Nidal Hasan death penalty: अमेरिका में सेना के पूर्व मेजर निदाल हसन को 3 दिसंबर 2026 को फायरिंग स्क्वाड के जरिए मौत की सजा देने की योजना है। पेंटागन की ओर से इस सजा को इंटरनेट पर लाइव स्ट्रीम करने की घोषणा के बाद मामला अंतरराष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है। आलोचकों ने इस कदम की नैतिकता और कानूनी वैधता पर सवाल उठाए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भी इस योजना की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि इस तरह का प्रसारण क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक सजा के दायरे में आ सकता है।
कौन है निदाल हसन?
निदाल हसन अमेरिकी सेना में मेजर और मनोचिकित्सक रह चुका है। उसने 5 नवंबर 2009 को टेक्सास स्थित फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर गोलीबारी कर 13 सैनिकों की हत्या कर दी थी। इस हमले में 32 अन्य लोग घायल हुए थे। 2013 में सैन्य अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। हमले के दौरान घायल होने के बाद से वह व्हीलचेयर का इस्तेमाल करता है।
लाइव स्ट्रीमिंग पर क्यों उठ रहे सवाल?
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सार्वजनिक प्रसारण के समर्थन में इसे भविष्य में होने वाले हमलों को रोकने से जोड़कर देखा है। वहीं, आलोचकों का कहना है कि किसी की मौत को ऑनलाइन दिखाना सजा को तमाशे में बदल सकता है। इस बात पर भी चिंता जताई जा रही है कि बच्चों और अन्य दर्शकों को ऐसे हिंसक दृश्य देखने से रोकना मुश्किल होगा।
संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि मौत की सजा को कैमरों के सामने दिखाना सार्वजनिक मृत्युदंड जैसा होगा और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का उल्लंघन कर सकता है। प्रसारण किस प्लेटफॉर्म पर और किन पाबंदियों के साथ होगा, इस बारे में अभी सभी विवरण स्पष्ट नहीं हैं।
अमेरिका में सार्वजनिक मृत्युदंड का इतिहास
अमेरिका में सार्वजनिक रूप से मृत्युदंड देने की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। डेथ पेनल्टी इंफॉर्मेशन सेंटर के अनुसार, 1936 में केंटकी में रेनी बेथिया को बड़ी भीड़ के सामने फांसी दी गई थी। प्रस्तावित सैन्य मृत्युदंड 1961 के बाद अमेरिकी सेना की पहली ऐसी सजा होगी और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद फायरिंग स्क्वाड से दी जाने वाली पहली सजा होगी। हालांकि, कानूनी चुनौतियों के चलते तय तारीख में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

