बीरेंद्र कुमार झा
अडानी मामले को लेकर दिए गए अपने एक इंटरव्यू के कारण अपनों के बीच ही फंसे शरद पवार ने इसे लेकर सफाई दे दी है। दिल्ली में रखी गई एक प्रेस वार्ता में एनसीपी प्रमुख ने इस मामले पर कहा कि मेरा इंटरव्यू अडानी पर नहीं था, मुझसे कुछ सवाल उन्हें उन्हें लेकर किए गए थे। इस दौरान उन्होंने इस पर भी बात की, कि आखिर वह जेपीसी क्यों नहीं चाहते हैं? एनसीपी प्रमुख ने कहा कि जेपीसी में सत्ताधारी दल का वर्चस्व होगा और इसलिए सच्चाई सामने नहीं आएगी। इसलिए वह जेपीसी नहीं चाहते हैं।
हमारी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है असर
एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने हिंडनबर्ग की उस रिपोर्ट पर निशाना साधा था, जिसमें गौतम अडानी को लेकर कई आरोप लगाए गए हैं।शरद पवार ने कहा था कि ‘उस शख्स ने पहले भी ऐसे बयान दिए थे और तब भी सदन में कुछ दिन हंगामा हुआ था। लेकिन इस बार जरूरत से ज्यादा तवज्जो इस मुद्दे को दे दी गई है। वैसे भी जो रिपोर्ट आई, उसमें दिए बयान किसने दिए, उसका क्या बैकग्राउंड है ? जब वो लोग ऐसे मुद्दे उठाते हैं, जिनसे देश में बवाल खड़ा हो तो इसका सीधा असर हमारी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। लगता है कि ये सबकुछ किसी को टारगेट करने के लिए किया गया था।
हिंडनबर्ग पर बोले शरद पवार
शरद पवार के शुक्रवार के बयान को जब ‘विपक्षी एकता में दरार’ के तौर पर देखा जाने लगा,तब शनिवार को एनसीपी प्रमुख ने अपनी बात फिर से रखी । उन्होंने कहा कि, मुझे नहीं पता कि हिंडनबर्ग क्या है, एक विदेशी कंपनी इस देश के एक आंतरिक मामले पर स्टैंड ले रही है तो हमें सोचना चाहिए कि एक’हैट कंपनी’ को हमें कितना महत्व देना चाहिए।
शरद पवार क्यों नहीं चाहते हैं जेपीसी?
शरद पवार ने कहा कि जेपीसी की बात सभी विपक्ष ने कही है। यह सच है।हमारी पार्टी भी इसमें शामिल है, यह भी सच है. लेकिन जेपीसी के गठन में 21 लोग होंगे और उनमें से 15 लोग रूलिंग पार्टी के होंगे. विपक्ष के सिर्फ 5- 6 लोग ही होंगे तो क्या वे सच्चाई सामने लाएंगे। इसीलिए मेरा कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी फॉर्म करने का जो दूसरा विकल्प दिया है, वह ज्यादा ठीक है।उन्होंने कहा कि ‘मैंने ऐसा नहीं कहा कि अडानी की आलोचना मत करो, लेकिन बेरोजगारी, कृषि संबंधी मुद्दे और मूल्य वृद्धि, ये 3 प्रमुख मुद्दे देश के सामने हैं , विपक्ष को मुख्य रूप से इस बारे में सोचना चाहिए। मेरी पार्टी ने जेपीसी का समर्थन किया है, लेकिन मुझे लगता है कि जेपीसी में सत्ताधारी दल का वर्चस्व होगा और इसलिए सच्चाई सामने नहीं आएगी।इसलिए मुझे लगता है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाला पैनल सच्चाई सामने लाने का एक बेहतर तरीका है।
मुझे जो सही लगा वो कहा: शरद
मेरे जैसे व्यक्ति को काफी सोच- समझकर हिंडनबर्ग जैसी कंपनी पर प्रतिक्रिया देनी चाहिए, लेकिन मैं हिंडनबर्ग के बारे में ज्यादा नहीं जानता।पता नहीं कौन कहता है कि मेरे इस बयान से 2024 में विपक्ष की एकता पर असर पड़ेगा।मुझे जो सही लगा मैंने कहा।विपक्षी एकता के बारे में हमने अभी सभी विपक्षी दलों की एक संयुक्त बैठक की थी और हमने वहां सभी मुद्दों पर चर्चा की थी। कुछ ऐसे मुद्दे थे जिन पर हम सभी सहमत नहीं थे।बैठक में सभी ने अपने अपने विचार रखे
शरद पवार को क्यों देनी पड़ी सफाई?
जेपीसी और अडानी मामले को लेकर शरद पवार का ये बयान उस समय आया जब सदन में 19 विपक्षी पार्टियों ने अडानी मुद्दे को जमकर उठाया और मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। उस समय शरद पवार का कुछ इस तरह से अलग स्टैंड ले लेना,कई तरह के सवाल खड़े कर गया। इस समय एनसीपी विपक्ष की एक बड़ी पार्टी है और शरद पवार उसके प्रमुख हैं। ऐसे में उनकी अहमियत और ज्यादा बढ़ जाती है।महा विकास अघाड़ी में तो वो कांग्रेस के साथ खड़ी है। उस स्थिति में कांग्रेस से ही अलग स्टैंड रखना कई तरह के संकेत दे गया था।
जयराम रमेश ने दिया ये बयान
इस विवाद पर कांग्रेस की तरफ से भी एक बयान जारी किया गया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि एनसीपी का अपना कोई भी स्टैंड हो सकता है, लेकिन 19 विपक्षी पार्टियां ये मानती हैं कि अडानी मुद्दा गंभीर है। मैं ये भी साफ करना चाहता हूं कि एनसीपी और दूसरे विपक्षी दल हमारे साथ ही खड़े हैं। सभी साथ मिलकर लोकतंत्र को बचाना चाहते हैं और बीजेपी की बंटवारे वाली राजनीति को हराना चाहते हैं। अडानी मुद्दा कांग्रेस के काफी करीब है, क्योंकि इसे खुद राहुल गांधी ने उठाया है,
अमित मालवीय ने किया ट्वीट
शरद पवार के बयान आने के बाद अमित मालवीय ने ट्वीट कर अपनी प्रतिक्रिया दी है।उन्होंने कहा कि, कल तक पूरी कांग्रेस गुलाम नबी आजाद और सिंधिया को गाली दे रही थी।अब जब शरद पवार ने जेपीसी आदि के मुद्दे पर कांग्रेस को तोड़ दिया है और कांग्रेस का मज़ाक उड़ाया है, तो क्या कांग्रेस के प्रवक्ता उन्हें भी परेशान करेंगे या चुप रहेंगे? क्या इस मुद्दे पर राहुल गांधी का दृढ़ विश्वास कमजोर और लचीला है?
संजय राउत ने दी प्रतिक्रिया
वहीं संजय राउत ने शरद पवार की सफाई देने के बाद कहा कि, शरद पवार की स्थिति क्लियर हो गई है। इस बारे में उन्हें नहीं पता था।उनकी ओर से अडानी को कोई क्लीन चिट नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ उनका विचार था। इससे राष्ट्रीय या राज्य स्तर पर महाविकास अघाड़ी की एकता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

