प्रधानमंत्री आवास पर राहुल गांधी के प्रदर्शन से सुलगते सवाल,दोषी सरकार या विपक्ष?

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कल यानि 21 जुलाई को नीट यूजी परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक होने के मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा को लेकर कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया। राहुल गांधी के नेतृत्व में यह प्रदर्शन प्रधानमंत्री आवास के बिल्कुल निकट हो रहा था,जिससे यह मामला काफी संवेदनशील और विस्फोटक हो गया था। राहुल गांधी का यह प्रदर्शन इतने गोपनीय और दमदार तरीके से आयोजित किया गया कि इससे नरेंद्र मोदी सरकार के हाथ पांव फूलने लगे। तब सरकार ने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को आनन – फानन में राहुल गांधी से बातचीत करने के लिए भेज दिया। इन दोनों के बीच क्या बातचीत हुई इसे तो ये दोनों ही जानते हैं, लेकिन जितेंद्र सिंह ने इस बातचीत को लेकर यह खुलासा किया कि राहुल गांधी ने पहले सरकार से नीट यूजीसी पेपर लीक मामले को सदन में उठाने की मांग रखी,जिसे सरकार ने मान लिया। लेकिन इसके बाद राहुल गांधी अपने वादे से मुकर गए और यह मांग रख दी कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का सरकार इस्तीफा नहीं ले लेती है तब तक ये अपने प्रदर्शन को नहीं रोकेंगे। इसके बाद सरकार एक्शन में आ गई और पुलिस के द्वारा राहुल गांधी प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस के कई बड़े नेताओं को कड़े मशक्कत के बाद वहां से उठाकर विभिन्न जगहों पर ले गई।राहुल गांधी को छत्रसाल स्टेडियम और प्रियंका गांधी को मंदिर मार्ग थाना मैं ले जाकर रखा गया और बाद में छोड़ दिया गया।

इसके बाद यह मामला तो तत्काल थम गया, लेकिन इसने अपने पीछे कई सुलगते सवाल छोड़ दिए। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल तो हमारे खुफिया तंत्र पर उठ खड़ा हुआ कि इतना बड़ा प्रदर्शन प्रधानमंत्री आवास के बाहर हो गया और खुफिया तंत्र इसे लेकर पूर्व में कोई सूचना नहीं जुटा पाई, और वह भी तब जबकि इससे पूर्व बड़ी संख्या में नजन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की आवास पर उनके जन्मदिन के कार्यक्रम को लेकर आ जा रहे थे। जिस प्रकार से राहुल गांधी सोशल मीडिया पर तमाम लोगों को प्रधानमंत्री आवास के बाहर हो रहे अपने प्रदर्शन में आमंत्रित कर रहे थे ,उससे यह डर लगने लगा था कि कहीं ये प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री आवास में घुसकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कोई अनहोनी ना कर बैठे, जिससे भारत की स्थिति बांग्लादेश या नेपाल वाली हो जाए।

प्रधानमंत्री आवास के पास राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस कि इस जोरदार प्रदर्शन के साथ अब राहुल गांधी को लेकर यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि क्या राहुल गांधी देश के अंदर और विदेशों में रह रहे भारत विरोधी शक्तियां जो भारत को टुकड़े-टुकड़े करने में विश्वास रखती है,उनके हाथों की कठपुतली तो नहीं बन गए हैं, और अपने कृत्यों से उनके मंसूबों को अंजाम देने में जुटे हुए है ?

इस सवाल के जवाब के लिए राहुल गांधी की क्रियाकलापों पर एक नजर डालना जरूरी है। अपने पूर्व के कई विदेश दौरों पर राहुल गांधी भारत में डेमोक्रेसी अर्थात लोकतंत्र नहीं रहने की बात कह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने भारत में भी अपने कई कार्यक्रमों के दौरान यह बयान दिए कि नरेंद्र मोदी 6 महीने के बाद प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि जिस प्रकार से बांग्लादेश और नेपाल में जेन जी ने सरकार बदल दी,उस तरह से भारत में भी जेन जी नरेंद्र मोदी की सरकार को बदल देगी। ऐसे में भले ही राहुल गांधी के नेतृत्व में 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर किए जा रहे प्रदर्शन में नीट यूजी मामले से जुड़े छात्र या उनके अभिभावक नहीं आए थे,लेकिन राहुल गांधी जिस प्रकार से अपनी मनमर्जी करने की बात कह रहे थे और सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लोगों को प्रधानमंत्री आवास के ठीक बाहर हो रहे अपने प्रदर्शन में शामिल होने के लिए गुहार कर रहे थे ,वह बहुत कुछ बांग्लादेश और नेपाल में जबरन सत्ता को उखाड़ फेंकने की कार्रवाई से मिलता जुलता था।

