विकास कुमार
आईपीएस अफसर बनना किसी भी युवक का ख्वाब होता है,लेकिन आईपीएस अफसर भी अगर कानून से खिलवाड़ करता है तो उसे जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ता है। बिहार कैडर के एक आईपीएस अफसर की बर्बादी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। आईपीएस अफसर आदित्य कुमार का पूरा कैरियर अब बर्बाद हो चुका है। कभी दूसरे अपराधियों से सख्ती से पूछताछ करने वाले आदित्य कुमार आज खुद अपराधी के तौर पर सवालों का जवाब दे रहे हैं। पहले तो आईपीएस आदित्य कुमार को निलंबित किया गया,अब उनसे ईओयू ने कड़ाई से पूछताछ की है। ईओयू के पूछताछ के दौरान आदित्य कुमार के पसीने छूट गए। निलंबित आईपीएस आदित्य कुमार से ईओयू के अधिकारियों ने कई सवाल किए हैं। कई सवालों का जवाब आदित्य कुमार ने जांच में जुटे अधिकारियों को नहीं दिया। जब वे सवालों को जवाब नहीं दे सके तो उन्होंने लगातार भटकाने की कोशिश की।
आदित्य कुमार को बेउर जेल से आर्थिक अपराध इकाई के मुख्यालय लाया गया था, फिर वहां उनसे एक-एक कर सौ से अधिक सवाल पूछे गए। कई सवालों के सही जवाब उन्होंने दिए ही नहीं। आदित्य कुमार कई बार अपनी गोलमोल बातों में उलझाते रहे। आदित्य बार बार ये कहते रहे कि साजिश के तहत उनको फंसाया गया है। पूछताछ के दौरान आदित्य कुमार ने ईओयू के टीम के सामने अपनी सफाई पेश करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि फर्जीवाड़ा का जो केस मेरे उपर हुआ है उसमें मेरा कोई रोल नहीं है। तत्कालीन डीजीपी को मैंने कोई कॉल नहीं करवाया। मुझे एक साजिश के तहत फंसाया गया है। अमित लोढ़ा की शिकायत पर पुलिस मुख्यालस ने मेरे खिलाफ संज्ञान लिया। जांच के दौरान मेरी एक बात नहीं सुनी गई। तत्कालीन डीजीपी ने मेरी शिकायत पर कोई एक्शन नहीं लिया। अपने राजनीतिक रिश्तों और सीनियर होने का अमित लोढ़ा ने पूरा फायदा उठाया।
आदित्य कुमार ने हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस के नाम पर पूर्व डीजीपी संजीव कुमार सिंघल को कॉल कराया था। इस कॉल में शराब कांड के मामले को फर्जी तरीके से खत्म कराने की बात सिंघल से कही गई थी। अब इसी केस में करीब 5 घंटे से अधिक समय तक उनसे पूछताछ की गई। साफ है कि एक गलती ने आईपीएस आदित्य कुमार की जिंदगी तबाह कर दी है।
