बहरा होने से पहले कानों में दिखते हैं ये कई शुरुआती लक्षण, डॉक्टरों ने दी बड़ी चेतावनी

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अक्सर लोग मानते हैं कि सुनने की क्षमता कम होने का मतलब है कि व्यक्ति अचानक आवाजें सुनना बंद कर दे। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।ज्यादातर मामलों में सुनने की समस्या धीरे-धीरे शुरू होती है और शुरुआती संकेत इतने सामान्य लगते हैं कि लोग उन्हें उम्र, थकान या आसपास के शोर का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।यही वजह है कि कई लोगों को तब तक अपनी समस्या का एहसास नहीं होता, जब तक बातचीत करना मुश्किल न होने लगे।

यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन डेफनेस एंड अदर कम्युनिकेशन डिसऑर्डर्स के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ होने वाली सुनने की क्षमता में कमी धीरे-धीरे विकसित होती है और दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है।फोर्टिस हॉस्पिटल, मुलुंड, मुंबई में सीनियर कंसल्टेंट ईएनटी डॉ. संजय भाटिया का कहना है कि अगर शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए तो लंबे समय तक सुनने की क्षमता और लाइफ की क्वालिटी को बेहतर बनाए रखा जा सकता है।

सुनने की समस्या का पहला संकेत हमेशा आवाज का कम सुनाई देना नहीं होता। कई बार लोग सुन तो लेते हैं कि कोई बात कर रहा है, लेकिन शब्द साफ समझ नहीं आते। खासकर भीड़भाड़ वाली जगहों, पारिवारिक समारोहों या रेस्तरां जैसे माहौल में बातचीत समझना मुश्किल हो जाता है।डॉ. संजय भाटिया के अनुसार, यह शुरुआती सुनने की समस्या का एक सामान्य संकेत हो सकता है।

यदि आपको बार-बार लोगों से अपनी बात दोहराने के लिए कहना पड़ता है, तो यह भी चेतावनी का संकेत हो सकता है।शुरुआत में यह सामान्य लग सकता है, लेकिन जब यह आदत रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बन जाए तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार परिवार के सदस्य या दोस्त सबसे पहले इस बदलाव को नोटिस करते हैं।

एक और आम संकेत है टीवी, मोबाइल या रेडियो की आवाज लगातार बढ़ाना। अक्सर घर के दूसरे लोगों को आवाज बहुत तेज लगती है, जबकि सुनने में परेशानी महसूस कर रहा व्यक्ति उसे सामान्य मानता है।यह बदलाव धीरे-धीरे होता है, इसलिए कई लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं।

फोन पर बातचीत करने में कठिनाई भी सुनने की क्षमता कम होने का संकेत हो सकता है। आमने-सामने की बातचीत में चेहरे के हावभाव और होंठों की गतिविधि समझने में मदद करती है, लेकिन फोन पर केवल आवाज के आधार पर बात समझनी होती है। ऐसे में सुनने में हल्की कमी भी साफ नजर आने लगती है।

इसके अलावा कानों में लगातार घंटी बजने, भिनभिनाहट या सीटी जैसी आवाज सुनाई देना भी चिंता का विषय हो सकता है। इस स्थिति को टिनिटस कहा जाता है, जो कई बार किसी इम्प्लिसिट लिसनिंग समस्या का संकेत होता है. डॉ. संजय भाटिया चेतावनी देते हैं कि सुनने की समस्या को नजरअंदाज करना केवल कानों तक सीमित नहीं रहता। समय के साथ यह सामाजिक दूरी, निराशा, तनाव और अवसाद का कारण भी बन सकता है। इसलिए यदि ये लक्षण लगातार दिखाई दें तो एक्सपर्ट से सलाह लेना जरूरी है।

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