सीबीएसई ओएसएम मामले में सरकार का बड़ा एक्शन सामने आया है। सरकार ने सीबीएसई के चैयरमेन और सेक्रेटरी का ट्रांसफर कर दिया है। क्योंकि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ( CBSE ) का ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रयोग 12वीं के छात्रों के लिए एक बुरा सपना साबित हो रहा है। आंसर- शीट से लेकर री-वैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) की प्रक्रिया को भी संभालने में सीबीएसई नाकाम साबित होती दिख रही है। शिक्षा मंत्रालय ने सीबीएसई विवादित टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और बोर्ड के डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम में गंभीर कमियों को लेकर आंतरिक जांच शुरू कर दी है। सरकार ने भी इसे लेकर नई कमेटी बनाने का आदेश दिया है, जो इस पूरे मामले की जांच करेगी।
सूत्रों का कहना है कि सीबीएसई ने डिजिटल मूल्यांकन से जुड़े टेंडर मुद्दे पर अब तक जो सफाई दी थी, उससे सरकार पूरी तरह संतुष्ट नहीं है, इसलिए बोर्ड के ऑन स्क्रीन मार्किंग यानी ओएसएम सिस्टम से जुड़ी खरीद प्रक्रिया पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। साथ ही री-इवैल्यूएशन पोर्टल में जिन सुरक्षा खामियों की बात उठी थी, उनकी भी परत-दर-परत जांच का आदेश हुआ है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ कहा कि कार्रवाई होगी और जिम्मेदारी तय की जाएगी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है जो इसके लिए जवाबदेह हैं। जिम्मेदारी तय की जाएगी। सूत्रों ने संकेत दिया कि मंत्रालय का मानना है कि यह विवाद केवल कुछ अलग-थलग तकनीकी गड़बड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सिस्टम के भीतर गहरी प्रक्रियागत और निगरानी संबंधी लापरवाही की ओर भी इशारा कर सकता है।
दरअसल इस मामले की शुरुआत उस टेंडर से हुई, जो ओएसएम सिस्टम के लिए निकाला गया था। आरोप लगे कि बोली की कई चरणों में पात्रता नियम और तकनीकी शर्तें बदली गईं और आखिर में हैदराबाद की एक कंपनी को ठेका मिल गया। इसी बीच परीक्षा के बाद छात्रों की शिकायतें आने लगीं। किसी को उत्तरपुस्तिका धुंधली दिखी, किसी की कॉपी में पन्ने गायब थे, कहीं स्कैन की गई कॉपी मेल नहीं खा रही थी और री-इवैल्यूएशन के दौरान बार-बार तकनीकी गड़बड़ियां सामने आ रही थीं।
मामला बढ़ा तो विपक्षी नेताओं और विश्लेषकों ने सवाल उठाए कि कहीं शर्तें किसी खास कंपनी के पक्ष में ढीली तो नहीं की गईं। हालांकि सीबीएसई ने आरोपों से इंकार किया और कहा कि ठेका सामान्य वित्तीय नियमों और तय खरीद मानकों के तहत ही दिया गया। लेकिन विवाद यहीं नहीं रुका। कई लोगों ने सीबीएसई की डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था से जुड़े सिस्टम में कमजोरियां बताईं। मंत्रालय के अधिकारियों का मानना था कि खतरा इसलिए भी बढ़ गया क्योंकि सीबीएसई के पास उत्तरपुस्तिकाओं और परीक्षा रिकॉर्ड के लिए एक मजबूत व व्यापक डिजिटल रिपॉजिटरी ढांचा अभी तक नहीं है, जिससे संग्रहण और साइबर सुरक्षा—दोनों में गंभीर दिक्कत दिखती है।
मंत्रालय ने अब तकनीकी खामियों को दूर करने, पुनर्मूल्यांकन पोर्टल के आर्किटेक्चर का ऑडिट करने और साइबर सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के लिए IIT के विशेषज्ञों को इस काम में लगाया है। CBSE को निर्देश दिया गया है कि वह अपने सिस्टम को और अधिक मजबूत करे।
सीबीएसई की ओर से यह दावा किया गया कि 1 जून से रीवैल्यूएशन पोर्टल शुरू हो जाएगा। जिन 4 लाख छात्रों ने अपनी आंसर शीट की स्कैन कॉपी हासिल की है, वे अब वेरिफिकेशन के लिए आवेदन कर सकेंगे। क्वेश्चन के हिसाब से रीवैल्यूएशन हो सकेगा। लेकिन पोर्टल को लेकर छात्र परेशान रहे, तकनीकी दिक्कतें बरकरार रही हैं। छात्रों के पास आंसर शीट आ चुकी है और अब उन्हें तय करना है कि वे कौन से क्वेश्चन को मूल्याकंन करना चाहता है।
सीबीएसई ने उस पोर्टल को लेकर बड़ी तैयारी करने का दावा किया था। कहा जा रहा था कि पोर्टल को लॉन्च करने से पहले सिक्योरिटी ऑडिट होगा, परफॉर्मेंस ऑडिट होगी। दो आईआईटी कानपुर व मद्रास मदद कर रहे है। दोनों आईआईटी के निदेशक सीबीएसई में बैठे है। सब मिलकर काम कर रहे है। लेकिन अभी छात्रों की समस्याएं बरकरार हैं।

