जीतन राम मांझी कंफ्यूज है या नीतीश कुमार की छका रहे हैं ? सरकार छोड़कर भी महागठबंधन में क्यों है हम ?

0
98

बीरेंद्र कुमार झा

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संस्थापक जीतन राम मांझी के बेटे और बिहार सरकार के मंत्री संतोष सुमन ने नीतीश कुमार की अगुवाई वाली महागठबंधन सरकार से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने के बाद संतोष सुमन ने कहा कि वह और उनकी पार्टी अभी भी महागठबंधन में हैं।लगता है कि जीतन राम मांझी, नीतीश कुमारऔर महागठबंधन को खुद को मनाने का वक्त देना चाहते हैं, ताकि उनकी मनुहार हो और सीटों की उनकी डिमांड पर नीतीश कुमार से कुछ ठोस आश्वासन मिले ।

दूसरे नजरिए से देखें तो यह भी कह सकते हैं कि जीतन राम मांझी अभी भी जातीय समीकरणों के हिसाब से कागज पर मजबूत महागठबंधन के मोह में फंसे हैं और आगे की रणनीति को लेकर खुद कंफ्यूज हैं या फिर जानबूझकर अपने अगले कदम को लेकर नीतीश कुमार को कन्फ्यूजन में रखना चाहते हैं।

विकल्प के तौर पर बीजेपी को भी रखा है वेटिंग में

बीजेपी बाहें खोलकर जीतन राम मांझी का स्वागत करने के लिए तैयार है।मांझी खुद पिछले महीने दिल्ली में अमित शाह से मिले थे, लेकिन तब भी बाहर निकल कर उन्होंने कहा था कि उन्होंने आजीवन नीतीश कुमार के साथ रहने की कसम खाई है। फिर जून में कहने लगे कि 5 सीट नहीं मिला तो वे जिनके साथ जाएंगे वह जीत जायेगा,लेकिन जाएंगे कहां यह नहीं बताया। समझदार के लिए इशारा ही काफी होता है।जाहिर है कि वे घुमा फिराकर बीजेपी और एनडीए की बात कर रहे थे,जहां पहले से ही चिराग पासवान और मुकेश साहनी वेटिंग में हैं।मांझी ने महागठबंधन और नीतीश से पूरी तरह संबंध नहीं तोड़ा है। इस प्रकार मांझी ने बीजेपी को भी वेटिंगऔर गेसिंग में लटका रखा है।

जीतन राम मांझी के बेटे संतोष समाज ने छोड़ी नीतीश की कैबिनेट, विपक्ष की एकता मीटिंग से पहले कुनबे में फूट

जितेंद्र मांझी ने फिलहाल अपने बेटे संतोष सुमन से सिर्फ इस्तीफा दिला दिया है, जिसे मंजूर करना या न करना नीतीश कुमार के ऊपर है। नीतीश कुमार अगर उनके इस्तीफे को राज्यपाल के पास भेज देते हैं ,तब यह मान लिया जाएगा कि मांझी के नखरे उठाना अब उनके बस से बाहर ही गया है और उनका मन मांझी की उछल कूद कर के दबाव बनाने की राजनीति से भर गया है,लेकिन अगर वे इस इस्तीफा को मंजूर नहीं करते हैं तो नीतीश के पास मांझी को बतौर महागठबंधन की एक पार्टी के नेता के तौर पर 23 जून की मीटिंग में बुलाने का दबाव बनेगा। मांझी के बेटे ने विपक्षी दलों की 23 जून की एकता मीटिंग का बुलावा ‘ हम’ को नहीं दिए जाने का सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी भले ही छोटी हो लेकिन महागठबंधन का हिस्सा है।

रामविलास पासवान से छोटे मौसम वैज्ञानिक नहीं है जीतन राम मांझी, 43 साल से सरकारी नेता है ‘ हम’ के संस्थापक

जेडीयू में हम पार्टी के विलय करने की बात को अगर सच मान लिया है तो यह नीतीश कुमार के रणनीति हो सकती है कि मांझी की पार्टी हम के जेडीयू में आने से आरजेडी से सीटों के लेन-देन में उनका वजन बढ़ेगा और फिर मांझी के 2 लोग भी जेडीयू के सिंबल पर लड़ जायेंगे तो इससे पार्टी को आगे कोई परेशानी नहीं होगी। 2020 के विधानसभा में हम एनडीए में था ,तब उसे 7 सीट सीधे दिए गए थे और उसके कुछ कैंडिडेट बीजेपी के टिकट पर लड़े थे।मांझी 2019 के लोकसभा चुनाव में महागठबंधन के साथ तीन सीट पर लड़े थे।अभी वे महागतबंधन से अपनी पार्टी हम के लिए मांग तो खुलकर 5 लोकसभा सीट की कर रहे हैं, लेकिन अंदर की चाहत है कि उनको दो-तीन सीट भी मिल जाए तो वे मान जायेंगे।हालांकि महागठबंधन में अब जेडीयू के इंट्री के बाद यह संभव नहीं दिखता है।

जीतन राम मांझी ने बेटे संतोष सुमन से इस्तीफा दिलाकर नीतीश के सामने रखी शर्त

जेडीयू सूत्रों का कहना है कि मांझी को एक सीट से ज्यादा मिलने के चांस नहीं है, क्योंकि महागठबंधन में जेडीयू,आरजेडी और कांग्रेस जैसी तीन बड़ी पार्टियों के अलावा तीन लेफ्ट पार्टियां भी है।सीट तो सबको चाहिए ।मांझी के पक्ष में एक ही बात है कि बिहार में महादलित वोट दो परसेंट है, जिस पर मांझी के पकड़ होने का दावा किया जाता है। हालांकि महादलित को दलित से अलग पहचान नीतीश कुमार ने दी है।

 

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here