बीरेंद्र कुमार झा
रांची में आदिवासी अधिकार मंच के बैनर तले आदिवासी सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने यूनिफॉर्म सिविल कोड यूसीसी के विरोध में राजभवन के समक्ष एक दिवसीय धरना दिया। धरना प्रदर्शन के माध्यम से आदिवासियों ने यूसीसी लागू हो जाने से आदिवासियों के सामने आने वाली परेशानियों पर चिंता व्यक्त की। धरना प्रदर्शन में पूर्व मंत्री गीताश्री उराओं भी मौजूद थी।बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि यूसीसी लागू करना बीजेपी के चुनावी एजेंडे में शामिल है।जब जब चुनाव की बारी आती है तब यह मुद्दा गरम हो जाता है।इस समय एक बार फिर से यूसीसी का यह मुद्दा पूरे देश में गर्म है।
यूसीसी आदिवासियों के अस्तित्व पर बड़ा खतरा
आदिवासी नेताओं का कहना है कि अगर केंद्र सरकार यूसीसी लागू करती है तो इससे आदिवासियों के विशेष अधिकारों का हनन होगा। आदिवासियों को संविधान में विशेष अधिकार मिला है। हिंदू मैरिज एक्ट के तहत आदिवासियों की शादी नहीं होती है।संबंध विच्छेद में भी आदिवासियों में अलग अलग तरीका अपनाया जाता है। हमारे यहां सामाजिक तौर पर इसका निपटारा होता है।अगर यूसीसी पूरे देश में लागू हो जाएगा तो आदिवासियों का न सिर्फ विशेषाधिकार खत्म होगा बल्कि हमारा अस्तित्व भी खतरे में आ जायेगा।
यूसीसी के द्वारा अपना हक नहीं छीनने देंगे
आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ताओं का यह भी कहना है कि आदिवासियों की परंपरा जल जंगल जमीन से जुड़ी हुई है। यूसीसी लागू कर केंद्र सरकार आदिवासियों का हक नहीं छीन सकती। यह हमारे लिए अधिकार की लड़ाई है। हम किसी भी कीमत में इस लड़ाई में पीछे नहीं हटेंगे। गौरतलब है कि भारत सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए भारतीय विधि आयोग द्वारा सुझाव और विचार मांगा जा रहा है। ऐसे में आदिवासियों का कहना है कि यूसीसी आदिवासी समुदाय को दिए गए विशेषाधिकार का हनन है।

