बीरेंद्र कुमार झा
तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा का कहना है कि वह तिब्बतियों की समस्या पर चीन के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं।दिल्ली और लद्दाख की यात्रा से पहले धर्मशाला में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि चीनी ‘ आधिकारीक तौर पर या अनौपचारिक ‘ रूप से उनसे संपर्क करना चाहते हैं ।उन्होंने कहा मैं हमेशा बातचीत के लिए तैयार हूं। अब चीन को भी लगने लगा है कि तिब्बती लोगों का साहस बहुत मजबूत है। इसलिए तिब्बती समस्याओं से निपटने के लिए वे मुझसे संपर्क करना चाहते हैं। मैं भी तैयार हूं।
हम चीन का हिस्सा बने रहेंगे
दलाई लामा से यह पूछे जाने पर कि क्या वह चीन के साथ बातचीत फिर से शुरू करना चाहते हैं? दलाईलामा ने कहा कि हम आजादी की मांग नहीं कर रहे हैं। हमने कई वर्षों से तय किया है कि हम पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना का हिस्सा बने रहेंगे।अब चीन बदल रहा है।चीनी आधिकारिक तौर पर या अनौपचारिक रूप से मुझसे संपर्क करना चाहते हैं।
6 जुलाई को अपना 88 वा जन्म दिन मना चुके दलाई लामा ने कहा कि मैं तिब्बत में पैदा हुआ था और मेरा नाम दलाई लामा रखा गया था। लेकिन तिब्बत के हित के लिए काम करने के अलावा में सभी संवेदनशील प्राणियों के कल्याण के लिए काम कर रहा हूं।मैंने बिना उम्मीद खोए और बिना अपनी इच्छा शक्ति को गंवाए जो कुछ भी हो सकता था, वह किया है।
मैं चीनी अधिकारियों से नाराज नहीं हूं : दलाई लामा
दलाई लामा ने कहा मैं किसी से नाराज नहीं हूं यहां तक कि उन चीनी नेताओं से भी नहीं जिन्होंने तिब्बत के प्रति कठोर रवैया अपनाया है।दरअसल चीन ऐतिहासिक रूप से एक बौद्ध देश रहा है।जब मैंने उस भूमि का दौरा किया था तो मैंने वहां कई मंदिरों और मठों को देखा था।।दलाई लामा ने कहा कि तिब्बती संस्कृति और धर्म का ज्ञान बड़े पैमाने पर दुनिया को लाभान्वित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि तिब्बती संस्कृति और धर्म के भीतर ऐसा ज्ञान है जो दुनिया को लाभान्वित कर सकता है।हालांकि मैं अन्य अभी धार्मिक परंपराओं का सम्मान करता हूं, क्योंकि वह अपने अनुयायियों को प्रेम और करुणा के साथ रहने के लिए प्रोत्साहित करते हैं ।उन्होंने कहा मेरे कि मेरे स्वयं के सपनों के अनुसार में एक 100 वर्ष से अधिक जीवित रहने की आशा करता हूं। मैंने अब तक दूसरों की सेवा की है और मैं इसे जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हूं।कृपया इस आधार पर मेरी लंबी आयु के लिए प्रार्थना करें।
88 वें जन्मदिन पर पीएम मोदी ने दी बधाई
6 जुलाई को दलाई लामा ने अपना 88वा जन्म दिवस मनाया और धर्मशाला में अपने निवास के करीब मुख्य तिब्बती मंदिर प्रांगण का दौरा किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा को उनके जन्मदिन की बधाई दी और उनके लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना की।प्रधान मंत्री नरेंद्रमोदी ने एक ट्वीट में कहा कि उन्होंने दलाई लामा से बात की और उन्हें 88 वा जन्म दिन की शुभकामनाएं दी।
14वें दलाई लामा, तेनजिन ज्ञात्सो का जन्म 6 जुलाई 1935 को पूर्वी तिब्बत में हुआ था। तिब्बत में चीन सरकार की दमनकारी नीतियों के चलते उन्हें तिब्बत छोड़ना पड़ा था। वह 31 मार्च 1959 को भारत आ गए थे और तभी से दलाई लामा हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला के मैक्लोडगंज में रहकर तिब्बत की संप्रभुता के लिए अहिंसागसंघर्ष कर रहे हैं
