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नए संसद भवन के उद्घाटन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर,उद्घाटन समारोह में सम्मिलित होने को लेकर दो भागों में विभक्त हुआ राजनीतिक दल

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बीरेंद्र कुमार झा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मई को नए  संसद भवन का उद्घाटन करेंगे लेकिन देश में अब इसपर सियासी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस सहित 19 विपक्षी पार्टियों ने उद्घाटन समारोह के बहिष्कार करने का फैसला किया है, जबकि चार विपक्षी पार्टियों ने समारोह में शामिल होने का फैसला किया है। विपक्षी पार्टियां नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति के हाथों कराने की मांग कर रही है। यहां तक की यह मुद्दा अब सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच गया है।

नए संसद भवन के उद्घाटन को लेकर जनहित याचिका दायर

संसद भवन के उद्घाटन को देश में चल रही सियासी हरकत के बीच संसद के नए भवन का उद्घाटन,राष्ट्रपति द्वारा न कराकर प्रधानमंत्री द्वारा कराए जाने का यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई है। इसमें सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि न्यू पार्लियामेंट बिल्डिंग का उद्घाटन भारत के राष्ट्रपति के द्वारा किया जाना चाहिए

प्रधानमंत्री द्वारा नए संसद भवन के उद्घाटन का बहिष्कार करेंगे ये राजनीतिक दल

सुप्रीम कोर्ट अगर केंद्र सरकार को इस मामले में कोई निर्देश नहीं देता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही नए संसद भवन का उद्घाटन करेंगे तो कई राजनीतिक दल इस उद्घाटन संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम का बहिष्कार करेंगे। संसद के नए भवन के उद्घाटन समारोह का इस रूप में बहिष्कार करने वाले राजनीतिक दल हैं कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, जनता दल यूनाइटेड, आम आदमी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी,2 समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी,इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ,झारखंड मुक्ति मोर्चा, नेशनल कांफ्रेंस, केरल कांग्रेस (मनी), रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, विदुथलाई चिरूथिगल कांची मारुमलार्ची, द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम और राष्ट्रीय लोक दल भी शामिल हैं।इसके अलावा ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने भी उद्घाटन समारोह के बहिष्कार करने की घोषणा की है।

नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे ये राजनीतिक दल

28 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नए संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम का निमंत्रण मिलने पर 4 राजनीतिक दल के नेताओं ने इसमें सम्मिलित होने की घोषणा की है। ये राजनीतिक दल हैं चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली तेलुगू देशम पार्टी,मायावती के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी ,नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली बीजू जनता दल और जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआरसीपी।

नए संसद भवन के प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन का वहिष्कार कर रहे राजनीतिक दलों का तर्क

नए संसद भवन के उद्घाटन प्रधानमंत्री के हाथों कराने के निर्णय से जिन विपक्षी राजनीतिक दलों को आपत्ति है, उनका तर्क है कि संसद लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति के सम्मिलित रूप को कहते हैं । राष्ट्रपति इसमें सर्वोपरि हैं। इसलिए नए संसद भवन का उद्घाटन समारोह राष्ट्रपति के हाथों होना चाहिए। केंद्र सरकार द्वारा इसे प्रधानमंत्री के हाथों कराने का निर्णय राष्ट्रपति का अपमान है। विपक्षी राजनीतिक दल केंद्र सरकार के इस निर्णय को राष्ट्रपति को कम कर आंकने के साथ-साथ उन पर आदिवासी और महिला विरोधी होने का आरोप भी लगा रहे है वही इस समूह में कुछ राजनीतिक दल के नेताओं को लगता है कि अगर राष्ट्रपति के हाथों नए संसद भवन का उद्घाटन नहीं कराया जा रहा है तो जान से कम लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के हाथों उसे कराया जाना चाहिए ,क्योंकि वे लोकसभा के अध्यक्ष हैं।

बीजेपी की विपक्षी राजनीतिक दल के नेताओं को सलाह

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने नए संसद भवन के उद्घाटन का विरोध कर रहे विपक्षी पार्टियों पर हमला करते हुए कहा कि ये हमें सलाह दे रहे हैं। इंदिरा गांधी ने संसद के उपभावन के उद्घाटन के दौरान क्या किया था, उस समय कोई हंगामा नहीं हुआ। आपके पास अपने लिए अलग मानक हैं और दूसरों के लिए अलग मानक। यह देश और किसी भी व्यक्ति के लिए जीवन में एक बार आने वाला क्षण है।फुटनोट में कहीं लिखा जाएगा कि इन लोगों ने संसद भवन के उद्घाटन के कार्यक्रम का बहिष्कार किया था।

वहीं विपक्षी दलों द्वारा नए संसद के उद्घाटन का बहिष्कार करने पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह लोकतंत्र का मंदिर है।यहां तक कि प्रधानमंत्री भी इस के कदमों पर झुककर संसद में प्रवेश करते हैं। मैं विपक्ष से विनम्रता पूर्वक अनुरोध करती हूं कि वे कृपया अपनी सोच पर पुनर्विचार करें और समारोह में हिस्सा लें।

उद्घाटन समारोह में शामिल होने वाले राजनीतिक दल का पक्ष

नए संसद भवन के प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन समारोह में सम्मिलित होने की स्वीकृति देने के साथ ही साथ बीएसपी प्रमुख मायावती ने कुछ ट्वीट भी किए हैं ।उन्होंने अपने ट्विटर वाल पर लिखा है कि बीएसपी 28 मई को न्यू पार्लियामेंट बिल्डिंग के उद्घाटन का स्वागत करती है। राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू द्वारा भवन का उद्घाटन नहीं किए जाने पर समारोह का बहिष्कार अनुचित है। समारोह के निमंत्रण के लिए धन्यवाद।

एक दूसरे ट्वीट में मायावती ने लिखा है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी द्वारा नए संसद का उद्घाटन नहीं कराए जाने को लेकर बहिष्कार अनुचित। सरकार ने इसको बनाया है, इसलिए उसके उद्घाटन का हक उसे है। इसको आदिवासी महिला सम्मान से जोड़ना भी अनुचित है। यह उन्हें निर्विरोध न चुनकर उनके विरुद्ध उम्मीदवार खड़ा करते वक्त सोचना चाहिए था।

एक तीसरे ट्वीट में मायावती ने लिखा है कि देश को समर्पित होने वाले कार्यक्रम अर्थात नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह का निमंत्रण मुझे प्राप्त हुआ है जिसके लिए आभार और मेरी शुभकामनाएं पार्टी की लगातार जारी समीक्षा बैठकों संबंधी अपने पूर्व निर्धारित के कारण मैं उस समारोह में शामिल नहीं हो पाऊंगी।

तेलुगू देशम पार्टी के नेता चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि वह 28 मई को नए संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होंगे।

 

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