सीधी पेशाब कांड के बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस का राजनीतिक दाव ,आदिवासी अत्याचार पर राज्यपाल को ज्ञापन !

0
159


न्यूज़ डेस्क 

देश भर के आदिवासियों की क्या दशा है यह कौन नहीं जानता ! आजाद भारत में अगर कोई समाज आज भी सबसे निचले पायदान पर है तो वह आदिवासी समाज ही है। आदिवासी वोट उगाहने के लिए सभी पार्टियां आदिवासियों की परिक्रमा तो करती है लेकिन उन्हें कुछ देती नहीं। सत्ता सरकार में आने के बाद सभी पार्टियां आदिवासियों को भूल ही जाती है। अभी फिर से मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में चुनाव होने हैं तो आदिवासी समाज सबको याद आने लगे हैं। खासकर सीधी में पेशाब कांड होने के बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस भी सक्रिय हो गई है और आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार को लेकर राज्यपाल को एक ज्ञापन दिया गया है। यह ज्ञापन कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने दी है।            
     अपने ज्ञापन में कमलनाथ ने कहा है कि मध्यप्रदेश देश का ऐसा राज्य है, जहां सबसे बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के नागरिक निवास करते हैं। मध्य प्रदेश के समाज, संस्कृति, संस्कार और परंपराओं में आदिवासी समुदाय का उल्लेखनीय योगदान है। आदिवासी समुदाय मध्यप्रदेश के सामाजिक जीवन का अभिन्न और अति महत्वपूर्ण अंग है। लेकिन देखने में आ रहा है कि भारतीय जनता पार्टी की 18 साल की सरकार में आदिवासी समुदाय के ऊपर अत्याचार दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है। भाजपा सरकार में आदिवासी उत्पीड़न के 30,000 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं, जबकि इससे बड़ी संख्या ऐसे मामलों की है जो प्रकाश में नहीं आ सके।         
      ज्ञापन में आगे कहा गे है कि ”आपने देखा होगा कि हाल ही में प्रदेश के सीधी जिले में एक आदिवासी युवक के ऊपर पेशाब करने की घटना सामने आई। घटना का मुख्य आरोपी भाजपा नेता था और भाजपा विधायक का विधायक प्रतिनिधि था।इसके पूर्व नीमच में आदिवासी युवक को गाड़ी से बांधकर घसीट कर हत्या करने का मामला पूरी दुनिया ने देखा।नेमावर में आदिवासी युवती और उसके परिवार के 6 लोगों को जिंदा गाड़ देने का भीषण कृत्य भी मध्य प्रदेश की माटी को देखना पड़ा।
यह ज्ञापन तैयार करते समय इंदौर के महू से दो आदिवासी युवकों को बुरी तरह पीटे जाने का वीडियो भी सामने आया।”
    राज्यपाल को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि ” यहां केवल उन घटनाओं का जिक्र किया गया है जो अत्यंत अमानवीय थीं और जिन्हें पूरी दुनिया ने देखा। यह घटनाएं ना सिर्फ मानवता को शर्मसार करती हैं, बल्कि पूरी दुनिया के सामने मध्यप्रदेश की एक ऐसी तस्वीर पेश करती हैं जिनसे लगता है कि मध्य प्रदेश आदिवासियों पर अत्याचार करने वाले लोगों का प्रदेश बन गया है।”
       राज्यपाल को सम्बोधित करते हुए कमलनाथ ने कहा है कि ”आदरणीय आप स्वयं आदिवासी समुदाय से आते हैं, इसलिए आदिवासी समुदाय की पीड़ा, वंचना और संघर्ष को आप से बेहतर कौन जान सकता है? लेकिन हमारा दुख तब और बढ़ जाता है जब आदिवासियों पर अत्याचार सत्ताधारी दल के नेताओं के द्वारा या उनके संरक्षण में किए जाते हैं।”
              ज्ञापन में कहा गया है कि प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार का आदिवासी विरोधी रवैया इस बात से भी समझा जा सकता है कि आदिवासी कल्याण का बजट राजनीतिक स्वरूप की सरकारी रैलियों पर खर्च कर दिया जाता है। अनुसूचित जनजाति के लोग अपने लिए बनाए गए अजाक थानों में शिकायत कराते हैं, लेकिन उन थानों का बजट भी शासन ने स्वीकृत नहीं किया है। अगर कोई अपराध सामने आता है तो सत्ताधारी लोग उसे दबाने में लग जाते हैं।
 इस तरह से मध्य प्रदेश की सरकार और राजनीतिक तंत्र एक ऐसा घृणा और अन्याय का वातावरण पैदा कर रहा है जिसमें आदिवासी समुदाय के प्रति अत्याचार दिन पर दिन बढ़ते जा रहे हैं।
 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here