अखिलेश अखिल
पांच राज्यों में चुनाव से पहले मोदी कैबिनेट में बदलाव की सम्भावना है। इसको लेकर बीजेपी के भीतर लगातार बैठक भी चल रही है। यह बदलाव कब होगा ,किसकी कुर्सी खतरे में है और किसकी इंट्री होने वाली है इस पर कई तरह के कयास भी लगाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि परफॉर्मेंस के आधार पर ही किसी को कैबिनेट में जगह मिलेगी या किसी को बाहर किया जायेगा। ऐसे में कई नए लोगों की भी लॉटरी लग सकती है और कई बड़े नाम को कैबिनेट से हटाया भी जा सकता है। हालांकि अभी तक किसी के नाम को लेकर कोई चर्चा नहीं है लेकिन बीजेपी के भीतर इस बात की चर्चा जरूर चल रही है कि जो नेता पिछले 9 साल से मोड़ मंत्रिमंडल में शामिल होकर आगे बढ़ते रहे हैं उनमे से आधा दर्जन मंत्रियों की कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है।
जिन नामो की चर्चा चल रही है उसमे वित् मंत्री सीतारमण ,ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ,टेक्सटाइल मंत्री पियूष गोयल ,सड़क परिवहन राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह और अर्थ मंत्री किरेन रिजिजू के नाम शामिल हैं। यह बात और है कि आज भी ये सभी नेता मोदी कैबिनेट की शान हैं लेकिन साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि इनका परफॉर्मेंस बेहद ख़राब है। जनता के बीच इनकी पहुँच बहुत ही कम है और वोट उगाह पाने में भी इनकी भूमिका न के बराबर है।
जहाँ तक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की बात है ये आडवाणी, गडकरी और राजनाथ सिंह के कार्यकाल में मुखर प्रवक्ता रहीं और सीतारमण को 2014 में मोदी कैबिनेट में शामिल किया गया। उस वक्त उन्हें वित्त और कॉर्पोरेट मंत्रालय में राज्यमंत्री बनाया गया। बाद में इन्हे वाणिज्य और उद्योग विभाग में स्वतंत्र प्रभार का मंत्री भी बनाया गया। 2017 में सीतारमण का प्रमोशन हुआ और उन्हें रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली। भारत में रक्षा विभाग की कमान संभालने वाली सीतारमण इंदिरा गांधी के बाद दूसरी महिला मंत्री थीं।सीतारमण के वक्त ही भारतीय सेना ने पीओके में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था। बीजेपी ने इसे चुनाव में बड़ा मुद्दा बनाया और पार्टी को इसका फायदा भी मिला।
2019 में जीत के बाद सीतारमण का कद और अधिक बढ़ गया। बीजेपी के नए समीकरण में अमित शाह को गृह मंत्री बनाया गया और गृह मंत्री रहे राजनाथ सिंह रक्षा मंत्री बन गए। सीतारमण को सरकार में वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली। लेकिन अभी तक के कार्यकाल में देश की आर्थिक स्थिति में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ। देश महंगाई की मार झेलती रही। कई तरह के आर्थिक उलट फेर भी हुए। पीएम की नाराजगी तो होती रही लेकिन सरकार की बदनामी न हो इसके लिए पूरी बीजेपी उनका समर्थन करती रही। संघ के भी कई नेता वित्त मंत्रालय पर सवाल करते रहे हैं। अब कहा जा रहा है कि अगले साल लोकसभा का चुनाव होना है। और देश की आर्थिक हालत ऐसी ही रही तो जनता में और भी परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि सीतारमण को वित्त मंत्रालय से हटाया जा सकता है। हो सकता है कि उन्हों कोई और विभाग दिया जाए या फिर उन्हें राज्यपाल की भूमिका में रख दी जाए।
