महाराष्ट्र के बाद कर्नाटक की बारी ,येदियुरप्पा और कुमारस्वामी के बयान से मची खलबली !

0
597


अखिलेश अखिल 

क्या महाराष्ट्र के बाद कर्नाटक की बारी है ? जिस तरह के बयान बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने दिया है उससे तो यही लगता है कि बहुत जल्द ही महाराष्ट्र जैसा खेला कर्नाटक कांग्रेस में भी हो सकता है। येदियुरप्पा के बयान से जेडीएस नेता कुमारस्वामी भी सहमति जता रहे हैं। हालांकि महाराष्ट्र एनसीपी की घटना के बाद पहले कुमारस्वामी ने ही बयान दिया था। उन्होंने कहा है कि महीने भर के भीतर महाराष्ट्र की तरह ही कर्नाटक में भी बड़ा उलटफेर होगा। इसके बाद बीजेपी नेता येदियुरप्पा ने कहा कि कर्नाटक में कुछ भी हो सकता है। इसमें अब ज्यादा समय नहीं लगेगा।               

             बीजेपी और जेडीएस के इन दोनों बड़े नेताओं के बयान के बाद दिल्ली से कर्नाटक तक खलबली मच गई है। कहा जा रहा है कि अगर कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार गिर गई तो देश की राजनीति ही बदल जाएगी। कहा तो यह भी जा रहा है कि क्या बीजेपी अब इसी तरह का खेला करने को तैयार है ? बीजेपी के इतिहास को देखें तो जो बातें कही कही जा रही है उसपर आश्चर्य भी नहीं होना चाहिए।  
              बता दें कि तीन जुलाई को जेडीएस नेता कुमारस्वामी ने कहा कि ‘महाराष्ट्र में चौंकाने वाले घटनाक्रम के बाद, मुझे आशंका है कि कर्नाटक में अजित पवार के रूप में कौन उभरेगा?’ उन्होंने कहा, इसमें ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। सालभर के भीतर ही कांग्रेस की सरकार गिर जाएगी। मैं ये नहीं बताऊंगा कि यहां अजित पवार कौन होगा… लेकिन यह जल्द ही होगा।’ इसके बाद चार जुलाई को पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता बीएस येदियुरप्पा  कहा, ‘एचडी कुमारस्वामी जो भी कह रहे हैं वो एकदम सच है और मैं उनके बयान का समर्थन करना चाहता हूं। भविष्य में कुमारस्वामी और हम साथ मिलकर लड़ेंगे।’
         इसके कुछ ही देर बाद बीएस येदियुरप्पा ने मीडिया में एक और बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया, ‘कर्नाटक में कांग्रेस की भ्रष्ट सरकार के खिलाफ मैं एचडी कुमारस्वामी के साथ मिलकर लड़ने के लिए तैयार हूं, इस पर केवल हमारे केंद्रीय नेतृत्व को अनुमति देनी है।’
    यह बयान कोई ऐसे ही नहीं है। हालांकि जेडीएस और बज के नेता ने किसी का नाम नहीं लिया है लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि सिद्धरमैया और डी शिवकुमार के बीच जो कुछ भी चल रहा है उससे बीजेपी इसका लाभ उठा सकती है। हालांकि अभी कर्नाटक सरकार में किसी भी तरह की आंतरिक खींचतान नहीं है लेकिन राजनीति में कब कौन सा मुद्दा बन जाए या बना दिया जाए यह कोई नहीं जनता।      
     224 सदस्यों वाली कर्नाटक विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 113 का है। इस वक्त भाजपा के 66 और जेडीएस के 19 विधायक हैं। दोनों मिलकर भी कुल 85 के आंकड़े तक पहुंचेंगे। यह आंकड़ा 113 का काफी कम है। ऐसे में भाजपा और जेडीएस का गठबंधन होने से भी कांग्रेस सरकार को कोई खास खतरा नहीं हैं।
               कर्नाटक में कांग्रेस के पास 135 विधायक हैं। एक निर्दलीय विधायक ने भी अपना समर्थन दिया है। यहां सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी के पास 113 विधायकों का समर्थन चाहिए होता है। मतलब कांग्रेस के पास अभी बहुमत के आंकड़े से 23 सीटें अधिक हैं।  महाराष्ट्र में जिस तरह का बिखराव शिवसेना के साथ हुआ वैसी टूट के लिए कम से कम 90 विधायकों को बागी खेमे में आना होगा। तभी बागी गुट के विधायक दल-बदल कानून से बच पाएंगे।
                  लेकिन कई जानकार यह कह रहे हैं कि कर्नाटक में पहले जो हुआ चुका है वैसी स्थिति तो खड़ा हो सकती है। 2018 में हुए राज्य विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन की सरकार बनी थी। कुमारस्वामी राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। एक साल बाद ही कांग्रेस और जेडीएस के कई विधायकों ने बगावत कर दी। बागी विधायकों के इस्तीफे की वजह से कुमारस्वामी सरकार अल्पमत में आ गई थी। इसके बाद कुमारस्वामी को इस्तीफा देना पड़ा। और राज्य में भाजपा की सरकार बनी। बागियों ने बाद में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। ज्यादातर को जीत मिली। साथ ही राज्य में भाजपा की सरकार बरकरार रही। अगर कांग्रेस के करीब 58 विधायक इस्तीफा दे दे तो खेल हो सकता है। लेकिन यह सब इतना आसान भी तो नहीं। 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here