मणिपुर की हालत ख़राब ,अब सेना ने राज्य में अफस्पा लगाने की मांग कर दी !

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न्यूज़ डेस्क 
मणिपुर की हालत कितनी ख़राब है कि इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भारतीय सेना और असम  राइफल्स की 123 टुकड़ियां तैनात होने के बाद भी हिंसक झड़पे नहीं रुक रही है। सेना भी हमले की शिकार हो रही है और वह गोली भी नहीं चला पीओए रही है। उग्रवादी होसक वारदात करके भाग निकलते हैं लेकिन सेना कुछ  पाती। सेना का काम केवल यहाँ कानून व्यवस्था को बनाये रखने तक  ही रह गया है। यह काम सेना बखूबी निभा भी रही है लेकिन हिंसा को रोक नहीं प् रही है। रात के अँधेरे में उग्रवादी हिंसक वारदात कर जाते हैं।              
 अब ऐसी स्थिति से निपटने के लिए सेना ने आर्म्ड फोर्स स्पेशल प्रोटेक्शन एक्ट यानी अफ्सपा की मांग की है।मणिपुर में अफस्पा ना होने की वजह से सेना मणिपुर में लॉ एंड ऑर्डर सम्भाल तो रही हैं लेकिन कोई एक्शन नहीं ले पा रही है। इसलिए इसकी मांग की जा रही है। मणिपुर में जारी जातीय हिंसा में करीब 140 लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 3000 लोग घायल हैं।    
बता दें कि अफ्सपा सेना, राज्य और केंद्रीय पुलिस बलों को हत्या करने, घरों की तलाशी लेने और किसी भी संपत्ति को नष्ट करने के लिए गोली मारने की परमीशन देता है, जिसका उपयोग गृह मंत्रालय द्वारा अशांत घोषित किए गए क्षेत्रों में विद्रोहियों द्वारा संभावित है। अफ्सपा  तब लागू किया जाता है जब आतंकवाद या विद्रोह का मामला होता है और भारत की क्षेत्रीय अखंडता खतरे में होती है।
               इस कानून के लागू होने के बाद सुरक्षा बल किसी व्यक्ति को उचित संदेह के आधार पर या जिसने संज्ञेय अपराध किया है या करने वाला है,बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है। यह सुरक्षा बलों को अशांत क्षेत्रों में उनके कार्यों के लिए कानूनी छूट भी प्रदान करता है। जबकि सशस्त्र बल और सरकार आतंकवाद और विद्रोह का मुकाबला करने के लिए अपनी आवश्यकता को सही ठहराते हैं, आलोचकों ने अधिनियम से जुड़े संभावित मानवाधिकार उल्लंघनों के मामलों की ओर इशारा किया है।
                इस कानून की जरुरत क्या है अगर आपके मन में यह सवाल उठ रहा है तो बता दें कि अभी जो सेना तैनात है उनको चाहे घर जले या लूट हो, इस स्थिति में केवल क़ानून व्यवस्था बनाये रखने के जिम्मा है। अगर सेना कोई एक्शन लेती है तो मजिस्ट्रेट की मौजूदगी जरूरी है, लेकिन इस समय के हालात में मजिस्ट्रेट मिलना बेहद मुश्किल हो रहा हैं। 63 टुकड़ियां जो अभी मणिपुर की इंफाल घाटी में तैनात हैं, उनके लिये मजिस्ट्रेट की मौजूदगी संभव नहीं है।
             हालत ऐसे नाजुक हैं कि पिछले 2 महीने से चीन बॉर्डर वाली रिज़र्व फ़ोर्स को भी मणिपुर में तैनात किया गया है। ताकि शांति आए, वहीं दूसरी तरफ़ आर्मी और असम राइफ़ल के ऑपरेशन में लोकल हथियार से लैस लोग मुसीबत बन रहे हैं। जगह-जगह आर्मी मूवमेंट को रोका जा रहा है।
            बता दें कि इस समय पुरे मणिपुर में हिंसा को काबू करने के लिए 40,000 सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है लेकिन फिर भी हालत ठीक नहीं हैं उसकी वजह पूरी सिस्टम का फेल होना बताया जा रहा है। 
           राज्य की हथियार रखने वाली जगह से 5300 हथियार लुट चुके हैं। इसमें से केवल 1000 के लगभग वापस मिलें हैं। हिंसक झड़प रुकने का नाम नहीं ले रही है।इसके अलावा 12 उग्रवादियों को भी सेना ने पकड़ा था, लेकिन महिलाओं की भीड़ ने इनको छुड़ा लिया। वो झुंड में आकर सेना के सामने खड़ी हो गायी और फिर झड़प के बाद सेना को इन्हें छोड़ना पड़ा। फिर एक दूसरे ऑपरेशन में 4 उग्रवादियों को पुलिस स्टेशन से छुड़वाया गया।
इन सभी हालातों को काबू करने के लिए सेना राज्य में आर्म्ड फोर्स स्पेशल प्रोटेक्शन एक्ट  की मांग रही है। 

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