31 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में ‘इण्डिया’ गठबंधन के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ बैठक का आयोजन किया।
मल्लिकार्जुन खड़गे के दिल्ली स्थित आवास पर आयोजित हुई इस ‘मॉक पार्लियामेंट’ (प्रतीकात्मक संसद) में विपक्ष के करीब 21 राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए। इस बैठक की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की।
इस बैठक में हुईं प्रमुख बातें और आरोप इस प्रकार हैं:
चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ छह प्रमुख आरोप पत्र (प्रस्ताव) पेश किए। विपक्ष ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने वोट चोरी को बढ़ावा दिया, संसदीय निगरानी के बिना फॉर्म-6 में बदलाव किए और देश के करीब 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से डिलीट कर दिए।
राहुल गांधी का तीखा बयान: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मॉक संसद के समापन भाषण में कहा कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने के कारण ये चुनाव ‘अवैध’ थे। उन्होंने देश के अधिकारियों और संस्थाओं को चेतावनी देते हुए कहा कि “देश में हालात बदल रहे हैं” और मुख्य चुनाव आयुक्त को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
अधिकारियों को कड़ी चेतावनी: राहुल गांधी ने कहा कि आज, कल या आने वाले समय में जनता की आवाज को दबाने वाला कोई भी व्यक्ति बच नहीं पाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोगों को विपक्ष के प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए दिल्ली आने से रोकने की कोशिश कर रही है।
विपक्षी एकजुटता का प्रदर्शन: इस बैठक में समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव और झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी सहित कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी हिस्सा लिया और 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली बड़ी महारैली से पहले एकजुटता दिखाई।
बीजेपी की प्रतिक्रिया:दूसरी तरफ, सत्तारूढ़ बीजेपी ने विपक्ष के इस कदम को ‘संसद और संविधान का अपमान’ बताया। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा और सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे संसद की एक झूठी छवि पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं और कांग्रेस को उन्हें ‘जीवनभर के लिए मॉक प्रधानमंत्री’ बना देना चाहिए।

