Homeदेशराजनीति का प्रभाव शिक्षा नीति पर पड़ने की संभावना

राजनीति का प्रभाव शिक्षा नीति पर पड़ने की संभावना

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बीरेंद्र कुमार झा

पिछले कुछ दिनों खासकर जी-20 शिखर सम्मेलन के समय हमारे देश में इंडिया बनाम भारत का मुद्दा खूब गरमाया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा भेजे गए आमंत्रण में प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया की जगह प्रेसिडेंट ऑफ भारत का लिखना कई राजनीतिक दलों को खल सा गया ,जबकि संबैधानिक तौर पर इसमें कुछ भी गलत नहीं था।तब इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष की खूब राजनीति हुई। लेकिन अब चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि भारत बनाम इंडिया का जंग यहां की शिक्षा नीति को भी प्रभावित कर सकता है।

एनसीईआरटी की किताबों में इंडिया का नाम बदलकर भारत करने की चर्चा

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT )की किताबों में इंडिया का नाम बदलकर भारत करने की मीडिया रिपोर्ट पर एनसीईआरटी का कहना है की अभी इस पर कुछ भी टिप्पणी करना जल्दी बाजी होगी।मीडिया रिपोर्ट पर एनसीईआरटी का कहना है कि चुके नए सिलेबस और पाठ्य पुस्तकों पर काम चल रहा है । एनसीईआरटी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरुप स्कूली पाठयपुस्तकों उसको कि सिलेबस में बदलाव कर रहा है।

एनसीईआरटी द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष सीआई इशाक की ओर से यह कहा गया कि समिति ने पाठ्य पुस्तकों में इंडिया की जगह भारत शब्द के इस्तेमाल, प्राचीन इतिहास के स्थान पर क्लासिकल हिस्ट्री शुरू करने और सभी विषयों के पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) शुरू करने की सिफारिश की है।

एनसीईआरटी द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति के अन्य सदस्य

एनसीईआरटी द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति के अन्य सदस्यों में इग्नू के अध्यक्ष राघवेंद्र तंवर, जेएनयू के प्रोफेसर वंदना मिश्रा, डेक्कन कॉलेज डीम्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति बसंत शिंदे और हरियाणा में एक सरकारी स्कूल में समाजशास्त्र पढ़ने वाली ममता यादव शामिल हैं।

उच्च स्तरीय समिति का प्रपोजल निर्णय की प्रत्याशा में

उच्च स्तरीय समिति के प्रपोजल को यदि स्वीकार किया जाता है, तो एनसीईआरटी की किताबों में इंडिया की जगह भारत प्रिंट होगा।हालांकि एनसीईआरटी के अधिकारियों का कहना है कि पैनल की सिफारिश पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है ।

 

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