पटना: बिहार में जमीन, प्लॉट और फ्लैट के निबंधन की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। मद्यनिषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के सचिव नवीन कुमार ने मंगलवार को विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रमंडलीय पदाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए निबंधन कार्यों की विस्तृत समीक्षा की।
बैठक में पेपरलेस रजिस्ट्रेशन, वरिष्ठ नागरिकों के लिए होम रजिस्ट्रेशन, राजस्व संग्रह, स्थल निरीक्षण, राजस्व चोरी पर कार्रवाई और ऑनलाइन जन शिकायत व्यवस्था समेत कई मुद्दों पर अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए।
75 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों को घर पर रजिस्ट्री की सुविधा
बैठक में वरिष्ठ नागरिकों के लिए शुरू की गई होम रजिस्ट्रेशन सुविधा को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। पहले मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट के जरिए 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्गों को यह सुविधा दी जा रही थी। अब इस दायरे को बढ़ाकर 75 वर्ष या उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों तक कर दिया गया है।
इस व्यवस्था के तहत पात्र बुजुर्ग अपने घर पर ही भूमि, प्लॉट और फ्लैट आदि के दस्तावेजों का निबंधन करा सकेंगे। विभाग का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को निबंधन कार्यालय तक आने-जाने की परेशानी से राहत देना है।
17 अगस्त से पूरे बिहार में पेपरलेस रजिस्ट्रेशन का लक्ष्य
बिहार में निबंधन प्रक्रिया को कागजरहित बनाने की दिशा में भी तेजी से काम किया जा रहा है। राज्य के कुल 141 निबंधन कार्यालयों में चरणबद्ध तरीके से पेपरलेस निबंधन लागू किया जा रहा है।
पहले चरण में 10 कार्यालयों में 11 जुलाई 2026 से पेपरलेस रजिस्ट्रेशन शुरू हुआ। इसके बाद दूसरे चरण में 40 कार्यालयों में 30 जुलाई 2026 से यह व्यवस्था लागू की गई।
अब बाकी कार्यालयों में भी 17 अगस्त 2026 से पेपरलेस निबंधन पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
समीक्षा के दौरान जिन जिलों में पेपरलेस निबंधन की प्रगति उम्मीद के मुताबिक नहीं मिली, वहां तेजी लाने के लिए संबंधित जिलाधिकारियों को पत्र भेजने का निर्देश दिया गया। साथ ही, पहले से पेपरलेस व्यवस्था लागू कर चुके कार्यालयों में निबंधित दस्तावेजों और राजस्व प्राप्ति की स्थिति भी जांची गई।
ऑनलाइन होगी लोगों की शिकायत, लागू होगा Public Grievance Module
निबंधन विभाग में आम लोगों की शिकायतों के निपटारे को भी डिजिटल बनाने की तैयारी है। सचिव ने Public Grievance Module लागू करने का निर्देश दिया है।
इसके जरिए नागरिक अपनी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे। शिकायत की जांच, कार्रवाई और अंतिम निष्पादन की प्रक्रिया भी ऑनलाइन माध्यम से की जाएगी। इससे शिकायतों के निपटारे में तेजी आने के साथ-साथ पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
राजस्व बढ़ाने के लिए हर सप्ताह 10 जगहों का निरीक्षण
सरकार ने राजस्व संग्रह बढ़ाने और संभावित राजस्व चोरी पर लगाम लगाने के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की है।
सभी सहायक निबंधन महानिरीक्षकों (AIG) को हर सप्ताह 10 स्थलों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है। निरीक्षण के बाद इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजनी होगी।
इसके तहत संबंधित प्रमंडलीय मुख्यालय के अंतर्गत 5 स्थल, जिला निबंधन कार्यालयों में 3 स्थल और मुफस्सिल कार्यालयों में 2 स्थल, यानी कुल 10 स्थलों का निरीक्षण किया जाएगा। किन दस्तावेजों का स्थल निरीक्षण किया जाना है, इसका निर्धारण मुख्यालय स्तर से किया जाएगा।
GIS तकनीक से होगी स्थल जांच
स्थल निरीक्षण की प्रक्रिया में तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ाया जाएगा। सचिव ने पहले जारी निर्देशों के अनुरूप GIS तकनीक के माध्यम से स्थल निरीक्षण सुनिश्चित करने को कहा है।
इस संबंध में आवश्यक पत्र सभी जिला निबंधन कार्यालयों को उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया।
राजस्व चोरी मिली तो होगी कार्रवाई
सचिव ने राजस्व चोरी के मामलों में सख्त रुख अपनाने के निर्देश दिए। मुख्यालय स्तर पर भी टीम गठित कर निबंधन कार्यालयों में भेजने और स्थल निरीक्षण कराने की बात कही गई।
अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि नियमों का उल्लंघन अथवा राजस्व चोरी सामने आने पर प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी राजस्व के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
नीलामवाद के पुराने मामलों में वसूली तेज करने का निर्देश
बैठक में नीलामवाद से जुड़े लंबित मामलों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को बकाया वसूली की कार्रवाई में तेजी लाने को कहा गया। बड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के साथ-साथ छोटे मामलों का भी नियमों के अनुसार जल्द से जल्द निष्पादन करने का निर्देश दिया गया।
कोर्ट केस में समय पर विभाग का पक्ष रखने को कहा
विभाग से जुड़े न्यायालयी मामलों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अदालतों में विभाग का पक्ष समय पर और प्रभावी तरीके से रखा जाए।
इसके अलावा फील्ड स्तर से तैयार किए जाने वाले SOF यानी Statement of Facts की विभागीय स्तर पर अनिवार्य समीक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया।
सेवा प्रदाताओं की भी होगी प्रभावी मॉनिटरिंग
पेपरलेस निबंधन व्यवस्था को जमीन पर सफल बनाने में सेवा प्रदाताओं की भूमिका पर भी बैठक में चर्चा हुई। सचिव ने उनके लाइसेंस और कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए पेपरलेस प्रक्रिया की बेहतर मॉनिटरिंग करने को कहा।
तकनीकी या प्रक्रियागत दिक्कतों का जल्द समाधान करने और नागरिकों के बीच पेपरलेस रजिस्ट्रेशन को लेकर मौजूद भ्रम को दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए।
सेवा प्रदाताओं के लिए उचित बैठने की व्यवस्था उपलब्ध कराने की योजना बनाने पर भी जोर दिया गया, ताकि दस्तावेजों के निबंधन के दौरान आम लोगों को बेहतर सुविधा मिल सके।
सेवा प्रदाताओं के लिए पारिश्रमिक की दर भी तय
पेपरलेस पद्धति से दस्तावेजों के निबंधन में नागरिकों को सहयोग उपलब्ध कराने वाले अनुज्ञप्तिधारी सेवा प्रदाताओं के लिए पारिश्रमिक की दर भी निर्धारित की गई है।
1 लाख रुपये तक के दस्तावेज: 1,000 रुपये
1 लाख से अधिक और 5 लाख रुपये तक: 2,500 रुपये
5 लाख रुपये से अधिक मूल्य के दस्तावेज: 5,000 रुपये
कुल मिलाकर विभाग की इस समीक्षा बैठक में निबंधन व्यवस्था को डिजिटल, पेपरलेस, पारदर्शी और नागरिकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने के साथ-साथ सरकारी राजस्व की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया।

