विशेषज्ञ समिति 15 जुलाई तक सौंप सकती है यूसीसी मसौदा रिपोर्ट ,उधर गुलाम नबी आजाद ने जताई असहमति !

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न्यूज़ डेस्क

सामान नागरिक संहिता को लेकर चल रही बहस के बीच एक बड़ी खबर यह मिल रही है कि सामान नागरिक संहिता पर बनी विशेषज्ञ समिति 15 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट को उत्तराखंड सरकार को सौप सकती है।  सूत्र की मानें तो, “समान नागरिक संहिता पर मसौदा रिपोर्ट 15 जुलाई तक उत्तराखंड सरकार को सौंपी जा सकती है। विशेषज्ञ समिति फिलहाल मसौदा रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में व्यस्त है।” सूत्रों के अनुसार, यूसीसी पर मसौदा रिपोर्ट के संबंध में समिति की एक और महत्वपूर्ण बैठक 9 जुलाई को दिल्ली में होगी।
           यह भी बताया गया कि समिति की रिपोर्ट तैयार करने के साथ-साथ सिफारिशों के समर्थन में प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों से जुड़े दस्तावेज और अनुलग्नक भी शामिल किए गए थे। सूत्र ने कहा, “समिति द्वारा रिपोर्ट के संकलन के साथ-साथ सिफारिशों के पक्ष में संबंधित कानूनी प्रावधानों से  संबंधित दस्तावेज और अनुलग्नक भी शामिल किए गए हैं। ये सभी दस्तावेज रिपोर्ट का हिस्सा होंगे।”
               उधर लॉ कमीशन ने भी देश की जनता और धार्मिक संगठनों से इस मुद्दे पर राय मांगी है।  इस बीच अब जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम और डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी के प्रमुख गुलाम नबी आजाद ने भी यूनिफॉर्म सिविल कोड पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सलाह दी है कि केंद्र सरकार को यूसीसी के बारे में नहीं सोचना चाहिए। क्योंकि इससे सभी धर्मों के लोग नाराज हो जाएंगे। 
           गुलाम नबी आजाद ने शनिवार को कहा कि ये अनुच्छेद 370 को निरस्त करने जितना आसान नहीं है। न केवल मुस्लिम, बल्कि इसमें सिख, ईसाई, आदिवासी, पारसी, जैन और भी हैं। एक ही समय में इतने सारे धर्मों को नाराज करना किसी भी सरकार के लिए अच्छा नहीं होगा और इस सरकार को मेरी सलाह है कि उन्हें ऐसा कदम उठाने के बारे में कभी नहीं सोचना चाहिए। 
               उधर  ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस कदम का विरोध किया है  इस मामले पर चर्चा के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, एनसीपी प्रमुख शरद पवार और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मुलाकात की थी। इसके बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता कहा था कि कांग्रेस ने आश्वासन दिया है कि जब यूसीसी संसद में बहस के लिए आएगा तो पार्टी उनकी चिंताओं पर संज्ञान लेगी। 

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