राहुल गांधी को भारत में z श्रेणी की और एसपीजी सुरक्षा प्राप्त। इसके तहत विदेश जाने के दौरान उन्हें इन सुरक्षा एजेंसी को जानकारी देना जरूरी होता है। लेकिन राहुल गांधी अपने विदेश यात्रा के दौरान ऐसा नहीं करते है। वे विदेश में कहां है,क्या कर रहे हैं, किन से मुलाकात कर रहे हैं,इस बात की जानकारी वे किसी को भी नहीं देते हैं। 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए जोरदार प्रदर्शन से पूर्व भी राहुल गांधी 20 – 22 दिनों के लिए बिना किसी को कुछ बताए विदेश गए हुए थे। वहां वे किसी से मिल रहे थे,किस योजना पर काम कर रहे थे यह किसी को भी पता नहीं था। इस बार तो उन्होंने विदेश में भारत के लोकतंत्र को लेकर भी कुछ नहीं कहा था। भारत आकर भी वे मौन साधे हुए थे, तब भले ही भारत के खुफिया तंत्र को उन पर किसी प्रकार का कोई संदेह नहीं हुआ हो लेकिन इस बार राहुल गांधी कोई बड़ा खेल कर सकते हैं,इस बात की संभावना तो आम लोगों को भी लगने लगी थी और 21 जुलाई को उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन कर यह दिखा दिया कि उनका यह विदेश दौरा अकारण नहीं था।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत भारत के सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान की गई है।यह अधिकार प्रत्येक नागरिक को अपनी राय, विचार, और विश्वास को स्वतंत्र रूप से मौखिक, लिखित, या किसी अन्य माध्यम से व्यक्त करने की अनुमति देता है। यह अधिकार भारतीय संविधान के भाग-3 (मौलिक अधिकार) का एक प्रमुख हिस्सा है। राहुल गांधी भारत का एक नागरिक हैं, लोकसभा में नेता विपक्ष हैं और देश के एक बड़े राजनीतिक दल कांग्रेस का बड़ा नेता हैं। इस लिहाज से उन्हें प्रदर्शन करने की पूरी छूट मिली हुई है। लेकिन इसके साथ ही भारत के संविधान में यह भी लिखा हुआ है कि कुछ मामले में वह इस छूट का लाभ नहीं उठा सकते हैं।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(2) के अंतर्गत इस पर राज्य द्वारा कुछ उचित प्रतिबंध (जैसे- भारत की संप्रभुता, सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, और न्यायालय की अवमानना के मामलों में) लगाए जा सकते हैं। राहुल गांधी और अन्य प्रदर्शनकारी भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1)(a) के अंतर्गत उन्हीं मामलों और जगहों पर प्रदर्शन कर सकते थे, जहां भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 (2) उन्हें ऐसा करने से प्रतिबंधित नहीं करता हो। लेकिन राहुल गांधी ने जानबूझकर एक षड्यंत्र की तहत गुप्त तरीके से अचानक प्रधानमंत्री आवास के पास इतना जोरदार प्रदर्शन कर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (2) का उल्लंघन किया तो क्या उन पर इसके लिए कोई बड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए?

इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार भी कम जिम्मेदार नहीं है। विभिन्न राज्यों में भारतीय जनता पार्टी के चुनाव जीतने और सरकार बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह कोई अलग नहीं लगा है कि वह जो कुछ भी करते हैं सही ही करते हैं। इसके तहत अगर उनके अपने पार्टी की क्रियाकलापों को देखें तो वह जिस राज्य में जिसे चाहते हैं उसे मुख्यमंत्री बना देते हैं,जिसे चाहते हैं उसे अपनी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना देते हैं और इसके लिए कोई तय शुदा प्रक्रिया नहीं होती है, सिर्फ इन दोनों की मर्जी होती है। इससे पार्टी के बड़े नेता भले ही वर्तमान स्थिति को देखते हुए चुप रह जाना बेहतर समझते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर आक्रोश तो उनमें भी होता है।

