कभी नक्सली कमांडर रही अनसुइया आज बनी तेलंगाना की कैबिनेट मंत्री 

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अखिलेश अखिल
तेलंगाना में कांग्रेस की पहली सरकार बनी। रेवंत रेड्डी बने कांग्रेस के पहले सीएम। रेड्डी की राजनीति तो बीजेपी से ही थी। रास नहीं आयी तो पार्टी बदल दी। फिर कांग्रेस में आये। कई साल तक कांग्रेस को सींचा और फिर राज्य के पार्टी अध्यक्ष बनाये गए। रेवंत अभी युवा ही है। 55 साल के हैं लेकिन जुझारू भी कम नहीं। जनता के बीच खासे चर्चित रहते हैं। युवाओं के बीच रहने में उन्हें मजा आता है। आज तेलंगाना में जिस कांग्रेस की जीत हुई है और सरकार बनी है उसमे युवाओं की भूमिका बड़ी है। रेवंत उन युवाओं के प्रेरणाश्रोत हैं। रेवंत अपर अब बड़ी जिम्मेदारी आ गई है। चुनाव के दौरान जनता से किये गए वादों को तो पूरा करना ही है साथ ही आगामी लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस को जीत दिलानी है इसका भी भार उन्ही के कन्धों पर। राहुल गाँधी ,प्रियंका गाँधी के वे दोस्त हो गए हैं। प्रजाला तेलंगाना की स्थापना करने की बात कांग्रेस ने की है । यानी जनता का तेलंगाना।    
             आज जब रेवंत शपथ ले रहे थे तो दो महिला विधायकों ने भी शपथ लिया। दोनों रेवंत कैबिनेट में शामिल हुई। एक का नाम काफी चर्चा में है। नाम है मुलुग सीट से जीतकर आई अनसुइया  सीताक्का। जब अनसुइया शपथ ले रही थी भीड़ से जयकारे लग रहे थे ,बड़ी संख्या में महिलाये नारे लगा रही थी और युवा भी। इस जयकारे में अनसुइया के आंसू भी निकल गए। शपथ ली और भरी आँखों से नीचे उतर गई। सबको नमन किया ,सोनिया गाँधी से मिली। राहुल गाँधी और प्रियंका से भी मिली। जनता को अभिवादन किया।  
             अनसुइया की कहानी कुछ फ़िल्मी जैसी ही है। युवा अवस्स्था में ही वह नक्सली बन गई थी। तब वह दसवीं कर रही थी। यह सब 1988 की बात है। नक्सलवाद के नारे लगाते -लगाते उसने अपने पति को भी खो दिया और भाई को भी।  सब मारे गए। लेकिन अनसुइया पीछे नहीं लौटी। वह तो नक्सलियों के बीच कमांडर बन चुकी थी।उसके रडार पर सामंती थे और वह खुद पुलिस के रडार पर थी। जंगल में रहकर ही उन्होंने गरीबो ,आदिवासियों को समझा। देखा। फिर उसकी सोंच ही बदल गई। वह नक्सल आंदोलन से तो हैट गई लेकिन उन्होंने गरीबो की सेवा का व्रत लिया। जंगल में अब वह गरीबो के साथ रहने लगी। उसके दुःख दर्द को बांटा और फिर उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ी।बाद में चंद्रबाबू ने उन्हें मुख्यधारा में लौटाया। वह टीडीपी से जुडी और विधायक भी बनी. मुलुग सीट से वह पहली बार विधायक बनी थी। यह भी 2009 की बात है। जब तेलंगाना बना तो वह टीडीपी से निकल गई और रेवंत के साथ ही कांग्रेस से जुड़ गई।              
          आदिवासी नेता सीताक्का का भी नाम तेलंगाना के मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल रहा। आज उन्होंने तेलंगाना कैबिनेट में मंत्री पद की शपथ ली। मुलुग सीट से उतरीं दनसारी अनसुया उर्फ सीताक्का ने 33,700 वोटों से चुनाव जीतकर यहां हैट्रिक लगाई है। मजे की बात तो यह है कि सार्वजनिक जीवन में भारी व्यस्तता के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। 2022 में कांग्रेस विधायक ने ओस्मानिया विश्विद्यालय से राजनीति विज्ञान में पीएचडी की डिग्री हासिल की। सीताक्का के पास 82 लाख रुपये की संपत्ति है। इनमें नकदी के रूप में उनके पास एक लाख रुपये हैं।

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