महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना शिंदे गुट के लिए आगामी चुनाव में एक बड़ी परेशानी का सबब बन सकता था, लेकिन एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्रित्व वाली सरकार ने शुक्रवार की देर रात एक मसौदा अध्यादेश मराठा आंदोलन के नेता मनोज जरांगे के पास भेजकर मराठा आंदोलन को खत्म करवा कर आगामी चुनाव में आने वाले एक बड़े खतरे को टाल दिया है। इस मामले पर मुख्यमंत्री कार्यालय के एक बयान में कहा गया है कि एकनाथ शिंदे ने मराठा आंदोलन से जुड़ी मांगों पर चर्चा करने के लिए अधिकारियों के साथ बैठक की और बाद में मराठा आंदोलन कार्यकर्ता मनोज जराँगे से मिलने के लिए प्रतिनिधिमंडल मसौदा अध्यादेश के साथ भेजा है।।गौरतलब है की महाराष्ट्र में 2024 में ही लोकसभा और विधान सभा के भी चुनाव होने हैं।
आज मुंबई की और कुछ करने की मिली थी धमकी
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण के लिए आंदोलन लंबे समय से चल रहा है ।इस समय मराठा आंदोलन के कार्यकर्ता मनोज जरांगे के नेतृत्व में हजारों की संख्या में पड़ोस के नवी मुंबई में डेरा डाले हुए हैं।वहीं मुख्यमंत्री द्वारा भेजे गए मसौदा प्रस्ताव को लेकर गए प्रतिनिधि मंडल में सामाजिक न्याय विभाग के सचिव सुमंत भांगे,औरंगाबाद मंडलीय आयुक्त मधुकर अरंगल, मुख्यमंत्री के निजी सचिव अमोल शिंदे और अन्य लोग शामिल हैं।मनोज जरांगे ने पहले यह घोषणा की थी कि अगर सरकार ने शुक्रवार रात तक उनकी मांगे पूरी नहीं की तो वह शनिवार को मुंबई की और कूच करना शुरू कर देंगे और भूख हड़ताल पर बैठेंगे।
घोषणा होते ही झूम उठे आंदोलनकारी
सरकार के इस कदम के बाद मराठा आंदोलन से जुड़े नेता मनोज जरांगे ने मराठा आंदोलन को समाप्त करने की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार हमसे बात करने के लिए तैयार है। इस घोषणा के बाद से मराठा आंदोलन से जुड़े सभी कार्यकर्ता खुशी से झूम उठे और नाचने लगे।गौरतलब है कि मनोज जरांगे पाटिल शनिवार को मुख्यमंत्री शिंदे की मौजूदगी में अपना आंदोलन समाप्त करेंगे। इस बात की जानकारी उन्होंने खुद दी है।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अच्छा काम किया है। हमारा विरोध अब खत्म हो गया है। हमारा अनुरोध स्वीकार कर लिया गया है। हम उनका पत्र स्वीकार करेंगे।
कौन हैं मनोज जरांगे
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग एक पुरानी मांग है, लेकिन मनोज जरांगे नाम का यह नेता मराठा आंदोलन को लेकर पिछले 6 माह से काफी चर्चा में है।इन्होंने मराठा आंदोलन को एक नई धार दी है। मनोज जरांगे ने मराठा आंदोलन की शुरुआत वर्ष 2011 में अपने गांव से की थी, जो अब पूरे महाराष्ट्र में फैल चुका है। इस आंदोलन से पहले भी मनोज जरांगे पाटिल मराठा आरक्षण को लेकर किए गए आंदोलन का हिस्सा रह चुके हैं।

