Homeदेशजानिए सामान नागरिक संहिता के विरोध में क्यों उतरे केसीआर !

जानिए सामान नागरिक संहिता के विरोध में क्यों उतरे केसीआर !

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न्यूज़ डेस्क 
सामान नागरिक संहिता को लेकर मचे बवाल के बीच तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने इसका विरोध करने का फैसला किया है। केसीआर ने कहा है कि बीआरएस केंद्र सरकार के उन सभी फैसले का विरोध करेगी जो देश की अखंडता के लिए हानिकारक है। भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने पिछले नौ वर्षों में देश के विकास और कल्याण को नजरअंदाज कर दिया है। भाजपा अलग-अलग तरीकों से लोगों को परेशान कर रही है। केसीआर ने कहा कि यूसीसी के नाम पर लोगों को विभाजित करने की कोशिश कर रही है। भारत की एकता दुनिया में एक मिसाल है। इसलिए इसकी रक्षा करने के लिए बिल को खारिज करना आवश्यक है। भाजपा बिल पेश करके लोगों को भड़काने की कोशिश कर रही है।         
     बता दें कि मुख्यमंत्री केसीआर ने कल ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष खालिद सैफुल्लाह रहमानी के साथ आए प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इन नेताओं के प्रतिनिधिमंडल में असदुद्दीन ओवैसी भी शामिल थे। मंडल ने मुख्यमंत्री ने अनुरोध किया है कि वह यूसीसी बिल का विरोध करें।
            मुख्यमंत्री केसीआर से मुलाकात के बाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भाजपा यूसीसी के नाम पर देश की धर्मनिरपेक्षता को कमजोर करना चाहती है। यूसीसी सिर्फ मुसलमानों का ही नहीं बल्कि ईसाइयों, आदिवासियों और हिंदुओं का भी मुद्दा है। अगर यूसीसी लागू होता है तो हिंदू उत्तराधिकारी अधिनियम, हिंदू विवाह अधिनियम सहित अन्य कानून अस्तित्व में नहीं रहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा, “यूसीसी देश की सुंदरता और संस्कृति को खत्म कर देगा। अगर यूसीसी लागू किया जाएगा तो देश का बहुलवाद समाप्त हो जाएगा जो अच्छी बात नहीं है। पीएम मोदी, बीजेपी और आरएसएस को बहुलवाद पसंद नहीं है जो हमारे देश की खूबसूरती है।”
              बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भोपाल में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए समान नागरिक संहिता की जरूरत पर जोर दिया था। उन्होंने कहा कि संविधान में सभी नागरिकों के लिए एक समान अधिकार मिला है। दो अलग-अलग कानूनों से घर तक नहीं चलता तो देश कैसे चलेगा। बता दें कि राम मंदिर और अनुच्छेद 370 के बाद बीजेपी अब अपने तीसरे अहम अजेंडे समान नागरिक संहिता पर आगे बढ़ने को तैयार है।
           बता दें कि अभी तक देश में हर धर्म का पर्सनल लॉ है, जिसमें शादी, तलाक और संपत्तियों के लिए अपने-अपने कानून हैं। हिंदुओं के लिए हिंदू मैरिज एक्ट है। वहीं, मुसलमानों के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ है। यूनिफॉर्म सिविल कोड आने के बाद सभी धर्मों के लिए एक कानून की व्यवस्था होगी। 

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