बचेगा 50% सीमेंट और ईंटें,प्लास्टिक की बोतलों से बनेंगे भविष्य के मकान

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दुनिया लगातार बढ़ रहे प्लास्टिक के कचरे खासकर प्लास्टिक की बोतलों से परेशान है, ऐसे में शायद ही किसी ने सोचा हो कि ये प्लास्टिक की बोलतें भविष्य के घरों का आधार बन सकती है। दरअसल एक जर्मन बिल्डर ने इसी प्लास्टिक के कचरे को मजबूत आशियाने में बदलने की तकनीक खोज निकाली है। दरअसल होंडुरास के एंड्रियास फ्रोइस ने प्लास्टिक की बोतलों को ठोस ईंटों में तबदील करने की तकनीक विकसित की है, जिसकी मदद से न सिर्फ सीमेंट और ईंटों की बचत होती है बल्कि सीमेंट और कंक्रीट से ज्यादा मजबूत घर भी बन पाता है।

एंड्रियास फ्रोइस प्लास्टिक की बोतलों को ठोस ईंटों में बदलने की तकनीक न सिर्फ मकान बनाने की लागत को आधी करने में सक्षम है बल्कि 300 साल की मजबूती का भरोसा भी देती है।
जर्मन बिल्डर फ्रोइस ने अपने इलाके में होने वाले आयोजनों के बाद फेंकी जाने वाली बोतलों को देखते हुए इस तकनीक को विकसित करने का सोचा। उन्होंने महसूस किया कि ये बोलतें बेकार रहें, तो पर्यावरण के नुकसानदायक हैं और वहीं अगर इन्हें इस्तेमाल होने लायक बना दिया जाए, तो कई लोगों की परेशानी हल हो सकती है।

इसके बाद ही फ्रोइस ने बोतलों को ईंटों में बदलने की तकनीक पर काम करना शुरू किया।
फ्रोइस ने बहुत ही आसान तरीके से प्लास्टिक की बोतलों को सुपर ईंट में बदलने की तकनीक खोजी। इसके लिए उन्होंने प्लास्टिक की बोतलों में सूखी रेत को इस कदर कसकर भरने वाली मशीन बनाई कि बोतलों का लचीलापन खत्म हो जाता है और वह पत्थर जैसी ही एक चीज में तब्दील हो जाती हैं।
इन बोतलों से घर या कोई जगह बनाने के लिए इन्हें एक क्रम में सलीके से रखा जाता है और नायलॉन की रस्सियों से बांधा जाता है।
इसके बाद सीमेंट और रेत के गारे से इनकी चिना कर दी जाती है। इस तरह से बोतलों से बनने वाली संरचना के 70% हिस्से में बोतलें इस्तेमाल होती हैं।
यह ढांचा अपने ऊपर 36 टन वजन वाली छत को भी आसानी से संभाल सकता है।​

इस तकनीक का इस्तेमाल इको-फ्रेंडली संरचनाओं को बनाने में हो रहा है। इस तकनीक की वजह से नॉर्मल ईंट-सीमेंट वाले मकान की तुलना में निर्माण 50% सस्ता पड़ता है।

इसका इस्तेमाल मकानों के अलावा 3,500 लीटर तक की क्षमता वाले पानी के टैंक बनाने, कैंपिंग इग्लू और कंपोस्टिंग टॉयलेट बनाने में भी हो रहा है। एक्सपर्ट्स ने इस तकनीक से बने ढांचों की उम्र 300 साल तक आंकी है।

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