- बीरेंद्र कुमार झा
नागालैंड की राजनीति में बड़ी उठापटक हुई है। इस राज्य में जेडीयू के एकमात्र विधायक ने भी बीजेपी के गठबंधन वाली सरकार को बिना शर्त समर्थन दे दिया है। बड़ी बात यह है कि एक तरफ नीतीश कुमार देश में विपक्ष को बीजेपी के खिलाफ एक कर रहे हैं,वहीं दूसरी तरफ उनके विधायक एक ऐसे गठबंधन की सरकार को समर्थन दे रहे हैं, जिसमें बीजेपी, एक बड़ा घटक है। ऐसे में बिहार की राजनीति में फिर से उठा पटक होने के कयास जोरों से लगाए जाने लगे हैं।
राष्ट्रीय पार्टी बनने के सपने को लगा बड़ा धक्का
जेडीयू काफी समय से राष्ट्रीय पार्टी बनने के अपने दावों को मजबूत करने में लगी हुई है। हालांकि नागालैंड में उसके पार्टी के एकमात्र विधायक के द्वारा दिए गए इस झटके से उनका यह सपना टूट गया है। गौरतलब है कि जेडीयू ने इस चुनाव में कुल मतदान का 6% वोट पाने का लक्ष्य रखा था। इससे उसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त हो जाता। लेकिन पार्टी इस तरफ से भी मुंह की खा चुकी है। जेडीयू ने तसेमिनयू विधानसभा क्षेत्र से जवेंगा सेब को टिकट दिया था। उन्होंने वहां अच्छी जीत भी हासिल की ,लेकिन अब उनके द्वारा बीजेपी गठबंधन की सरकार को समर्थन दे दिए जाने से जेडीयू के लिए मुश्किल बढ़ गई है।
पहले चिराग ने दिया था झटका
नागालैंड में विधान चुनाव से पहले चिराग पासवान ने जेडीयू को बड़ा झटका दिया था।उन्होंने जेडीयू के कुछ उम्मीदवार और बड़ी संख्या में नेताओं को अपने पार्टी में मिला लिया था। चुनाव में भी जेडीयू से बेहतर प्रदर्शन चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी, रामविलास पार्टी का रहा।वहां इस पार्टी ने मजबूती से 2 सीटों पर जीत दर्ज की और 8% से ज्यादा वोट भी पाया।
कहीं नीतीश कुमार बिहार में एक बार फिर से पलटी न मार दें
एक तरफ नीतीश कुमार 2024 ईसवी में होने वाले लोक सभा चुनाव को लेकर विपक्ष को एक करने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नागालैंड में उनकी पार्टी के विधायक बिना शर्त बीजेपी गठबंधन की सरकार को समर्थन दे रहे हैं।ऐसे में एक तरफ नागालैंड में जेडीयू विधायक द्वारा उठाया गया यह कदम उनका अपनी पार्टी से बगावत भी ही सकता है,और नहीं तो फिर यह सब नीतीश कुमार की सोची समझी चाल है। राजनीति में माहिर नीतीश कुमार को जब विपक्षी एकता को लेकर चलाए गए अपने अभियान के दौरान ऐसा लगा हो कि जिस प्रकार से केजरीवाल, ममता और चंद्रशेखर के बाद अब स्टालिन भी 2024 ईसवी में होने वाले प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के दावेदार हो गए हैं, उसमें इन्हें कोई इस पद के लिए नहीं पूछेगा।तब इन्होंने एक नई योजना बनाई होगी कि प्रधान मंत्री पद के उम्मीदवार बनने के झंझट ,जिसमें सफलता संदिग्ध है से बेहतर है कि कम से कम बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी को ही 2025 के चुनाव तक के लिए तो सुरक्षित कर लिया जाए। चूंकि आरजेडी में तेजस्वी समर्थक बार बार इन्हें केंद्र की राजनीति में जाकर, बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी तेजस्वी यादव को सौंपने के लिए दबाव बना रहे हैं।ऐसे में अगर ये एक बार फिर से पलटी मारकर बीजेपी से हाथ मिला लें, तो अगले विधान सभा चुनाव तक तो बिहार के मुख्यमंत्री का लुत्फ उठाया ही जा सकता है।और बस ये अपनी नई योजना की अमली जामा पहनाने में जुट गए।इस महीने के शुरुआत से ही इनके फिर से पलटी मारकर बीजेपी खेमे में जाने का कुछ कुछ संकेत भी मिलने लगा है। इनके जन्मदिन के अवसर पर बीजेपी के अमित शाह और राजनाथ जैसे बड़े नेताओं का सीधे फोन से उनसे बात करना और नितीश कुमार द्वारा तुरत धन्यवाद देने जैसी घटना के अलावा बीजेपी गठबंधन के समय नितीश कुमार का डिप्टी रहे ताराकिशोर प्रसाद के पिता की मृत्यु में कटिहार जाकर उनसे मिलने का वाकिया भी नीतीश कुमार के नए चाल का ही इशारा कर रहा है।अब हकीकत क्या है ,यह तो नीतीश कुमार ही जाने।
