पटना: बिहार में एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) यानी चमकी बुखार और जापानी इन्सेफलाइटिस (JE) की रोकथाम को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित राज्य कार्यबल (State Task Force) की उच्चस्तरीय बैठक में स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित विभागों की तैयारियों की समीक्षा की गई। बैठक में स्पष्ट संदेश दिया गया कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के मामले में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
12 जिलों में विशेष निगरानी, 15 PICU पूरी तरह सक्रिय
स्वास्थ्य विभाग ने बैठक में बताया कि राज्य के 12 सबसे अधिक प्रभावित जिलों—मुजफ्फरपुर, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, सारण, सीवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी और शिवहर—में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है।
इन जिलों में कुल 15 पीआईसीयू (PICU) क्रियाशील हैं। मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच में 100 बेड का विशेष PICU और 60 बेड का एन्सेफलाइटिस वार्ड पूरी तरह तैयार है। इसके अलावा जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी अतिरिक्त बेड आरक्षित किए गए हैं।
मरीजों के लिए 959 एम्बुलेंस तैनात
AES प्रभावित क्षेत्रों में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए 959 एम्बुलेंसों की व्यवस्था की गई है। इनमें बेसिक लाइफ सपोर्ट, एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस और मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के वाहन शामिल हैं।
सरकार ने निजी वाहन से मरीज को अस्पताल लाने वाले लोगों को तत्काल नकद भुगतान की सुविधा भी जारी रखने का फैसला किया है, ताकि इलाज में कोई देरी न हो।
सुबह 4 से 6 बजे तक डॉक्टरों की उपस्थिति अनिवार्य
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि AES के अधिकांश मामले सुबह 4 बजे से 6 बजे के बीच सामने आते हैं। इसलिए इस समय सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों तथा पैरामेडिकल कर्मियों की 100 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
इसके लिए ‘दर्पण प्लस ऐप’ और 104 हेल्पलाइन के माध्यम से निगरानी की जाएगी। ड्यूटी में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
गांव-गांव चलाया जाएगा जागरूकता अभियान
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री द्वारा पहले ही जागरूकता रथों को रवाना किया जा चुका है, जो गांवों में जाकर लोगों को चमकी बुखार के लक्षणों और बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। मुजफ्फरपुर समेत प्रभावित क्षेत्रों में ‘संध्या चौपाल’ के जरिए भी परिवारों को जागरूक किया जा रहा है।
कुपोषित बच्चों पर विशेष फोकस
मुख्य सचिव ने समाज कल्याण विभाग को निर्देश दिया कि आंगनबाड़ी सेविकाएं और आशा कार्यकर्ता कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र भेजें। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों पर ORS और पैरासिटामोल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा जरूरतमंद बच्चों को अतिरिक्त टेक-होम राशन दिया जाए।
स्कूलों, पंचायतों और जीविका समूहों की भी होगी भूमिका
AES रोकथाम अभियान में शिक्षा विभाग, पंचायत प्रतिनिधियों और जीविका समूहों को भी शामिल किया गया है। स्कूलों में ‘सुरक्षित शनिवार’ कार्यक्रम के तहत चमकी बुखार से बचाव की जानकारी दी जाएगी। वहीं पंचायत स्तर पर बैठकों और जागरूकता अभियानों के जरिए ग्रामीणों को सतर्क किया जाएगा।
पेयजल और स्वच्छता पर विशेष जोर
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) को प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों की जांच, चापाकलों की मरम्मत और नियमित क्लोरीनेशन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। सरकार का मानना है कि स्वच्छ पानी और बेहतर पोषण AES के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अस्पतालों का करेंगे खुद निरीक्षण
मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों और सिविल सर्जनों को निर्देश दिया कि वे नियमित रूप से अस्पतालों का निरीक्षण करें और रेफरल ट्रांसपोर्ट सिस्टम को पंचायत स्तर तक सक्रिय रखें, ताकि किसी भी बच्चे को समय पर इलाज मिल सके।
उन्होंने दो टूक कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और “कोई भी बच्चा भूखे पेट न सोए” के संकल्प को पूरी गंभीरता से लागू किया जाए।
AES और चमकी बुखार के खिलाफ सरकार ने इस बार स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण, पंचायत, पीएचईडी और पशुपालन विभागों को एक साझा रणनीति के तहत काम करने का निर्देश दिया है, ताकि बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

