विकास कुमार
पाकिस्तानी सेना ने अपने ही तीन अफसरों के खिलाफ एक्शन ले लिया है। दरअसल नौ मई को इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के दौरान सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले हुए थे। वहीं सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहने पर एक लेफ्टिनेंट जनरल सहित तीन अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया। इसके साथ ही तीन मेजर जनरल और सात ब्रिगेडियर पर भी कार्रवाई की गई है। सैन्य अदालतों में हिंसा करने वाले तकरीबन एक सौ दो लोगों पर मुकदमा चल रहा है। सेना ने इस घटना को देश के इतिहास में एक काला अध्याय बताया है।
पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता डीजी आईएसपीआर मेजर जनरल अहमद शरीफ़ चौधरी ने ये जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नौ मई को हुई हिंसक घटनाओं पर चल रही सेना की जांच पूरी हो गई है। बर्खास्त किए गए अधिकारियों पर नौ मई के दिन सैन्य प्रतिष्ठानों की रक्षा की ज़िम्मेदारी थी। फ़ौज के अंदर दो इन्क्वायरी की गई जिसके बाद एक विस्तृत कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी में फ़ैसला किया गया कि, एक लेफ्टिनेंट जनरल समेत तीन अफसरों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाए। इसके अलावा तीन मेजर जनरल और सात ब्रिगेडियर सहित 15 अफसरों के ख़िलाफ़ सख़्त एक्शन लिया गया है। पाकिस्तानी सेना और सैन्य नेतृत्व नौ मई की घटना से अवगत है। और फ़ौज के अंदर जवाबदेही की प्रक्रिया मौजूद है जो बिना किसी भेदभाव के पूरी की जाती है। जितना बड़ा पद होता है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। फ़ौजी अदालतों में 102 उपद्रवियों का ट्रायल किया जा रहा है और ये प्रक्रिया जारी है।
नौ मई को इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सैन्य प्रतिष्ठानों और सरकारी इमारतों पर हमले कर दिए थे। जिन्ना हाउस,मियांवाली एयरबेस,आइएसआइ बिल्डिंग और रावलपिंडी स्थित सेना के मुख्यालय पर हमला हुआ था। अब जाकर पाकिस्तानी सेना ने इन हमलों पर जवाबदेही तय की है। हालांकि चर्चा ये है कि इमरान समर्थक अफसरों को सेना से चुन चुन कर बर्खास्त किया गया है।

