मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल न करें’: दिल्ली मेट्रो बंदी पर बोले CJI सूर्यकांत

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सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी के शनिवार (10 अक्टूबर, 2026) को होने वाले प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस के कुछ एहतियाती कदमों पर बड़ी टिप्पणी की है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि सरकार को कुछ चीजों को रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए। लेकिन,इसका मतलब ये नहीं है कि मक्खी मारने के लिए हथौड़ा उठा लिया जाए।

सुप्रीम कोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी के शनिवार के प्रदर्शन से पहले हो रही सुनवाई के दौरान सीजेआई की बेंच ने सरकार और पुलिस की ओर से उठाए जा रहे एहतियाती कदमों की जरूरत तो बताई, लेकिन यह भी कहा कि जरूरत के हिसाब से ही सख्ती होनी चाहिए।

बार एंड बेंच ने एक्स पर जो शेयर किया है उसके मुताबिक सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘प्रत्येक नागरिक के लिए हम जो एक बहुत महत्वपूर्ण सिद्धांत अपनाते हैं, वो आनुपातिकता का सिद्धांत।’ इसपर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हामी भरी- ‘बिल्कुल’।

इसपर तुषार मेहता ने कहा, ‘कोर्ट ने एक उदाहरण के तौर पर यह बात कही है। यह इस तरह से रिपोर्ट नहीं करनी चाहिए कि भारत के चीफ जस्टिस ने कहा है कि सरकार मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल कर रही है।’

इसपर सीजेआई ने सरकार की दलीलों से सहमति जताते हुए कहा, ‘सावधानी बरतें। बहुत ज्यादा सावधानी बरतें। इसमें कोई दिक्कत नहीं है। आप कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार हैं। लेकिन, यह जिम्मेदारी सिर्फ सरकारी संपत्ति की हिफाजत के बारे में नहीं है। यह लोगों की हिफाजत को लेकर है। यह आपकी सॉवरेन ड्यूटी है। इन स्थानों से हमारी बेटियां, छोटे बच्चे, वरिष्ठ नागरिक, बहुत बुजुर्ग लोग और मरीज गुजरते हैं। उनकी भी हिफाजत जरूरी है। उचित कदम उटाने में किसी भी तरह से कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन, यह सुनिश्चित करें कि सबकुछ रुक न जाए।’
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच सरकार की ओर से सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित प्रदर्शन से पहले जो कदम उठा रही है, उसी के खिलाफ दर्ज याचिका पर सुनवाई करते हुए ये बातें कही हैं। सर्वोच्च अदालत में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पैरवी की है।

इस दौरान सीनियर एडवोकेट सीयू सिंह ने कहा कि अपने देश में पहले इस तरह से नागरिकों की आवाजाही को एहतियाती तौर पर एकसाथ रोकने की कोई अवधारना नहीं थी। पुलिस कानून व्यवस्था संभालने के लिए वहां होती है। उन्होंने कहा कि ट्रेनों को पूरी तरह से रोक देना गलत है। इसपर सीजेआई ने कहा कि अदालत भी यही कह रही है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानून की पालन कराने वाली एजेंसियां जिम्मेदार हैं। वो आवाजाही को नियंत्रित कर सकती हैं। लेकिन, पूरी तरह से रोक लगाने को लेकर ही हमने चिंता जताई है।

सुप्रीम कोर्ट में पहले मामला उठाते हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने दावा किया कि ‘सारी ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। मेट्रो स्टेशन बंद किए जा चुके हैं। आप कहीं नहीं जा सकते। लोगों के लिए होटल बंद हैं। निजामुद्दीन बंद है। आरडब्ल्यूए से कहा जा रहा है कि लोग बाहर नहीं आ सकते। ये कैसे हो सकता है। मेरे देश में क्या हो रहा है?’ वहीं वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने दावा किया कि ‘पूरी दिल्ली बंद कर दी गई है।’ वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि ’57 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए हैं।’

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