अविश्वास प्रस्ताव के बहाने राहुल का हमला, प्रधानमंत्री मोदी क्या जवाब देंगे ?

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अखिलेश अखिल
अब कहने को बचा ही क्या है ? मणिपुर की जो हालत है उसकी तस्वीर तो पहले ही सुप्रीम कोर्ट में दर्ज हो चुकी है। शीर्ष अदालत टिप्पणियों को ही समझिये तो साफ़ है कि मणिपुर में सत्ता ,शासन और व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं बची है। आगे का खुलासा और भी होना है। तीन जजों की जो जांच शुरू हुई है उसकी कहानी अभी और आगे बढ़ेगी। लेकिन सबसे मजे की बात तो यह है कि संसद में फिर से राहुल गाँधी ने अपने तेवर से जाता दिया कि अब वे आर पार की लड़ाई की मूड में हैं। राहुल ने क्या कुछ नहीं कहा ? बचा ही क्या रह गया ? अपने आधा घंटे के भाषण में राहुल ने जो कुछ भी कहा सरकार को भारी पड़ता गया। बाद में गृह मंत्री अमित शाह ने भी मणिपुर के बारे में बहुत कुछ कहा लेकिन अभी तक यह पता नहीं चला कि आखिर मणिपुर में गृहयुद्ध की स्थिति कैसे आ गई ? शायद प्रधानमंत्री इस बारे में कुछ बोल पाएं!     
बता दें कि राहुल गांधी ने आज लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में बोलते हुए कहा कि बीजेपी ने आज पूरे देश पर केरोसिन फेंक दिया है। मणिपुर पर फेंका, वहां आग लगा दी, हरियाणा पर छिड़का, वो भी जल रहा है। पूरे देश को जलाने में लगे हैं! ये भारत मां के रखवाले नहीं, भारत मां के हत्यारे हैं!         
        राहुल पुरे रौ में थे। आगे उन्होंने कि प्रधानमंत्री का अहंकार पूरे देश को जला रहा है। लंका को भगवान हनुमान ने नहीं, बल्कि रावण के अहंकार ने जलाया था। और इसी तरह, प्रधानमंत्री मोदी का अहंकार भारत को जला रहा है और नष्ट कर रहा है। बीजेपी मणिपुर से लेकर हरियाणा तक पूरे देश में आग लगा रही है। बीजेपी ने मणिपुर में हिंदुस्तान की हत्या की है।           
       राहुल के इस भाषण के बाद पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राहुल गांधी के जोरदार भाषण की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने लोकसभा में भारत की आवाज रखी है। खड़गे ने कहा कि मणिपुर हिंसा को झेल रहे हमारे अपने भाई-बहन बीजेपी की संवेदनहीनता को भुगत रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के मंत्रीगण इधर-उधर की बात कर रहें हैं, पर ये नहीं बता रहें हैं कि हिंसा कैसे हुई, इसे क्यों फैलने दिया गया?”
                     राज्यसभा में विपक्ष के नेता खड़गे ने सवाल किया कि आखिर प्रधानमंत्री ने शांति की अपील क्यों नहीं की, वहां जा कर लोगों से उनका दुःख दर्द क्यों नहीं पूछा? खड़गे ने पूछा कि क्या मोदी सरकार को जनता के दुख-दर्द से कोई लेना-देना नहीं है? क्या उनकी सारी राजनीति सिर्फ वोट पाने के लिए है?
    अब नहीं लगता कि प्रधानमंत्री मोदी को कहने के लिए कुछ बचा है। विपक्ष ने सरकार को मणिपुर पर नंगा कर दिया। अदालत की नजर में मणिपुर सरकार की क्या हैसियत रह गई है यह भी सब जान गए। गृह मंत्री शाह कह रहे हैं कि मणिपुर का सीएम बेहतर काम कर रहे हैं लेकिन क्या देश की जनता के साथ ही मणिपुर के लोग भी शाह की बातों को सही मान रहे हैं ? सच तो यही है कि बीजेपी किसी भी सूरत में मणिपुर सरकार को कुर्बान करना नहीं चाहती। और मजे की बात तो यही है कि उसी मणिपुर में अब असम राइफल्स और मणिपुर पुलिस के बीच जो टकराव सामने आये हैं वह देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी घातक है। कौन जवाब देगा इन सवालों का ? क्या प्रधानमंत्री मोदी अपने शब्दों के सब्जबाग से देश की जनता के मन में उठ रहे सवाल का जवाब दे सकेंगे ?

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