भविष्य के घर खुद में जमा करेंगे बिजली, चीन में खास सीमेंट टेक्नोलॉजी तैयार

0
7

अभी तक आपने बैटरी में करंट स्टोर होने की बात सुनी होगी लेकिन भविष्य के घर भी अपने अंदर बिजली स्टोर कर सकेंगे। दरअसल शहरों को कार्बन फ्री बनाने के लिए रिसर्च कर रहे कुछ रिसर्चर्स ने ऐसा जबरदस्त तरीका ढूंढ निकाला है। चीन के हार्बिन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के रिसर्चर्स ने ऐसा सीमेंट आधारित सुपरकैपेसिटर तैयार किया है, जो मजबूती के साथ-साथ अपने अंदर बिजली भी स्टोर कर पाएगा।

इस सीमेंट की खासियत यह भी है कि यह 3D-प्रिंटेबल भी है। अगर इस तकनीक को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल में लिया जाता है, तो इससे बैटरियों पर निर्भरता कम हो सकती है और इमारते अपने आप में बिजली स्टोर करने का काम कर सकती हैं।

यह बात तो सभी जानते हैं कि सोलर पैनल या पवन चक्की से बिजली बनाई जा सकती है लेकिन उसे स्टोर करने के लिए महंगे बैटरी बैकअप की जरूरत पड़ती है। इनके समाधान के तौर पर रिसर्चर्स ने सुपर कैपेसिटर बनाएं हैं, जो धीमी रफ्तार से होने वाले केमिकल रिएक्शन की जगह बहुत तेजी से ऊर्जा को स्टोर और रिलीज कर सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार इस तकनीक को इमारतों की नीव, दीवारों या सीढ़ियों में लगाया जा सकता है। इससे दिन में बनने वाली एक्स्ट्रा बिजली को इमारत खुद में समेट सकेगी और जरूरत के मुताबिक सप्लाई भी करेगी।

इस सफल तकनीक के सामने आने से पहले मौजूद टेक्नोलॉजी की कमी थी कि सीमेंट आधारित वे डिवाइस कमजोर होते थे और उनमें आयन बहुत धीमी गति से चलते थे। यानी कि उन्हें बिजली स्टोर करने या इस्तेमाल के लिए रिलीज करने में काफी समय लग जाता था।

इस परेशानी को दूर करने के लिए रिसर्चर्स ने नैनो ट्यूब, कार्बन ब्लैक और सीमेंट को मिलाकर एक हाई-कंडक्टिव प्रिंटेबल इंक तैयार की। 3D प्रिंटर की मदद से इस मिश्रण को कंक्रीट स्लैब पर आपस में इंटरलॉक होने वाली बनावट में ढाला गया।

इस तकनीक की वजह से सीमेंट की मजबूती पर कोई असर नहीं पड़ता है। टेस्टिंग में साबित हुआ है कि एनर्जी स्टोरिंग स्लैब 23.00 MPa का दबाव झेल सकती है। यह सामान्य सीमेंट की क्षमता के बराबर है।

इसकी टेस्टिंग में रिसर्चर्स ने 3D प्रिंटेड डिवाइस को एक सीमेंट के स्लैब से जोड़ा, जिसने बिना किसी वायरिंग के तुरंत LED लाइट्स को जला दिया। यह तकनीक पावर कट के दौरान इमरजेंसी लाइट्स और सुरक्षा सेंसर्स को आसानी से चला सकती है।

अपनी शुरुआती टेस्टिंग में यह कंक्रीट सुपर कैपेसिटर पास हो गया है, लेकिन इसकी एक बड़ी कमी है कि यह -18°C की भीषण ठंड में अपनी परफॉर्मेंस गिरा देता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ठंड में आयनों की गति यानी कि करंट का फ्लो धीमा हो जाता है।
रिसर्चर्स फिलहाल इस चुनौती से निपटने का तरीका तलाश रहे हैं। हालांकि साधारण तापमान वाली जगहों के लिए यह तकनीक बेहद काम की साबित हो सकती है।
भविष्य में हमें शायद ऐसे घर और इमारतें देखने को मिल सकती हैं, जो सोलर या पवन चक्की से दिन में बिजली बनाकर अपने अंदर स्टोर करेंगी और रात के समय में उन्हें अलग-अलग कामों के लिए इस्तेमाल में लाएंगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here