बीरेंद्र कुमार झा
चीन को जवाब देने के लिए भारत सरकार ने 3 सरकारी कंपनियों को अरुणाचल प्रदेश में 12 जलविद्युत परियोजनाओं का काम तेजी से पूरा करने के लिए लगा दिया है। इन कंपनियों को फास्टट्रैक से इस काम को पूरा करना है। इसमें 2000 मेगा वाट का शुभम श्री प्रोजेक्ट भी शामिल है जो कि रणनीतिक रूप से बेहद अहम है।दरअसल चीन सीमा के पास ही एक डैम बना रहा है। ऐसे में चीन को जवाब देने के लिए यह डैम काफी अहम है।जिन कंपनियों को यह काम सौंपा गया है। वे हैं एनएचपीसी, एसजेवीएन और नीपको। यह तीनों कंपनियां एनटीपीसी की ही सब्सिडियरी है।
बिजली के अलावे भी महत्वपूर्ण है यह प्रोजेक्ट
अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर में इन प्रोजेक्ट को लेकर एमओयू पर साइन किए गए हैं। इन प्रोजेक्ट से 11517 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा।गौरतलब है कि यह प्रोजेक्ट सरकार के लिए कई तरीके से मायने रखते हैं। पहले तो यह कि यह प्रोजेक्ट इन इलाकों में है, जहां चीन भी कई बार दावा ठोकने की कोशिश करता है। दूसरा सीमा के पास चीन के निर्माण का भी यह एक तरह से जवाब है इसके अलावा 2030 तक 50% नॉन फॉसिल फ्यूल एनर्जी और 2070तक नेट जीरो का टारगेट पूरा करने में भी यह मददगार होगा। वर्तमान की बात करें तो अभी 70 फ़ीसदी बिजली कोयले से बनती है जबकि 25 प्रतिशत बिजली का उत्पादन ही नवीकरणीय संसाधनों से होता है।
प्राइवेट कंपनी से ठीका वापस लेकर सरकारी कंपनियों को दिया गया
पहले प्राइवेट कंपनियों को इन प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन फिर फंडिंग, विशेषज्ञता,भूमि अधिग्रहण और क्लीयरेंस ऐसे मामलों को लेकर यह काम पूरा नहीं हो पाया ।अब एनएचपीएस को कुल 3800 मेगा वाट एसजेवीएन को 5097 मेगावाट और निपको को 3620 मेगा वाट के प्रोजेक्ट का काम सौंपा गया है।
प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि की संभावना
ऊर्जा एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने एमओयू पर साइन करने के बाद कहा कि इससे राज्य की प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि होगी और यह महाराष्ट्र तथा गुजरात से आगे निकल जाएगा।सभी विकसित देश जैसी का अमेरिका,कनाडा और नार्वे के पास 80 से 90 फ़ीसदी तक की बिजली हाइड्रोपावर कैपेसिटी है। भारत में भी जल्द जलविद्युत की शक्ति बढ़ेगी।ये प्रोजेक्ट भूमि जलस्तर सुधारेंगे और इससे वनस्पतियां भी बढ़ेगी।

