UPI टैक्स’वापस लो,इंदिरा गांधी की बात याद दिलाकर राहुल का पीएम मोदी पर तीखा तंज

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UPI पर नए शुल्क ढांचे को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच सियासी तकरार तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नए UPI चार्ज को वापस लेने की मांग की। राहुल गांधी ने इसे ‘UPI Tax’ बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार के इस फैसले का असर देश के आम लोगों पर पड़ेगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किए गए वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री से इसे तत्काल वापस लेने की अपील की।

राहुल गांधी ने अपने बयान में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी से एक बार पूछा गया था कि वह राजनीति में बाईं ओर हैं या दाईं ओर। इसके जवाब में इंदिरा गांधी ने कहा था कि वह न बाईं ओर हैं और न दाईं ओर, बल्कि सीधे खड़ी हैं। राहुल गांधी ने इसी संदर्भ को प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसने के लिए इस्तेमाल किया।

राहुल गांधी ने अपने बयान में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी से एक बार पूछा गया था कि वह राजनीति में बाईं ओर हैं या दाईं ओर। इसके जवाब में इंदिरा गांधी ने कहा था कि वह न बाईं ओर हैं और न दाईं ओर, बल्कि सीधे खड़ी हैं। राहुल गांधी ने इसी संदर्भ को प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसने के लिए इस्तेमाल किया।

राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने UPI पर शुल्क लगाकर हर भारतीय पर टैक्स लगा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नई व्यवस्था से अमेरिका को भी बड़ी रकम मिलने का रास्ता बनेगा। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से UPI पर लगाए गए नए शुल्क को वापस लेने की मांग की और सरकार की इस नीति पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने अपने बयान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी जिक्र किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिका और ट्रंप के सामने झुकने का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने कहा कि इंदिरा गांधी ने कभी अपनी राजनीति को बाएं या दाएं खेमे से जोड़ने के बजाय सीधे खड़े रहने की बात कही थी, जबकि प्रधानमंत्री मोदी को लेकर उन्होंने अलग टिप्पणी की।

नए ढांचे के तहत कुछ निर्धारित व्यापारी लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू किया गया है। ₹2,000 से अधिक के कुछ व्यापारी UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR का प्रावधान किया गया है। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 प्रति लेनदेन तक सीमित रहेगा। हालांकि, सरकार के अनुसार यह शुल्क सीधे ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा।

केंद्र सरकार का कहना है कि MDR को ‘UPI Tax’ कहना सही नहीं है। सरकार के मुताबिक यह शुल्क व्यापारी लेनदेन से जुड़े भुगतान तंत्र में लागू होगा और ग्राहक पर सीधे MDR नहीं लगाया जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI भुगतान पर शुल्क नहीं लगाया गया है।

कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए UPI के संचालन की लागत को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। पार्टी ने दावा किया कि UPI को चलाने के लिए हर साल करीब ₹20,700 करोड़ की जरूरत है। कांग्रेस ने वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों का हवाला देते हुए RBI से केंद्र को हुए करीब ₹3 लाख करोड़ के सरप्लस ट्रांसफर, देश के सूचीबद्ध बैंकों के ₹4.11 लाख करोड़ से अधिक के मुनाफे और NPCI के ₹1,888 करोड़ के प्री-टैक्स मुनाफे का उल्लेख किया।

कांग्रेस ने अपने पोस्ट में दावा किया कि RBI की ओर से सरकार को दिए जा रहे सरप्लस का केवल 7.2 प्रतिशत हिस्सा UPI के संचालन की लागत को पूरा करने के लिए पर्याप्त हो सकता है। पार्टी ने इसी आधार पर सवाल उठाया कि जब सरकार के पास वित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं तो UPI पर MDR लगाने की जरूरत क्यों पड़ी।

कांग्रेस ने अगस्त में लाए गए टैक्स संबंधी संशोधन विधेयक का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि इसके जरिए मुफ्त UPI लेनदेन पर MDR लगाने का रास्ता तैयार किया गया। पार्टी ने दावा किया कि 6 अगस्त को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने MDR पर कोई फैसला नहीं होने की बात कही थी और 10 अगस्त को सदन में भी कहा गया था कि MDR का कोई अंतिम ढांचा तय नहीं हुआ है। कांग्रेस के मुताबिक इसके बाद 14 सितंबर को MDR से जुड़ा नोटिफिकेशन जारी किया गया।

UPI शुल्क का मुद्दा अब आर्थिक व्यवस्था से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। राहुल गांधी और कांग्रेस जहां इसे आम लोगों और डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर संभावित बोझ से जोड़ रहे हैं, वहीं सरकार का कहना है कि MDR सीधे ग्राहकों से वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है। इसी अंतर को लेकर दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।

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