विभिन्न राज्यों में चुनाव जीतकर भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने में मिली सफलता से शायद पीएम मोदी को यह लगने लगा है की अब वह देश पर मनमर्जी से शासन करने की स्थिति में आ गए हैं।यही कारण है कि जो कोई भी उनकी नीतियों का विरोध करता है, उन्हें वह और उनकी पार्टी भारतीय जनता पार्टी देशद्रोही कहने लगती है। उदाहरण के तौर पर नई-नई मोटर वाहन अधिनियम में परिवर्तन कर किसी वहां से दुर्घटना होने पर इसमें चालक के लिए 10 वर्ष कारावार की सजा और जुर्माना तय किया है। जुर्माना की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की गई है, लेकिन आमतौर पर 7 लाख से ज्यादा ही जुर्माना किया जाने का प्रावधान है। अब एक गरीब चालक जो दूसरों की गाड़ी चलाकर अपने परिवार का खाना घर जा निकलता है वह इतनी बड़ी राशि जुर्माना कैसे दे सकता है और फिर वह अगर 10 साल तक जेल में रह जाता है तो उसके परिवार की स्थिति क्या होगी?

बात पीएम मोदी की सरकार की शिक्षा के मामले की विफलता की कर लेते हैं, जिसके कारण राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस को प्रधानमंत्री आवास के बाहर इतना बड़ा प्रदर्शन करने का मौका हाथ लग गया। वैसे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के द्वारा जो नई शिक्षा नीति 2020 लाई गई है, उसमें ही अनेक विसंगतियां हैं लेकिन अहंकार बस पीएम मोदी की सरकार इन विसंगतियां को दूर करने के लिए कुछ भी नहीं कर रही है। नीट यूजी परीक्षा में जब प्रश्न पत्र लीक होने का मामला आया तो पहले तो सरकार ने इसे मानने से ही इनकार कर दिया और जब जन दबाव में इस मामले के होने को स्वीकार किया, तब भी इस पर कोई बड़ी कार्रवाई करती हुई नहीं दिखी। जब छात्र और विपक्षी राजनीतिक दल के नेता इसके लिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जिम्मेदार मानते हुए उसकी इस्तीफा की मांग कर रहे थे, तब पीएम मोदी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर कार्यवाही करना तो दूर उन्हें इस बात के लिए डांट- फटकार भी नहीं लगाई।

नीट यूजी प्रश्न पत्र लीक मामले ने जब इतना तूल पकड़ लिया, तब जाकर कहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मामले की सुधि ली। एनडीए के सम्मेलन में इस मामले पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आगे से परीक्षा की फुल प्रूफ व्यवस्था की जाएगी और वर्तमान नीट यूजी परीक्षा के प्रश्न पत्र के लीक होने के मामले के दोषियों को बड़ा वकील रखकर कड़ा से कड़ा दंड दिलाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बात को भी ज्यादातर लोग लीपा पोती वाला मामला मान रहे हैं,क्योंकि उन्होंने इस मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर कोई भी बात नहीं की। दूसरी तरफ यहां भी दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने वाली बात प्रधानमंत्री की अहंकार को ही दर्शाता है,क्योंकि अपराध शास्त्र के अनुसार बड़ी से बड़ी सजा भी अपराध पर रोक नहीं लगा सकती।उल्टे अपराधी ऐसे मामलों में भ्रष्टाचार के बल पर कानून के रख वालों को ही मिलाकर अपराध करता है नीट यूजी परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक का मामला भी इस बात की पुष्टि करता है क्योंकि इस प्रश्न पत्र के लीक होने में वे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने प्रश्न पत्र तैयार किए थे ।साथ ही इस मामले में संगठित अपराध के लिए 5 साल से लेकर 10 साल तक कैद और एक करोड रुपए का भारी भरकम अर्थ दंड वाला कानून भी बन चुका था। अपराध सजगता और दोषियों को छोटी ही सही लेकिन दंड मिलने से रुकता है।

21 जुलाई को राहुल गांधी के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन ने एक बात तो सिद्ध कर दी कि इस समय चाहे सत्ताधारी दल के मंत्री हो चाहे विपक्षी राजनीतिक दल के नेता, हर कोई अपने फायदे के लिए देश हित तक को बलिदान कर देता है, लेकिन भारतीय नागरिक सजग है हैऔर वह इन में से किसी भी नेता के बहकावे में आने वाले नहीं है और न हीं भारत बांग्लादेश या नेपाल है, बल्कि यह एक मजबूत लोकतंत्र है।

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