60 विधायकों ने बनायी दूरी, बिना मंच-लाउडस्पीकर धरना पर खूब गरजीं दीदी

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार और शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बीजेपी की नयी सरकार बनने के बाद सूबे की सियासत पूरी तरह बदली नजर आ रही है।तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यकर्ताओं पर कथित रूप से हो रहे हमलों, सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले और फेरीवालों को बेदखल करने के विरोध में मंगलवार को टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी कोलकाता की सड़क पर उतरीं।

हालांकि, इस पूरे विरोध प्रदर्शन के दौरान कोलकाता के एस्प्लेनेड (Esplanade) इलाके में भारी अफरा-तफरी और प्रशासनिक टकराव का माहौल देखने को मिला। पुलिस प्रशासन द्वारा कड़े प्रतिबंध लगाये जाने के बाद ममता बनर्जी को बिना किसी औपचारिक मंच और बिना माइक्रोफोन के ही धरने पर बैठना पड़ा। पार्टी के बागी 60 विधायकों ने उनके इस धरना-प्रदर्शन से दूरी बनाये रखी।

इस धरने का सबसे हैरान करने वाला पहलू कोलकाता पुलिस की कार्रवाई रही, जिसने अब तक सत्ता के शीर्ष पर रहीं ममता बनर्जी को सड़क पर संघर्ष करने के लिए मजबूर कर दिया। टीएमसी पहले मध्य कोलकाता के ऐतिहासिक रानी रासमनी रोड पर भव्य मंच बनाकर प्रदर्शन करने वाली थी, लेकिन कोलकाता पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देकर इसकी अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया।
ममता बनर्जी अपने समर्थकों के साथ एस्प्लेनेड के वाई-चैनल (Y-Channel) पर पहुंचींए सड़क पर ही चटायी बिछाकर बैठ गयीं।पुलिस ने मंच बनाने और बड़े लाउडस्पीकर (माइक्रोफोन) की अनुमति नहीं दी, तो ममता बनर्जी भड़क गयीं। उन्होंने हाथ में छोटा मेगाफोन (हैंडी लाउडस्पीकर) थामकर भीड़ को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने लोकतंत्र की हत्या की है।हमें कार्यकर्ताओं की आवाज उठाने के लिए एक मंच स्थापित करने और माइक्रोफोन तक इस्तेमाल नहीं करने दिया।

ममता बनर्जी इस धरने के जरिये भारतीय जनता पार्टी सरकार के खिलाफ चुनाव बाद हिंसा (Post-Poll Violence) का बड़ा नैरेटिव सेट करने की कोशिश कर रहीं थीं, लेकिन इस दौरान उनकी पार्टी के भीतर मचा आंतरिक विभाजन पूरी तरह सामने आ गया। धरने में ममता बनर्जी के साथ उनके पुराने सिपहसालार फिरहाद हकीम, मदन मित्रा, डेरेक ओब्रायन, कल्याण बनर्जी और डोला सेन जैसे लोग ही दिखे।

इस महा-धरने का सबसे बड़ा सच यह रहा कि हालिया चुनाव में टीएमसी के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे अधिकांश नये और युवा विधायक इस पूरे कार्यक्रम से दूर रहे।पार्टी की आंतरिक बैठक से गायब रहने वाले 60 बागी विधायकों को इस धरने में आने का सख्त निर्देश था, लेकिन उन्होंने टॉप लीडरशिप के निर्देश को दरकिनार कर दिया।इससे साफ हो गया है कि तृणमूल कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

वाई-चैनल पर आयोजित इस एक दिवसीय धरने के दौरान सुरक्षा-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गयी।पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जब मेगाफोन से अपनी बात रख रही थीं, तब कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ के कारण वहां जबरदस्त अफरा-तफरी मच गयी। कार्यकर्ताओं की अनियंत्रित नारेबाजी के चलते कई बार ममता बनर्जी को अपना भाषण बीच में ही रोकना पड़ा।

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