बीरेंद्र कुमार झा
पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के मतदान के दिन हिंसा की घटनाओं पर कोलकाता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बीएसएफ के आईजी से रिपोर्ट तलब की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी की याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम व न्यायाधीश हिरणमय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने राजनीतिक हिंसा की घटनाओं पर यह रिपोर्ट मांगी है। साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को घायल लोगों को अच्छी चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करनी होगी।
जरूरत पड़ने पर घायलों को बड़े सरकारी या निजी अस्पतालों में ले जाया जाय
हाई कोर्ट ने कहा कि जरूरत पड़ने पर इलाज के लिए राज्य के किसी बड़े सरकारी अस्पताल में घायलों को ले जाना होगा, अगर वहां सुविधा नहीं है तो राज्य सरकार अपने खर्चे पर निजी अस्पताल में घायलों का इलाज कराएगी। इसके अलावा अदालत ने राज्य को मृतक के अंतिम संस्कार में हर संभव सहायता प्रदान करने का आदेश दिया है।हाईकोर्ट ने प्रत्येक शव के पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराने का भी आदेश दिया।
मुआवजा तय करने के लिए नियुक्त होंगे नोडल अधिकारी
वही पीड़ित परिवार के मुआवजे के संबंध में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने कहा कि पीड़ित परिवार के लिए मुआवजा तय करने के लिए एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी, जो सभी परिस्थितियों की जांच कर रिपोर्ट पेश करेंगे।वह रिपोर्ट देखने के बाद ही अदालत तय करेगी कि पीड़ित परिवार को कितना मुआवजा दिया जाए।
1 महीने में 39 लोगों की मौत
गौरतलब है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा सदस्य अधीर रंजन चौधरी ने सोमवार को राज्य में पंचायत चुनाव से संबंधित हिंसा के पीड़ितों को मुआवजा देने की याचिका के साथ कोलकाता हाईकोर्ट का रूख किया। 8 जून को मतदान की तारीख की घोषणा के बाद से राज्य में चुनाव संबंधी हिंसा में कथित तौर पर 39 लोगों की मौत हो चुकी गई है,जबकि 8 जुलाई को मतदान के दिन 20 लोग हिंसा के शिकार हुए हैं।
चीफ जस्टिस ने पीड़ितों को मुआवजा और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने की बात कही
मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम और न्यायमूर्ति हिरणमय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने अधीर रंजन चौधरी की दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा देने के अलावा नरसंहार के लिए जिम्मेदार लोगों की भी पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू करने का राज्य सरकार को आदेश दिया।
याचिका में अधीर रंजन द्वारा लगाया गया आरोप
अधीर रंजन चौधरी ने अपनी याचिका में यह भी आरोप लगाया है कि जिला प्रशासन विशेष रूप से सबसे अधिक हिंसा ग्रस्त मुर्शिदाबाद जिले में घायल व्यक्तियों को अस्पतालों में स्थानांतरित करने की व्यवस्था करने में विफल रही।प्रशासन ने इस दौरान न्यूनतम जिम्मेदारी और मानवता भी नहीं दिखाई। याचिका में कांग्रेस नेता ने दावा किया कि वह मृतकों के परिवार के सदस्यों के साथ-साथ मतदान के दिन हिंसा में घायल हुए लोगों की ओर से याचिका दायर कर रहे हैं।
अधीर रंजन चौधरी ने हाईकोर्ट में खुद की बहस
हाई कोर्ट में अपनी तरफ से वकील तैनात करने के बजाए अधीर रंजन चौधरी ने खुद ही खंडपीठ के सामने बहस की।उन्होंने कहा कि शनिवार को चुनाव संबंधी हिंसा के शिकार मुख्य रूप से निम्न और मध्यम वर्ग के लोग हुए हैं। चुनावी हिंसा के शिकार लोगों को यह भी नहीं पता था कि इलाज के लिए वे किसके पास जाएं। कई घायल लोगों को अस्पताल नहीं ले जाया जा सका। मैं उनकी ओर से आज यहां उपस्थित हुआ हूं। इस बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी पहले ही यह मांग कर चुके हैं कि राज्य सरकार को मृतकों के परिवारों को ₹50 लाख और घायलों को ₹10 लाख की दर से मुआवजा दिया जाना चाहिए।
