दोपहर का खाना खाने के बाद अचानक आंखें भारी होने लगती हैं और काम में मन नहीं लगता।कई लोगों को खाना खाने के कुछ देर बाद ऐसी सुस्ती महसूस होती है।इसे आम तौर पर खाने के बाद आने वाली नींद कहा जाता है।यह हमेशा किसी बीमारी का संकेत नहीं होती।शरीर की प्राकृतिक घड़ी, खाने की मात्रा और खाने में मौजूद चीजें इसके पीछे भूमिका निभा सकती हैं।
दोपहर के समय शरीर की 24 घंटे वाली प्राकृतिक घड़ी में ऐसा बदलाव आता है, जिससे जागे रहने का संकेत कुछ कम हो जाता है।इसी वजह से खाना न खाने पर भी कई लोगों को दोपहर में सुस्ती महसूस हो सकती है।खाना खाने के बाद यह असर और ज्यादा महसूस हो सकता है।
अगर दोपहर का खाना बहुत ज्यादा या बहुत भारी है, तो खाने के बाद नींद और सुस्ती ज्यादा महसूस हो सकती है। खासकर बहुत ज्यादा कैलोरी, तली-भुनी चीजों या ज्यादा मीठे और सफेद आटे जैसे खाने से यह असर बढ़ सकता है। खाने के बाद शरीर में पाचन से जुड़े कई बदलाव होते हैं। आखिर में मिलने वाले संकेत, खून में ग्लूकोज और दूसरे पोषक तत्वों में बदलाव और दिमाग के जागने से जुड़े संकेतों में परिवर्तन मिलकर नींद जैसा एहसास पैदा कर सकते हैं। अक्सर कहा जाता है कि खाना खाने के बाद सारा खून पेट में चला जाता है, और इसी वजह से दिमाग में खून कम पहुंचता है, इसलिए नींद आती है। लेकिन यह इस घटना की सही और पूरी वजह नहीं मानी जाती। खाना खाने के बाद आने वाली सुस्ती कई शारीरिक प्रक्रियाओं के मिले-जुले असर से होती है।
अगर रात में नींद पूरी नहीं हुई है, तो दोपहर के खाने के बाद सुस्ती ज्यादा महसूस हो सकती है। लंबे समय तक जागे रहने के साथ शरीर की नींद की जरूरत बढ़ती जाती है।इसलिए पर्याप्त और अच्छी नींद लेना भी दिन में सतर्क रहने के लिए जरूरी है।
बहुत भारी खाना खाने के बजाय संतुलित और जरूरत के हिसाब से खाना लेना मददगार हो सकता है।खाने के बाद थोड़ी देर हल्की चाल से चलना भी सुस्ती कम करने में मदद कर सकता है। पानी पीना और रात में अच्छी नींद लेना भी जरूरी है। अगर हर दिन खाने के बाद बहुत ज्यादा नींद, चक्कर या कमजोरी महसूस होती है, या यह समस्या रोजमर्रा के काम को असर कर रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।कभी कभी लगातार ज्यादा नींद आना नींद की समस्या, खून की कमी, थायरॉइड या ब्लड शुगर से जुड़ी परेशानी के साथ भी देखा जा सकता है।

