कारगिल विजय गाथा को भला कौन भुला सकता है — वीर शहीदों को श्रद्धांजलि !

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न्यूज़ डेस्क 
भारत वीरों की भूमि है। भारत कभी भी किसी भी देश पर पहले आक्रमण नहीं करता लेकिन जब भारत की भूमि पर कोई दुश्मन देश गलत निगाह से आक्रमण करता है तो भारत के वीर जवांन मुहतोड़ जवाब देते रहे हैं। ऐसा हर बार हुआ है और कारगिल युद्ध में भी यही सब देखने को मिला। पाकिस्तान ने गलत इरादे पर हमारे देश पर आक्रमण किया और हमारे जांबाज सैनिकों ने अपनी जान की बाजी लगाकर अपने देश की सीमा की रक्षा की।    

  देश आज करगिल विजय दिवस मना रहा है। देशभर में इस मौके पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जा रही है। करगिल युद्ध भारतीय सेना के साहस और जांबाजी की ऐसी मिसाल है, जिस पर पूरे देश को गर्व है। हाड़ कंपा देना वाली सर्दी में करीब 18 हजार फीट की ऊंचाई पर करगिल में लड़ी गई इस जंग में देश ने अपने 527 से ज्यादा वीर सूपतों को खोया था। इस दौरान 1300 से ज्यादा जांबाज देश के लिए लड़ते हुए जख्मी हुए थे।
                पाकिस्तान ने इस जंग की शुरूआत 3 मई 1999 को करते हुए करगिल की ऊंची पहाड़ियों पर 5,000 सैनिकों के साथ घुसपैठ की थी और वहां कब्जा जमा लिया था। इसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन विजय चलाया। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खिलाफ मिग-27 और मिग-29 का भी इस्तेमाल किया। इसके बाद जहां भी पाकिस्तान ने कब्जा किया था, वहां बम बरसाए गए। इसके अलावा मिग-29 की सहायता से पाकिस्तान के कई ठिकानों पर आर-77 मिसाइलों से हमला किया गया।
               करगिल युद्ध में बड़ी तादाद में रॉकेट और बम का इस्तेमाल किया गया। जंग के दौरान करीब ढाई लाख गोले दागे गए, 5,000 से ज्यादा बम फायर करने के लिए 300 से ज्यादा मोर्टार, तोपों और रॉकेट का इस्तेमाल किया गया। कहा जाता है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद करगिल युद्ध ही ऐसा युद्ध था, जिसमें दुश्मन देश की सेना पर इतनी बड़ी संख्या में बमबारी की गई थी।

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