गर्मीं विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का भी कोई बड़ा परफॉर्मेंस अब तक नहीं रहा है। मोदी सरकार ने ग्रामीण भारत के लिए कई योजनाएं शुरू जरूर की है कि लेकिन सरकार की कोई भी एक ऐसी योजना नहीं है जो अपनी चाप ग्रामीण भारत में छोड़ती हो। तोमर मोदी मंत्रिमंडल में 2014 से ही सत्ता का लाभ उठा रहे हैं। कई मंत्रालय देख चुके हैं। वे कृषि और किसान कायण मंत्रालय भी देख चुके हैं लेकिन कही भी उनके काम की तारीफ नहीं हुई है। वे करीब आधा दर्जन मंत्रालय की परिक्रमा कर चुके हैं। अब कहा जा रहा है कि तोमर को मध्यप्रदेश में फिर से पार्टी अध्यक्ष बनाकर भेजा जा सकता है ताकि शिवराज सिंह और सिंधिया को एक साथ साधा जा सके। सब जानते हैं कि तोमर की पकड़ ग्वालियर -चम्बल संभाग में अच्छी पकड़ है साथ ही पुराने नेताओं के साथ भी उनके बेहतर सरोकार हैं। कई नेता अभी शिवराज सिंह के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। बीजेपी शायद तोमर को वहां भेजकर संगठन को मजबूत करें। ऐसी हालत में तोमर की कैबिनेट से विदाई हो सकती है।
पीयूष गोयल पार्टी के चर्चित नेता है और पार्टी के कोषाध्यक्ष भी रह चुके हैं। गोयल भी 2014 से ही मोदी कैबिनेट में बने हुए हैं। इनके जिम्मे भी कई मंत्रालय दिए जा चुके हैं। अब कहा जा रहा है कि गोयल को जा सकता है। राजस्थान के चुनाव को देखते हुए गोयल को राजस्थान के लिए बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
अरुणाचल से आने वाले किरेन रिजिजू भी मोदी कैबिनेट में 2014 से ही लगातार मंत्री रहे हैं। कई बार उनकी पदोन्नति की गई। ये गृह राज्य मंत्री भी रह चुके हैं। ये खेल और युवा मंत्रालय भी संभाल चुके हैं। कानून मंत्री भी रह चुके हैं ,अभी अर्थ मंत्री हैं। अब कहा जा रहा है कि किरेन रिजिजू की कुर्सी जा सकती है। उन्हें संगठन में भेजा जा सकता है यह अरुणाचल में ही पार्टी को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
सैन्य क्षेत्र से पहले अन्ना आंदोलन और फिर बीजेपी में आने वाले जनरल वीके सिंह को 2014 में मोदी कैबिनेट में शामिल किया गया था। सिंह को नॉर्थ-ईस्ट और सांख्यिकी विभाग में स्वतंत्र प्रभार की जिम्मेदारी दी गई थी। साथ ही विदेश विभाग में राज्य मंत्री भी बनाया गया था। 2019 में जब मोदी सरकार का गठन हुआ तो सिंह को कैबिनेट में शामिल किया गया। उन्हें सड़क परिवहन विभाग में राज्य मंत्री बनाया गया। 2021 में सिंह को सड़क परिवहन के साथ-साथ नागरिक विमानन विभाग में भी राज्य मंत्री बनाया गया।
सिंह 2014 और 2019 का चुनाव गाजियाबाद सीट से जीत चुके हैं, जो पहले राजनाथ सिंह का गढ़ माना जाता था। अब नए फेरबदल में वीके सिंह को हटाए जाने की चर्चा ने जोर पकड़ ली है। शायद इस बार उन्हें लोकसभा का टिकट भी नहीं मिले। खबर यह भी है कि उन्हें कही का राज्यपाल भी बनाया जा सकता है।
मोदी कैबिनेट में फेरबदल: परफॉर्मेंस के आधार पर पांच मंत्रियों की कुर्सी पर खतरा बढ़ा
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