 91 प्रतिशत से अधिक पहुंच गई है, जिसे प्रशासनिक स्तर पर बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
3 लाख से अधिक आवेदन, 2.69 लाख मामलों का समाधान
16 जून तक सहयोग शिविरों में कुल 3,09,919 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 2,69,240 मामलों का निपटारा कर दिया गया है। राज्य सरकार का दावा है कि विभिन्न विभागों की सक्रियता, लगातार निगरानी और तय समयसीमा के भीतर कार्रवाई के कारण समाधान की दर लगातार बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री की पहल से शुरू हुआ अभियान
नए मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभालने के बाद सम्राट चौधरी ने जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए सहयोग शिविर की शुरुआत की। यह अभियान ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में चलाया जा रहा है। इसकी शुरुआत 19 मई को ग्राम पंचायत स्तर से हुई थी और अब इसे व्यापक रूप से लागू किया जा चुका है।
सरकार ने लोगों को आवेदन करने की सुविधा पहले से उपलब्ध कराई है, ताकि शिविर में पहुंचने से पहले भी उनकी शिकायतें दर्ज हो सकें। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 1100 भी जारी किया गया है।
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन
जनता अपनी समस्याओं से जुड़े आवेदन जिला स्तर पर निर्धारित कार्यालयों में जमा कर सकती है। इसके अलावा सहयोग पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी दी गई है। इससे लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हुई है और शिकायतों की ट्रैकिंग भी आसान हुई है।
रियल टाइम मॉनिटरिंग से हो रही निगरानी
सरकार ने शिकायतों के प्रभावी निस्तारण के लिए रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम को सहयोग पोर्टल से जोड़ा है। इसके माध्यम से प्राप्त आवेदनों का वर्गीकरण, निस्तारण की स्थिति, लंबित मामलों और देरी के कारणों का लगातार विश्लेषण किया जा रहा है।
सभी विभागों में विशेष सहयोग सेल गठित किए गए हैं, जहां नोडल अधिकारी शिकायतों की निगरानी कर रहे हैं और उच्च अधिकारियों को नियमित रिपोर्ट भेज रहे हैं।
30 दिन में समाधान नहीं तो होगी कार्रवाई
सरकार ने शिकायतों के निपटारे के लिए अधिकतम 30 दिनों की समयसीमा तय की है। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की ओर से लापरवाही पाई जाती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। निर्धारित व्यवस्था के तहत 10 दिन पर पहला नोटिस,20 दिन पर दूसरा नोटिस, 25 दिन पर तीसरा नोटिस जारी किया जाएगा।
यदि 30 दिनों के भीतर बिना किसी ठोस कारण के शिकायत का समाधान नहीं किया जाता है तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ स्वतः निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है।
जवाबदेही बढ़ाने पर सरकार का जोर
सरकार का मानना है कि सहयोग शिविर केवल शिकायतें लेने का मंच नहीं, बल्कि जवाबदेह प्रशासन की दिशा में एक बड़ा कदम है। यही कारण है कि शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा विभागीय अधिकारियों के साथ-साथ प्रभारी मंत्री और प्रभारी सचिव स्तर पर भी की जा रही है।

