न्यूज डेस्क: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गंगासागर तीर्थ यात्रियों को सरकार की तरफ से दी जाने वाली सुविधाओं का जायजा लेने के लिए बाबू घाट के पास बने सेवा शिविर पहुंची। इस अवसर पर उन्होंने सेवा शिविरों का उद्घाटन किया तथा कहा कि उनकी सरकार श्रद्धालुओं की सुविधाओं का पूरा ख्याल रख रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मकर संक्रांति पर सागर द्वीप में पुण्य स्नान के लिए देशभर से तीर्थयात्री पहुंचते हैं। हमारी सरकार श्रद्धालुओं को हर तरह की सुविधा देने का प्रयास कर रही है। 7 जनवरी से लेकर 17 जनवरी तक गंगासागर एक नगरी के रूप में परिवर्तित हो जाता है।
मेले में बनाए हैं 10 हजार अस्थयी टेंट
तीर्थ यात्रियों की सुविधा के लिए सागर्द्वीप में राज्य सरकार ने 10000 अस्थाई टेंट बनवाए हैं कपिल मुनि मंदिर को पहले से बेहतर बनाने के साथ पूरे सागर क्षेत्र को सजाने का काम पूरा हो गया है सड़कें पाक और सागर के किनारे को सजाया गया है मंदिर क्षेत्र और आसपास के इलाकों में अच्छी रोशनी की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री ने मेले की रूपरेखा बताया
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा गंगासागर मेले के स्वरूप में पहले की अपेक्षा काफी बदलाव आया है। उन्होंने कहा की बाबू घाट में वाराणसी शैली में गंगा आरती होगी। बंगाल को मनीषियों की भूमि बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां स्वामी विवेकानंद ,काजी नजरुल, कविगुरु रवींद्रनाथ ठाकुर, विद्यासाग, रामकृष्ण परमहंस और मां शारदा ने जन्म लिया है। इस कारण हम सभी बंगालवासी मानव धर्म को सर्वोपरि मानते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबू घाट में गंगा आरती को लेकर तैयारियां शुरू हो गई है। सभी विभागों के समन्वय से गंगा आरती संपन्न होगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि आरती के लिए बाबू घाट पर अस्थायी मंदिर और चबूतरा बनाया जाएगा। सुबह में आरती होगी ,जिसके बाद उसे हटा लिया जाएगा ताकि घाट पर स्नान करने वाले लोगों को कोई परेशानी ना हो।
मुख्यमंत्री ने केंद्र की बीजेपी सरकार पर बंगाल से भेदभाव करने का लगाया आरोप
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जमकर राजनीति करने से भी नहीं चुकीं। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में होने वाले कुंभ मेले, केंद्र सरकार के खर्च पर होते हैं। लेकिन इस ऐतिहासिक और पौराणिक गंगासागर मेले का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करती है। आज पहले की अपेक्षा काफी बदलाव आ गया है। मेले का खर्च काफी बढ़ गया है, लेकिन इसके बावजूद केंद्र सरकार बंगाल के लोगों के साथ भेदभाव करने के कारण हमारी सरकार को गंगासागर मेले के लिए फंड नहीं देती है।

