बिहार में जारी सियासी उथल-पुथल को लेकर आज शनिवार का दिन काफी खास माना जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक बार फिर से बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए में शामिल होने की चर्चा के बीच जनता दल यूनाइटेड ने रविवार को मुख्यमंत्री आवास पर अपने सभी विधायकों की बैठक बुलाई है तो वहीं वहीं राष्ट्रीय जनता दल और भारतीय जनता पार्टी भी इस समय खेमेबंदी में जुटी हुई है। आरजेडी ने शनिवार दोपहर 1:00 बजे अपने विधायक दल की बैठक बुलाई है तो वहीं बीजेपी शनिवार शाम 4:00 बजे पार्टी विधायकों के साथ बैठक करने वाली है।
कांग्रेस के 13 विधायकों का मोबाइल फोन नॉट रीचेबल
इन तमाम राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच सबसे बड़ी खबर कांग्रेस खेमे से आ रही है।सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कांग्रेस के 13 विधायकों का मोबाइल फोन नॉट रीचेबल हो गया है।माना जा रहा है कि कांग्रेस के कई विधायक बीजेपी और जेडीयू के संपर्क में है।हालांकि कांग्रेस ने विधायकों की टूट की खबर को बेबुनीयाद बताया है ।कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक बिहार कांग्रेस के प्रभारी मोहन प्रकाश ने पार्टी के 14 विधायकों से अब तक बात की है और कोई विधायक पार्टी छोड़कर नहीं जा रहा है। कांग्रेस के सभी विधायकों की बैठक पूर्णिया में होनी है। जबकि सूत्रों से ऐसी जानकारी मिल रही है कि बिहार में बदलते राजनीतिक हालात के मद्देनजर पूर्णिया में कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को रद्द भी किया जा सकता है।वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस नीतीश कुमार को मनाने के लिए अब तूरूप के इक्के के तौर पर सोनिया गांधी का इस्तेमाल कर सकती हैं।खबर है कि नीतीश कुमार से सोनिया गांधी फोन पर बात करने वाली है।
जेडीयू बीजेपी और हम मिलकर बना सकती है सरकार
गौरतलब है कि जदयू के पास 45 विधायक है, बीजेपी के पास 76 विधायक है और जीतन राम मांझी की हम के पास चार विधायक है। ।ऐसे में इन तीन दलों के पास कुल मिलाकर 125 विधायक हैं जो सरकार बनाने के लिए जरूरी जादूई आंकड़े 122 से तीन ही अधिक है।ऐसे में अगर शनिवार को होने वाली विधायक दल की बैठक में कुछ विधायक बैठक में नहीं आते हैं तो नीतीश कुमार के साथ-साथ एनडीए के लिए भी मुश्किल हो सकती है।
लालू प्रसाद भी मौके की तलाश में
नीतीश कुमार के पलटी मारकर बीजेपी के नेतृत्ववाली एनडीए में जाने की मन:स्थिति को देखते हुए आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव भी इसपर काफी करीब से नजर रखे हुए हैं।इनके पास राजद के 79 कांग्रेस के 19 और वाम दलों के 12 विधायक हैं। इस तरह यहां भी 12 विधायकों की संख्या सरकार बनाने की की न्यूनतम जादुई आंकड़े से 12 कम है।लालू प्रसाद यादव फिलहाल इन 12 विधायकों की तलाश में हैं और इसके लिए ये दूसरी पार्टी के विधायकों को अपने पक्ष में लाने के लिए तरह-तरह के प्रलोभन भी दिए जा रहे हैं, ताकि नीतीश कुमार एनडीए गठबंधन में चले भी जाएं तो तेजस्वी के मुख्यमंत्री में बिहार में महागतबंध की सरकार बन सके।
इंडिया गठबंधन को खत्म करने के लिए बीजेपी भी कर रही खेमेबंदी
बीजेपी भले ही बिहार की इस राजनीतिक उथल-पुथल में प्रत्यक्ष रूप से अपनी भूमिका को प्रकट नहीं कर रही है,लेकिन अंदर ही अंदर यह नीतीश कुमार को अपने पक्ष में लाकर उनके नेतृत्व वाली सरकार बनाने के लिए एड़ी – चोटी एक किए हुई है।दरअसल बीजेपी नीतीश कुमार को एनडीए गठबंधन में लाकर और उन्हें मुख्यमंत्री का पद देकर उनपत कोई अहसान नहीं कर रही है,बल्कि ऐसा करने के पीछे उसकी सोच विपक्षी गठबंधन इंडिया को अस्तित्व में आने से पूर्व ही विस्मृति के गर्भ में डालना है।ऐसा कर बीजेपी आगामी लोकसभा चुनाव में अपने लिए चुनौती पेश करने वाले इस सबसे बड़े खतरे से मुक्त हो जायेगी और इसके बाद मतों का बिखराव होने का फायदा इसे जीत के रूप में मिल सकता है ।और यह अपने 400 + का लक्ष्य पूरा करने में सफल हो सकेगी।अपने जीत सुनिश्चित करने के लिए फिलहाल बीजेपी अंदर ही अंदर पूरा प्रयास कर रही है। नीतीश कुमार के एनडीए में शामिल होने पर जेडीयू के कुछ विधायक विरोध भी कर सकते हैं, ऐसे में सरकार बनाने में जितनी विधायकों की कमी हो सकती है उसकी संभावनाओं का आकलन करते हुए बीजेपी इस समय कांग्रेस के विधायकों से भी बातचीत कर रही है। बीजेपी का दावा है कि कांग्रेस के 13 से भी ज्यादा विधायक उसके संपर्क में है।

