अखिलेश अखिल
लोजपा अध्यक्ष और राम विलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान को क्या इस बार मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी ? क्या बदलती राजनीति को देखकर पीएम मोदी और गृहमंत्री शाह ने अब चिराग को अपने साथ रखने का मन बना लिया है और क्या नीतीश कुमार के बिहार एनडीए से हटने के बाद बीजेपी को लगने लगा है कि चिराग को साथ रखकर कुछ दलित वोटों का सहारा मिल सकता है ? ऐसे बहुत से सवाल है जो इन दिनों पटना से दिल्ली तक की राजनीतिक गलियारों में उठ रहे हैं और उस पर चर्चा भी चल रही है।
इतना तो साफ़ है कि चिराग पासवान लम्बे समय से राजनीतिक संघर्ष कर रहे हैं। बिहार चुनाव के दौरान ही उनके पिता का निधन हो गया लेकिन फिर भी उन्होंने मजबूती से चुनाव लड़ा। यह बात और है कि बीते विधान सभा चुनाव में चिराग को कोई लाभ नहीं हुआ लेकिन चिराग के सहारे बीजेपी ने नीतीश की राजनीति को कमजोर किया और मात्र 45 सीटों पर जदयू को समेत दिया। बीजेपी जो कभी जदयू के पीछे रहती थी ,अब जदयू से आगे हो गई।
नीतीश कुमार के नेतृत्व में बीजेपी ने बिहार में फिर से सरकार तो बनायी लेकिन जब जदयू को यह पता चल गया कि बीजेपी ने चिराग के जरिये जदयू की लुटिया डुबाने का खेल किया है तो वे सतर्क हो गए और सबसे पहले चिराग को एनडीए से बहार करवाया। बीजेपी को ऐसा करना भी पड़ा। लेकिन चिराग मोदी के गुण गाते रहे और उनके हनुमान बने रहने की दुहाई भी देते रहे।
बाद में चिराग की पार्टी में ही विद्रोह हुआ और चिराग के 6 सांसदों में से पांच सांसदों का एक गुट चिराग के चाचा पशुपरति पारस के साथ जाकर पार्टी को अलग कर लिया। बाद में बीजेपी ने पशुपति पारस को मंत्रिमंडल में शामिल किया और चिराग अकेले रह गए। बावजूद इसके बीजेपी और मोदी के प्रति चिराग की आस्था बनी रही।
अभी हाल में ही गृहमंत्री अमित शाह ने चिराग को जेड श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की है। कहा गया कि चिराग को जान का खतरा है। जाहिर है कि चिराग के प्रति अब मोदी सरकार का प्रेम जाग रहा है। और यह सब ऐसे ही नहीं है। नीतीश कुमार के चले जाने के बाद बिहार बीजेपी को साथी की जरुरत है ताकि लोकसभा चुनाव में महागठबंधन को टक्कर दे सके। इसके लिए चिराग का दलित वोट बीजेपी के लिए लाभकारी दिख रहा है। चिराग के पास अभी भी दलितों का वोट है और करीब सात फीसदी वोट आज भी चिराग पाने में सफल दीखते हैं। बिहार के युवाओं में चिराग की गहरी पैठ है और सभी जातियों में चिराग स्वीकार्य भी। चिराग अपने पिता की राह पर चल रहे हैं। उनके पिता के साथ सभी जाति ,धर्मो के लोग शामिल रहे हैं। चिराग उसी राजनीति को आगे बढ़ा रहे हैं।
अब खबर है कि मोदी की संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल में चिराग की इंट्री हो सकती है। ऐसा हुआ तो नीतीश की परेशानी और भी बढ़ेगी। खबर ये है कि चिराग के चाचा पशुपति पारस की विदाई होगी और चिराग की ताजपोशी। अब देखना ये है कि चिराग के जरिय बीजेपी बिहार की राजनीति को कितना साधते है।

