Bihar News: खानापूर्ति नहीं, जमीनी नतीजे चाहिए! कृषि मंत्री विजय सिन्हा ने अधिकारियों को दी सख्त चेतावनी, खुद गांवों में करेंगे जांच

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Bihar News: बिहार में कृषि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बुधवार को कृषि भवन में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में साफ शब्दों में कहा कि योजनाओं की सिर्फ खानापूर्ति नहीं, बल्कि किसानों तक उसका वास्तविक लाभ पहुंचना चाहिए और जमीनी स्तर पर परिणाम दिखने चाहिए।

पौधा संरक्षण संभाग और मिट्टी जांच प्रयोगशालाओं की समीक्षा के दौरान मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि फसलों में कीट प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं की लगातार निगरानी की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग की प्राथमिकता किसानों की आय बढ़ाना और कृषि उत्पादन को मजबूत बनाना है।

ड्रोन से छिड़काव की होगी वैज्ञानिक जांच

बैठक में ड्रोन आधारित कीटनाशी एवं तरल उर्वरक छिड़काव योजनाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। मंत्री ने कहा कि आधुनिक कृषि में ड्रोन तकनीक की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके परिणामों का वैज्ञानिक मूल्यांकन भी उतना ही जरूरी है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ड्रोन से किए गए प्रत्येक छिड़काव की जांच की जाए और यह अध्ययन किया जाए कि इसका फसलों और कीटों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम गठित करने का भी निर्देश दिया गया।

किसानों का वीडियो रिकॉर्ड होगा तैयार

कृषि मंत्री ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नया निर्देश देते हुए कहा कि ड्रोन छिड़काव के बाद संबंधित किसानों का वीडियो रिकॉर्ड तैयार किया जाए। इसके माध्यम से यह सत्यापित किया जाएगा कि निर्धारित क्षेत्र में वास्तव में छिड़काव हुआ है या नहीं।

उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी कार्यों का जमीनी सत्यापन सुनिश्चित किया जाएगा।

कीटनाशक दुकानों की होगी ग्रेडिंग

बैठक में मंत्री ने कीटनाशक दवा विक्रेताओं की दुकानों के लिए ग्रेडिंग सिस्टम विकसित करने का भी निर्देश दिया। इसके तहत दुकानों की गुणवत्ता, किसानों को दी जाने वाली सेवाओं और बिक्री व्यवस्था के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण कीटनाशी दवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और नकली या निम्न गुणवत्ता वाले उत्पादों पर रोक लगेगी।

पौधा संरक्षण योजनाओं पर खर्च हुए करीब 20 करोड़ रुपये

समीक्षा बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान पौधा संरक्षण से संबंधित विभिन्न योजनाओं पर 1,982.60 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। इनमें ड्रोन आधारित छिड़काव, कीट प्रबंधन, उपादान वितरण, पौधा संरक्षण परामर्श और पीपीपी मॉडल के तहत एरियल स्प्रे जैसी योजनाएं शामिल हैं।

मृदा स्वास्थ्य पर भी सरकार का फोकस

मिट्टी जांच प्रयोगशालाओं की समीक्षा करते हुए विजय सिन्हा ने कहा कि स्वस्थ मिट्टी ही बेहतर कृषि उत्पादन की आधारशिला है। उन्होंने बताया कि राज्य योजना के तहत मिट्टी जांच, बीज विश्लेषण एवं गुण नियंत्रण प्रयोगशालाओं के संचालन और सुदृढ़ीकरण पर वर्ष 2025-26 में 774.21 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।

वहीं राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता कार्यक्रम पर 5,062.84 लाख रुपये व्यय किए गए हैं।

खुद गांवों में जाकर करेंगे निरीक्षण

कृषि मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि वे स्वयं गांवों का दौरा करेंगे और मिट्टी जांच प्रक्रिया, प्रयोगशालाओं की कार्यप्रणाली तथा किसानों को मिल रहे लाभों का प्रत्यक्ष निरीक्षण करेंगे।

उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें ताकि कृषि योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचे और राज्य में कृषि उत्पादन तथा उत्पादकता में वृद्धि हो सके।

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